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जब ठंड के कारण शरीर अपनी गर्मी ज्यादा तेजी से खोने लगता है तो शरीर का तापमान नीचे गिरने लगता है। यदि यह 35 डिग्री या इससे कम हो जाता है तो इस स्थिति को हाइपोथर्मिया कहते हैं। हाइपोथर्मिया के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है और दिल की गति कम हो जाती है।
हाइपोथर्मिया के कारण (Causes to hypothermia in Hindi)
आप जहा रहते हैं उसकी वजह से भी आपके शरीर के तापमान गिरना एक कारण हो सकता है। अधिक ठंडे क्षेत्रों में रहने से शरीर का तापमान भी कम होने लगता है जिसकी वजह से, अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है।
जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं वे विशेष रूप से हृदय रोग से पीड़ित हैं। शिशुओं और बुजुर्ग वयस्कों को हाइपोथर्मिया का सबसे अधिक खतरा है।
यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की उनकी कम क्षमता के कारण है। ऐसे लोगों को ठंड के मौसम के लिए तैयार रहना चाहिए। हाइपोथर्मिया से बचने के लिए घर पर एयर कंडीशनिंग को भी नियंत्रित किया जाना चाहिए।
मानसिक बीमारी और मनोभ्रंश, मानसिक बीमारियां, जैसे कि द्विध्रुवी विकार, हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ाते हैं। डिमेंशिया हाइपोथर्मिया के खतरे को भी बढ़ा सकता है। मानसिक बीमारी वाले लोगों को ठंड के मौसम में ठीक से कपड़े नहीं पहनने चाहिए। उन्हें यह भी महसूस नहीं होता है कि उनका शरीर ठंडा है और परिणामस्वरूप ठंड के मौसम में बहुत लंबे समय तक बाहर रहता है।
नशीले पदार्थ लेने व शराब का सेवनं करने से ठंड महसूस करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे व्यक्ति ठंडी के मौसम में बेहोश हो सकता है।
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