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Stroke: स्ट्रोक क्या है, कितनी तरह का होता है, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

मस्तिष्क की किसी नस में रक्त का प्रवाह ठीक से न होने या नस के फट जाने या ब्लॉकेज की वजह से स्ट्रोक होता है. स्ट्रोक के मरीज को समय से इलाज मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है. जानते हैं स्ट्रोक क्या है, लक्षण, कारण और इलाज.

स्ट्रोक
Stroke: जब मस्तिष्क में कोई रक्त वाहिका फट जाती है और उससे खून बहने लगता है या मस्तिष्क को खून की आपूर्ति में रुकावट आती है तो स्ट्रोक आता है. रक्त वाहिका के फटने या उसमें किसी तरह की रुकावट के कारण मस्तिष्क के उत्तकों तक रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है. ऑक्सीजन की कमी की वजह से मस्तिष्क की कोशिकाएं और उत्तक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और तेजी से नष्ट होने लगते हैं. रोग नियंत्रण एंव रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार अमेरिका में स्ट्रोक मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है. अकेले अमेरिका में ही हर साल 7 लाख 95 हजार लोगों को स्ट्रोक आता है. भारत की बात करें तो यहां स्ट्रोक मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण और विकलांगता का पांचवा सबसे बड़ा कारण है. एक शोध के अनुसार भारत में प्रति एक लाख लोगों पर हर वर्ष करीब 150 लोगों को स्ट्रोक की समस्या होती है. हालांकि, भारत जैसे देश में इसका सही-सही आंकड़ा पता लग पाना मुश्किल है, जहां आज भी बहुत से लोग इलाज के अभाव में मर जाते हैं और करोड़ों लोग झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहते हैं.

स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी और इसमें जल्द से जल्द इलाज मिलना बहुत जरूरी होता है. अगर समय पर इलाज मिल जाए तो न सिर्फ व्यक्ति की जिंदगी बच सकती है, बल्कि मस्तिष्क को और ज्यादा होने वाले नुकसान और जटिलताओं से भी बचा जा सकता है. सही इलाज की मदद से स्ट्रोक की समस्या में विकलांगता से भी बचा जा सकता है.
स्ट्रोक कितने तरह का होता है?

ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA): इस तरह के स्ट्रोक का कारण मुख्यत: रक्त का थक्का (Blood Clot) होता है, जो आमतौर पर अपने आप वापस रक्त में घुल जाता है. 10-15 फीसद स्ट्रोक ट्रांजिएट इस्केमिक अटैक होते हैं.
इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic stroke): इस तरह का स्ट्रोक ब्लड क्लॉट या धमनी में प्लाक जमा होने के कारण आई रुकावट की वजह से होता है. इस्केमिक स्ट्रोक के लक्षण और जटिलताएं TIA की तुलना में ज्यादा समय तक रह सकती हैं और यह स्थायी भी हो सकते हैं. सीडीसी के अनुसार करीब 87 फीसद स्ट्रोक इस्केमिक स्ट्रोक होते हैं.
हेमोरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic stroke): इसे रक्तस्रावी स्ट्रोक भी कहा जाता है. मस्तिष्क में मौजूद किसी रक्त वाहिका के फटने या उसमें लीकेज होने की वजह से मस्तिष्क में खून रिसने की वजह से हेमोरेजिक स्ट्रोक होता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार 13 फीसद स्ट्रोक होमोरेजिक होते हैं.

स्ट्रोक के लक्षण क्या होते हैं?
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में कमी की वजह से मस्तिष्क के भीतर के उत्तकों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से, शरीर के अलग-अलग अंगो को नियंत्रित करते हैं. स्ट्रोक के लक्षण शरीर के उन हिस्सों पर दिखता है, जिन हिस्सों को स्ट्रोक का शिकार होने वाला मस्तिष्क का भाग कंट्रोल करता है. स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति को जितनी जल्दी इलाज और उचित देखभाल मिल जाए, उनता ही बेहतर इसके परिणाम देखने को मिलते हैं. यही वजह है कि स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में समझा जाए, ताकि आप आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई कर सकें.

पक्षाघात (Paralysis)
हाथ, पैर और चेहरे का सुन्न पड़ना या कमजोरी महसूस होना, खासतौर पर शरीर के एक तरफ.
बोलने में दिक्कत और दूसरों को समझने में समस्या.
बोलने पर भाषा समझ में न आना (Slurred Speech).
भ्रम, भटकाव या प्रतिक्रिया में कमी होना.
व्यवहार में अचानक बदलाव आना, खासतौर पर बातों को नकारना.
नजर संबंधी समस्याएं, विशेषतौर पर एक आंख या दोनों आंखों से देखने में समस्या. आंखों के आगे काला धब्बा से लगना या धुंधला दिखना, डबल विजन जैसी समस्याएं.
चलने-फिरने में दिक्कत होना. (Stroke के ये रिस्क फैक्टर जान लें और अपने करीबी लोगों की जान बचाएं)
संतुलन और समन्वय में समस्या होना.
चक्कर आना
अचानक और बिना किसी कारण के गंभीर सिरदर्द होना
मिर्गी के दौरे पड़ना
उल्टी और मितली आना

स्ट्रोक आने पर जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता होती है. अगर आपमें या आपके किसी परिचित में स्ट्रोक के लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत इमरजेंसी नंबरों पर फोन करके स्वास्थ्य सेवाएं लें. डॉक्टर आपको सही समय पर सही इलाज देकर निम्न कुछ समस्याओं से आपको बचा सकते हैं –

मस्तिष्क क्षति (Brain Damage)
दीर्घ कालीन विकलांगता (Long-term Disability)
मौत (Death)

ब्रेन स्ट्रोक क्यों होता है?

ब्रेन स्ट्रोक का कारण क्या है, यह इसके प्रकार पर निर्भर करता है. स्ट्रोक तीन तरह का होता है, जिसके बारे में हमने आपको ऊपर बताया है. इनको भी आगे कई अन्य हिस्सों में बांटा जा सकता है.

एम्बोलिक स्ट्रोक (embolic stroke)
थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक (thrombotic stroke)
इंट्रासेरेब्रल स्ट्रोक (intracerebral stroke)
सबरैकनोइड स्ट्रोक (subarachnoid stroke)

हर तरह के स्ट्रोक का शरीर पर असर भी अलग-अलग पड़ता है और इसका इलाज व रिकवरी प्रोसेस भी अलग ही होती है. मस्तिष्क की नस में ब्लॉकेज या रस के फटने या लीक होने के कारण स्ट्रोक होता है.
स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर क्या-क्या हैं?

कुछ जोखिम कारकों की वजह से आप स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं. अमेरिका में नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार स्ट्रोक के लिए जोखिम कारक ये हैं –

डाइट (Diet)
अगर आप असंतुलित आहार का सेवन करते हैं तो आपको स्ट्रोक का खतरा हो सकता है. इस तरह के असंतुलित आहार में शामिल हैं –
नमक का ज्यादा इस्तेमाल
सैचुरेटिड फैट
ट्रांस फैट
कोलेस्ट्रॉल
निष्क्रियता
व्यायाम न करना या कम करना भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है.

नियमित तौर पर एक्सरसाइज करने के कई तरह के लाभ होते हैं. सीडीसी के अनुसार हर व्यस्क व्यक्ति को हर सप्ताह कम से कम 2.5 घंटे व्यायाम करना चाहिए, चाकि वह स्वस्थ रह सकें. यानी सप्ताह में कुछ बार ब्रिस्क वॉक से भी स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है. (Stroke Week: जानलेवा है स्ट्रोक, तस्वीरों के जरिए जानें इससे बचने के उपाय)
शराब का अत्यधिक सेवन

अत्यधिक शराब पीने से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. अगर आप शराब पीते हैं तो संयमित मात्रा में पिएं. संयमित मात्रा का मतलब महिलाओं के लिए दिनभर में एक ड्रिंक और पुरुषों के लिए 24 घंटे में 2 ड्रिंक से ज्यादा नहीं होता. शराब का अत्यधिक सेवन करने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. यह ट्राइग्लिसराइड के स्तर को भी बढ़ा देता है, जिसकी वजह से धमनियों में प्लाक जमा होने के कारण रक्त प्रवाह बाधित होता है.
तंबाकू का सेवन

तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन करना आपकी सेहत के लिए बहुत घातक साबित हो सकता है. तंबाकू के सेवन से रक्त वाहिकाओं और दिल को नुकसान पहुंचता है, जिसकी वजह से स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है. तंबाकू में मौजूद निकोटीन ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा देता है.
पारिवारिक इतिहास

कुछ व्यक्तिगत कारणों से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें पारिवारिक इतिहास सबसे अहम है. कुछ परिवारों में जेनेटिक स्वास्थ्य कारणों जैसे ब्लड प्रेशर के कारण स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है. इसके अलावा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है. यही हीं अधिक उम्र में स्ट्रोक का खतरा भी ज्यादा होता है. कुछ खास इलाके के लोगों या जेनेटिक के लोगों में स्ट्रोक का खतरा भी ज्यादा होता है. कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी स्ट्रोक का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसमें शामिल हैं –

पूर्व में स्ट्रोक आया हो या टीआईए
हाई ब्लड प्रेशर
हाई कोलेस्ट्रॉल
बहुत अधिक वजन (मोटापा) होना
कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कुछ दिल से जुड़ी समस्याएं.
हार्ट के वाल्व में कोई डिफेक्ट
हार्ट चैंबर का बढ़ना और अनियमित दिल की धड़कन
सिकल सेल रोग
डायबिटीज
ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर
स्ट्रोक का इलाज कैसे होता है?

स्ट्रोक से उबरने के लिए सही-सही मेडिकल इवैलुएशन और जल्द से जल्द इलाज मिलना जरूरी है, ताकि इससे उबरा जा सके. इसमें एक कहावत है, ‘Time lost is brain lost‘ यानी इलाज मिलने में जितना समय ज्यादा लगेगा उतना ही दिमाग की गतिविधिया सिथिल पड़ेंगे. स्ट्रोक का इलाज उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है.

मस्तिष्क में रक्त का थक्का और ब्लॉकेज के कारण इस्केमिक स्ट्रोक या टीआईए होता है. इन दोनों तरह से स्ट्रोक का इलाज आमतौर पर एक ही तरह से होता है. इसमें रक्त के थक्के जमने सो रोकने वाली दवाएं शामिल हैं.

मेकैनिकल थ्रॉम्बेक्टमी के दौरान डॉक्टर मरीज के सिर की बड़ी रक्त वाहिका में कैथेटर डालते हैं. इसके बाद वह रक्त के थक्के को निकालने के लिए एक यंत्र का इस्तेमाल करते हैं. अगर स्ट्रोक आने के 6 से 24 घंटे के भीतर किया जाए तो यह सर्जरी सबसे सफल सर्जरी है.

ब्लॉकेज को खोलने और जब डॉक्टर को लगे कि आपकी धमनियों की दीवारें कमजोर पड़ गई हैं तो वह स्टेंट डालकर धमनियों को चौड़ा करते हैं, ताकि रक्त आसानी से प्रवाहित हो सके.

जब अन्य तरह के इलाज सफल नहीं होते हैं तो डॉक्टर सर्जरी का फैसला लेते हैं. सर्जरी की मदद से धमनियों में से रक्त के थक्के और प्लाक को हटाया जाता है. अगर रक्त का थक्का बड़ा हो तो डॉक्टर ओपन सर्जरी भी कर सकते हैं.
हेमोरेजिक स्ट्रोक

मस्तिष्क की नस के फटने या लीक होने के कारण हेमोरेजिक स्ट्रोक होता है और इसके लिए डॉक्टरों को अलग तरह के इलाज के बारे में निर्णय लेना होता है. इसके इलाज के लिए ब्लड प्रेशर को कम करने की दवाएं दी जाती हैं. मिर्गी के दौरे आने से रोकने की दवाएं दी जाती है. रक्त वाहिकाओं का संकुचन रोका जाता है. इसके ऑपरेशन में डॉक्टर कमजोर नस या जहां हेमोरेजिक स्ट्रोक हुआ वहां तक एक लंबी ट्यूब लेकर जाते हैं. यहां वह एक कॉइल जैसी डिवाइस लगा देते हैं, इससे रक्त का नस से बाहर और नहीं फैलता.

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