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प्रेग्नेंसी में 11 से कम न हो हीमोग्लोबिन
10 वर्ष पहले
चंडीगढ़. प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री में हीमोग्लोबिन की कमी मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि इन दिनों में हीमोग्लोबिन का लेवल कम से कम 11 बनाए रखें। यह सलाह बुधवार को सेफ मदरहुड डे के मौके पर सेक्टर-45 स्थित पॉलीक्लीनिक में पीजीआई की कम्युनिटी मेडिसिन, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता ने दी। डॉ. मधु ने बताया कि देश में हर साल एक लाख में 215 गर्भवती स्त्रियों की मौत गर्भावस्था के दौरान मामूली लापरवाही से हो जाती है। जागरूकता और सावधानी से इस पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ शहर और जुड़े गांवों में तो ऐसी दिक्कतें कम हैं। मगर स्लम एरिया में यह समस्या ज्यादा मिलती है। डॉ. नवप्रीत, डॉ. मदनराज ने ब्लड बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझाया। गर्भावस्था में मौत के कारण डिलीवरी के बाद मेटरनल डेथ की सबसे आम वजह ब्लीडिंग है। गर्भ में वाटर बैग का फट जाना, वेजाइनल ब्लीडिंग, तेज बुखार और एनीमिया गर्भावस्था में महिलाओं की मौत की बड़ी वजहें हैं। कैसे बरतें सावधानी प्रेग्नेंसी का पता लगने के बाद नियमित रूप से हर माह चेकअप कराएं। डिलीवरी अस्पताल में ही कराएं, घर में डिलीवरी से इंफेक्शन की संभावना ज्यादा होती है। महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा का खास ध्यान रखें। मात्रा 7 से कम होने पर खून चढ़ाना पड़ता है। आयरन की मात्रा संतुलित बनाए रखने को महिला को हरे पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खिलाएं। डिलीवरी के डेढ़ माह तक मां और शिशु की साफ-सफाई और खानपान का खास ख्याल रखें।
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