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आखिर बच्चों में क्यों पड़ते हैं मिर्गी के दौरे और इसके क्या कारण होते हैं? डॉक्टर से जानें क्या इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है
जब दिमागी गड़बड़ी की वजह से से किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे आते हैं तो इसे मिर्गी कहते हैं. बच्चों में यह समस्या प्रमुख तौर पर पाई जाती है. ग्रामीण इलाकों में तो मिर्गी के ऐसे भी मरीज हैं, जिनका कभी भी इलाज नहीं हो पाता है.
आखिर बच्चों में क्यों पड़ते हैं मिर्गी के दौरे और इसके क्या कारण होते हैं? डॉक्टर से जानें क्या इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है
सांकेतिक तस्वीर
मिर्गी बच्चों में गंभीर किस्म की बीमारी होता है. हर 200 बच्चों में से एक बच्चा इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है. एक अनुमान के तहत कहा गया है कि भारत में करीब 50 लाख मरीज मिर्गी की बीमारी से ग्रसित हैं. इनमें से अधिकतर बच्चे हैं. शहरी क्षेत्रों में मिर्गी का इलाज बहुत हद तक हो जाता है, लेकिन ग्रामीण भारत में अभी भी एक बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जिनके मिर्गी का इलाज नहीं होता है.
जवाब: सबसे पहले तो हम मिर्गी और सीज़र के बारे में ही कुछ मूल बातों को समझ लेते हैं. मिर्गी के बारे में हर किसी को पता है कि यह दिमाग की बीमारी है और इसमें दौरे पड़ते हैं. लेकिन यह समझना है कि आखिर यह दौरा है क्या. अपना दिमाग इलेक्ट्रिकल नेटवर्क से बना हुआ है. इसमें लाखों करोड़ों नेटवर्क होते हैं और इन्हीं के बल पर पूरी शरीर अपना काम करता है. कभी-कभी जब इस इलेक्ट्रिक नेटवर्क में कुछ गड़बड़ी या ऊपर-नीचे हो जाए तो मामला गड़बड़ हो जाता है. दिमाग में जब इस तरह की गड़बड़ी होती है तो उस व्यक्ति को बाहर से देखकर हम कहते हैं कि किसी व्यक्ति को दौरा पड़ा है.
इस गड़बड़ी के अनेकों कारण हो सकते हैं. किसी भी वजह इंसानों के दिमाग का बैलेंस बिगड़ जाता है. कुछ गड़बड़ियों को मिर्गी का दौरा नहीं कहा जाता है. जब यह स्थिति ठीक हो जाती है तो दौरा भी खत्म हो जाता है. फिर यह दोबारा नहीं आता है. लेकिन जब किसी बच्चे में इस तरह का मामला बार-बार होता है तो और अचानक से ही हो जाता है तो इसे मिर्गी कहते हैं.
मिर्गी किसी भी उम्र में हो सकती है. इसके लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता है. बच्चे के जन्म के पहले दिन भी किसी नवजात में मिर्गी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे भी मामले पाए गए हैं. लेकिन, इसके कुछ हॉटस्पॉट्स भी हैं. जैसे – बच्चे के जन्म का पहला एक साल, 3 से 6 साल की उम्र और इसके अलावा 08 से 12 या 14 साल की उम्र में मिर्गी के मामले में सबसे ज्यादा आते हैं. कई लोगों को बुढ़ापे में भी मिर्गी के मामले सामने आते हैं. यह भी जरूरी नहीं कि इसी समय में मिर्गी की बीमारी चालू हो, तकनीकी रूप से समझें तो किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में मिर्गी के लक्षण आ सकते हैं.
मिर्गी के कई कारण हो सकते हैं. प्रमुख तौर पर इसे दो भागों में बांटा गया है. पहला तो यह कि किसी वजह से ब्रेन को डैमेज पहुंचा हुआ है. इस तरह के डैमेज की वजह से इलेक्ट्रिक नेटवर्क में बार-बार खराबी आने की प्रवृत्ति बन जाती है. भारत में मिर्गी की सबसे बड़ी वजह यही है. कई बार बच्चों की डिलीवरी के समय में कुछ दिक्कतों से मिर्गी की शिकायत आ सकती है.
मिर्गी का दूसरा कारण नैसर्गिक होता है. दिमाग में समय-समय पर कुछ गड़बड़िया होती रहती है. मिर्गी पैदाइशी भी हो सकती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि परिवार में पहले से ही किसी को मिर्गी को बीमारी हो. इस तरह की कारण वाली मिर्गी में इलाज करना थोड़ा आसान होता है.
मिर्गी के प्रमुख रूप से दो ही प्रकार होते हैं. कई बार मरीज गिर गया, पूरी बॉडी झटके आ रहे है, आंखें ऊपर की हैं, मुंह से झाग आ रहा है. इसके अलावा कभी-कभी बस एक झटका सा आता है. ये दोनों भी मिर्गी के दौर होते हैं. कई बार होता है कि बच्चा अचानक से किसी चीज में खो गया है, डे ड्रीमिंग कर रहा है. ये भी एक प्रकार की मिर्गी के लक्षण हैं. इन सभी में मूल बात एक ही है कि दिमाग में किसी न किसी प्रकार की गड़बड़ी है. इसे देखने को रूप अलग-अलग हो सकता है. मिर्गी के प्रकार और कारण के आधार पर ही यह तय होता है कि किस तरह का इलाज होगा.
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