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इसके लिए इन उपायों को अपना सकते हैं-

बनाएं टाइम टेबल: बच्चों में अनुशासन की भावना बचपन से ही आनी चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि बच्चे पूरे दिन में क्या क्या करेंगे इसके लिए टाइम टेबल बना दें. जिसमें सुबह उठने से लेकर रात में बिस्तर पर सोने तक का समय प्रबंधन शामिल करें. ऐसा करने से बच्चे अनुशासन सीखेंगे और समय के महत्व को भी समझेंगे. इससे उनकी शैतानी करने की आदतें भी कम होंगी.

पढ़ाई का बोझ न डालें: हर समय बच्चों को पढ़ाई के लिए न टोकें. इससे बच्चों के मन में पढ़ाई को लेकर नकारात्मकता आती है. वे इससे चिढ़ने लगते हैं. जबरदस्ती करने पर पढ़ने बैठ भी जाएं तो बच्चे मन से पढ़ाई नहीं करेंगे. इससे बच्चों के दिमाग पर गलत असर पड़ता है. बच्चों की पढ़ाई का समय निश्चित कर दें, उसी समय उन्हें पढ़ने के लिए कहें. इससे बच्चों के मस्तिष्क पर पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं होगा.

मोबाइल से बनाए दूरीं: मोबाइल की लत बच्चों में तेजी से पनप रही है. यह एक विकट समस्या का रूप अख्तियार करती जा रही है. भारत में अभी तक इस समस्या से निजात पाने का कोई प्रमाणिक उपाय नहीं खोजा जा सका है. खाना खाते समय अगर बच्चे मोबाइल देखते हैं तो यह उनकी सेहत के लिए भी अच्छा नहीं है. इस आदत के कारण बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए इंटरनेट को बंद रखें. क्योंकि मोबाइल बच्चों के सेहत ही नहीं मन, मस्तिष्क, आंखों और मांसपेशियों पर भी बुरा असर डालता है. इस आदत को धीरे धीरे और मनोवैज्ञानिक ढंग से दूर करने का प्रयास करें.

महापुरूषों के बारे में बताएं: बच्चों को महापुरूषों के बारे में जरूर बताएं. उनसे जुड़ी कहानियां उन्हें सुनाएं. बच्चों को हमेशाा प्रेरणादायी बातें बताएं. बच्चों के कमरों में महापुरूषों के पोस्टर लगाएं. इससे बच्चों के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा.

आर्दश बनाएं घर का माहौल: बच्चों पर घर का माहौल बहुत असर डालता है. इसलिए घर माहौल अच्छा बनाकर रखें. पति पत्नी के बीच संबंध मधुर होने चाहिए. आपसी वार्तालाप में भी आर्दश आचरण का बोध होना चाहिए ताकि बच्चों पर इसका प्रभाव अच्छा पड़े. घर का माहौल जितना सात्विक होगा बच्चों पर उसका उतना ही प्रभाव होगा. बच्चे घर से ही सीखते हैं.

सवाल पूछने पर डांटे नहीं: जब भी बच्चे सवाल करें तो उन्हें डांटे नहीं, उनकी जिज्ञासा को मधुरता के साथ शांत करें. बच्चों को कदापि गलत जानकारी न दें. इससे बच्चों पर बहुत गलत प्रभाव पड़ता है. बच्चों में सवाल पूछने की आदत को विकसित होने दें. इससे उनकी तार्किक सोच को बढ़ावा मिलेगा और मौलिक चिंतन के रास्त खुलेंगे.

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