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6 माह से ज्यादा उम्र के बच्चे, जिन्हें ठोस आहार देना शुरू किया जाता है, उनके लिए सेरेलक पौष्टिक आहार माना जाता है.

सेरेलक शिशु को खिलाने के क्या फायदे है

हम सभी जानते है। कि जब शिशु के शरीर का विकाश हो रहा होता है। उस वक्त सही विकाश के लिए सिर्फ अस्तानपन या फार्मूला मिल्क पर निर्भर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कुछ अर्ध - थोश या थोश आहार शामिल करने ही पड़ते हैं। उन्ही में से एक सेरेलक भी है।

भारत में सेरेलक फोर्टिफाइड बेबी सीरियल दूध बिभिजन प्रकार में उपलध है। और आप बच्चे की उम्र तथा पसंद के मुताबिक विभिन स्वादों की कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर न्यूट्रोनेशनल प्लान - किस उम्र से सेरेलक शुरू करना है। और कोंन सा फ्लेवर देना है। इत्यादि ।

शिशु को इसका स्वाद बहुत पसंद आता है।

नेस्ले एक जाना - माना ब्रांड है। अतः गुणवत्ता की गरंटी है।

शिशुओं को इसे पचाने में कोई परेशानी नही होती है।

इसको देने के बाद शिशु को बार - बार भूख नही लगती है।

शिशु को इससे आने वाले महक भी काफी पसंद आती है।



सेरेलक खाने के side effect क्या है ?

अगर सेरेलक अच्छे से न घोला जाए । तो गांठे बन जाती है।

कुछ शिशुओं को कब्ज एलर्जी ओर रेलेश जैसे तकलीफों का सामना भी करना पड़ता है।

कुछ के मुताबिक सेरेलक को पहचाना उनके शिशु के लिए आसान नही था ।

कुछ माताओं ने तो यह तक भी कहा है। कि सेरेलक देने के बाद उनके शिशु की शौच से बहुत बुरी दुगर्न्ध आणि शुरू हो गयी है।

सेरेलक देने के शुरुआती दौर में अक्सर बच्चों को पेट का दर्द होने की समस्या आता है। अगर बच्चे को यह खिलाने के बाद पेट मे दर्द हो तो उसके गाढ़ेपन पर विशेष ध्यान दे।

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