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ऑपरेशन से डिलीवरी कैसे होती है?
सिजेरियन सेक्शन या सी-सेक्शन गर्भस्थ शिशु को योनि की बजाय पेट के जरिये जन्म दिलाने की चिकित्सकीय प्रक्रिया है।

सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर आपके पेट और गर्भाशय पर चीरा लगाती हैं, ताकि शिशु का जन्म हो सके। यदि जन्म के दौरान कोई जटिलता हो तो यह डिलीवरी का सबसे शीघ्र तरीका है।

अधिकांश सिजेरियन ऑपरेशन स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया देकर किए जाते हैं, ताकि आपको दर्द महसूस न हो। पूरी प्रक्रिया के दौरान आप जगी होंगी और आपको पता होगा कि आसपास क्या हो रहा है।

हालांकि, कुछ मामलों में जनरल एनेस्थीसिया देने की जरुरत हो सकती है। आपकी और शिशु की सेहत को देखते हुए डॉक्टर यह निर्णय लेंगी कि आपको किस तरह के एनेस्थीसिया की जरुरत है।

सी-सेक्शन पेट का एक बड़ा ऑपरेशन होता है और इसमें कुछ जोखिम भी होते हैं। आमतौर पर यह तभी किया जाता है जब यह आपके और गर्भस्थ शिशु के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प हो।
कैसे पता चलेगा कि मेरी डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन?
आपकी डिलीवरी नॉर्मल होगी या फिर सिजेरियन, यह आपकी ​व्यक्तिगत स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ही तय कर सकती हैं। अगर आपकी पूरी गर्भावस्था बिना किसी समस्या के एकदम सामान्य रही है, तो संभावना है कि आपकी नॉर्मल डिलीवरी ही होगी। वहीं, अगर आपकी प्रेगनेंसी में जटिलताएं रही हैं या फिर यह उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था है, तो फिर शायद आपके और शिशु के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सिजेरियन डिलीवरी ही की जाएगी।

कई बार प्रसव के दौरान कुछ अप्रत्याशित जटिलताएं सामने आ जाती हैं, जिनकी वजह से आपातकालीन (इमरजेंसी) सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। वहीं, कुछ मामलों में गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा के डर से या मुहुर्त डिलीवरी के लिए पूर्व नियोजित या ऐच्छिक (इलेक्टिव) सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प चुनती हैं।
इमरजेंसी और पूर्व-नियोजित सिजेरियन डिलीवरी में क्या अंतर होता है?
कुछ मामलों में सिजेरियन ऑपरेशन की तिथि पहले से तय कर दी जाती है। वहीं कुछ अन्य मामलों में ऑपरेशन की जरुरत अप्रत्याशित कारणों की वजह से पड़ती है।

यदि आपको पहले से पता हो कि आपका सिजेरियन ऑपरेशन होने वाला है, तो इसे 'ऐच्छिक' या 'पूर्व-नियोजित' सिजेरियन कहा जाता है।

ऐच्छिक सिजेरियन आमतौर पर गर्भावस्था के पूर्ण अवधि पर पहुंच जाने और प्रसव शुरु होने के ठीक पहले किया जाता है। यह सामान्यत: 37 से 39 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच होता है।

यदि आपको पहले से पता नहीं था और अचानक से स्थिति को देखते हुए सिजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया जाता है, तो इसे गैर-नियोजित या इमरजेंसी सिजेरियन कहा जाता है।

अधिकांश इमरजेंसी सिजेरियन तभी किए जाते हैं जब प्रसव शुरु हो चुका होता है। यदि आप या गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा हो या फिर कोई अन्य जटिलता हो तो इमरजेंसी सी-सेक्शन किया जाता है।

कभी-कभार यदि अचानक से जटिलताएं उत्पन्न हो जाएं तो आपातकाल सीजेरियन ऑपरेशन गर्भावस्था के अंतिम चरण में (28 सप्ताह के बाद) भी करना पड़ सकता है।
पूर्व-नियोजित सी-सेक्शन डिलीवरी करवाने के क्या कारण होते हैं?
यदि कोई स्वास्थ्य जटिलता हो या फिर नॉर्मल डिलीवरी से गर्भवती महिला या गर्भस्थ शिशु को खतरा हो सकता हो, तो ऐच्छिक सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जाती है।

कुछ विशिष्ट मामलों में डॉक्टर काफी पहले ही पूर्वनियोजित सी-सेक्शन करने का निर्णय ले सकती हैं। वे आपको और आपके परिवार को यह बताएंगी कि पूर्व नियोजित सिजेरियन ऑपरेशन की जरुरत क्यों है। इसके निम्न कारण हो सकते हैं:

आपका शिशु गर्भ में नितंब नीचे और सिर उपर (बॉटम डाउन या ब्रीच पॉजिशन) वाली अवस्था में है।
आपका शिशु गर्भ में तिरछी या अनुप्रस्थ (ट्रांसवर्स) अवस्था में है या फिर अपनी अवस्था बदलता रहता है (अनस्टेबल लाइ)।
आपकी अपरा नीचे की तरफ स्थित है (प्लेसेंटा प्रिविया)।
आपको कोई इनफेक्शन है जैसे कि जेनिटल हर्पीस या एचआईवी, जो कि नॉर्मल डिलीवरी के दौरान शिशु को पारित हो सकता है।
आपके गर्भ में जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु हैं।
आपकी प्री-एक्लेमप्सिया की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, जिससे डिलीवरी में देरी करना खतरनाक हो सकता है।
आपका गर्भाशय से जुड़ा कोई ऑपरेशन हो चुका है या कई सिजेरियन ऑपरेशन हो चुके हैं।
योनि के जरिये प्रसव में कोई अवरोध है। उदाहरण के तौर पर बड़े फाइब्रॉइड की वजह से योनि के जरिये डिलीवरी होना मुश्किल या नामुमकिन हो।
गर्भस्थ शिशु के सामान्य से बड़ा होने की आशंका हो (मैक्रोसोमिया)।
आपको अपरा के काल प्रभावन (ऐजिंग प्लेसेंटा) की समस्या है।

कुछ महिलाएं प्रसव पीड़ा के डर से नॉर्मल डिलीवरी करवाना नहीं चाहती। कभी-कभार गर्भवती महिला और उनके परिवार वाले शिशु का जन्म किसी विशेष दिन करवाना चाहते हैं और इसलिए डॉक्टर से ऐच्छिक सीजेरियन करने का अनुरोध करते हैं।

डॉक्टर द्वारा बताए कारणों के अलावा यदि किन्हीं अन्य कारणों से आप या परिवार वाले नियोजित सिजेरियन ऑपरेशन करवाने का सोच रहे हैं, तो इसका फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करें। सी-सेक्शन एक बड़ा ऑपरेशन होता है। सिजेरियन प्रसव के बाद इनफेक्शन और बुखार जैसी जटिलताएं विकसित होने की संभावना ज्यादा रहती है। साथ ही, हो सकता है सिजेरियन करवाने का निर्णय आपके शिशु के लिए भी बेहतर विकल्प न हो।

आप पहले डॉक्टर से नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी दोनों की प्रक्रिया, फायदे और नुकसान समझें। इससे आपको यह फैसला करने में आसानी होगी कि आप ऐच्छिक सिजेरियन करवाना चाहती हैं या नहीं।

अंतत: आपकी डॉक्टर ही इस बात का निर्णय बेहतर कर सकती हैं कि आपके मामले में ऐच्छिक सिजेरियन करना आपके और शिशु के लिए जरुरी और उचित है या नहीं।
इमरजेंसी सिजेरियन डिलीवरी किन कारणों से की जाती है?
जिन महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी होने की संभावना होती है उनमें से कुछ महिलाओं को कई बार तुरंत व अनियोजित सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की जरुरत पड़ सकती है। आपातकाल सिजेरियन निम्नलिखित कारणों से करवाना पड़ सकता है:

आपका सिजेरियन ऑपरेशन ही होने वाला था, मगर ऑपरेशन से पहले ही आपकी पानी की थैली फट गई या आपका प्रसव शुरु हो गया।
आप प्राकृतिक प्रसव के जरिये शिशु को जन्म देने वाली थीं, मगर आपका प्रसव बीच में रुक गया या बहुत धीरे हो गया है। ऐसे में डॉक्टर आपको सिजेरियन करवाने की सलाह देंगे ताकि शिशु का जन्म जल्दी हो सके।
गर्भावस्था या प्रसव के दौरान ऐसी जटिलता उत्पन्न हो गई है, जिससे आपकी और शिशु की जान को खतरा हो सकता है।
आपकी अपरा का खंडन (प्लेसेंटल एबरप्शन) हुआ है। ऐसा तब होता है जब अपरा गर्भाशय की दीवार से अलग होने लगती है। इसका मतलब है कि शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, जिस वजह से उसका जन्म तुरंत करवाना होगा।
पिछली सिजेरियन डिलीवरी में जिस जगह चीरा और टांके लगे थे, वह जगह खुलने लग जाए। इसे अंग्रेजी में यूटेरीन रप्चर कहा जाता है। हालांकि, ऐसा बहुत कम होता है, मगर यदि हो तो यह शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
प्रसूति चिमटी या वेंटूस या फिर दोनों की सहायता से नॉर्मल डिलीवरी करवाने के प्रयास विफल रहे हैं।
शिशु की हृदय गति अनियमित हो गई है और वह शायद योनि के जरिये प्रसव सहन न कर पाए।
शिशु के जन्म से पहले ही गर्भनाल ग्रीवा के जरिये बाहर आ गई है। इस स्थिति में बाहर निकली हुई नाल का प्रसव के दौरान दबने का खतरा रहता है, जिससे शिशु तक ऑक्सीजन की सप्लाई अवरुद्ध हो सकती है।
आपका काफी ज्यादा खून बह चुका है, दिल की धड़कन भी काफी तेज चल रही है या फिर रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) काफी बढ़ गया है।
आपकी डॉक्टर को सेफेलोपेल्विक डिस्प्रोपोर्शन (सीपीडी) की आशंका है। यह वह स्थिति है जब मां के श्रोणि क्षेत्र और शिशु के सिर के माप में काफी अंतर हो। इसकी वजह से हो सकता है शिशु प्रसव नलिका से होकर नीचे न आ सके या जन्म लेने के लिए सिर नीचे वाली अवस्था में न आ पाए।

सिजेरियन डिलीवरी के लिए मैं क्या तैयारी कर सकती हूं?
डॉक्टर आप और आपके परिवार के साथ ऑपरेशन की प्रक्रिया के बारे में चर्चा करेंगी। वह निम्नांकित बातें बताएंगी:

आपका सिजेरियन ऑपरेशन करना जरुरी क्यों है
सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान क्या होगा
आपको और शिशु को हो सकने वाले संभावित खतरों के बारे में समझाना
सिजेरियन ऑपरेशन न करवाने पर क्या जोखिम हो सकते हैं
ऑपरेशन के दौरान वे किस तरह का एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) देना चाह रही हैं

डॉक्टर आपको शायद जघवास्थि (प्यूबिक एरिया) के बाल न हटाने की सलाह देंगी, इसलिए ऑपरेशन से करीब एक हफ्ते पहले से आप प्यूबिक हेयर वैक्स या शेव न करें। अस्पताल में ही ऑपरेशन से पहले जघवास्थि क्षेत्र के बालों को हटाया जाएगा। एंटिसेप्टिक के साथ इसे करना ज्यादा सुरक्षित है। इससे इनफेक्शन का खतरा कम हो जाता है।

यदि आपकी पूर्वनियोजित सिजेरियन डिलीवरी हो रही है, तो आपको ऑपरेशन से छह घंटे पहले से कुछ भी न खाने के लिए कहा जाएगा।

अगर, आपको इमरजेंसी सिजेरियन के दौरान जनरल एनेस्थिसिया की जरुरत पड़ती है, तो पहले आपके पेट के अंदर के अवयवों को रबड़ ट्यूब के जरिये बाहर निकाला जाएगा।

कई बार डॉक्टरों के लिए भी आपको या आपके परिवार को हर छोटी जानकारी देना संभव नहीं हो पाता, विशेषकर इमरजेंसी सिजेरियन की स्थिति में।
सिजेरियन ऑपरेशन किस तरह किया जाता है?
यहां चरणबद्ध तरीके से बताया गया है कि सामान्यत: सिजेरियन ऑपरेशन से शिशु का जन्म कैसे होता है।
सिजेरियन ​ऑपरेशन से ठीक पहले
ऑपरेशन से पहले आपको निम्नांकित तरीकों से तैयार किया जाएगा, जैसे कि:

आपको अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा और वहां से मिलने वाला विसंक्रमित गाउन पहनने के लिए कहा जाएगा।
ऑपरेशन से पहले की जांचें की जाएंगी। आपके ब्लड ग्रुप का पता लगाने और आयरन के स्तर की जांच करने के लिए खून का नमूना लिया जाएगा। अगर, आपको एनीमिया है और आपका काफी अधिक खून बह जाता है, तो आपको खून चढ़वाने की जरुरत पड़ेगी। अस्पताल पहले से इसकी तैयारी करके रखेगा।
डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन शुरु करने से पहले आपको एक सहमति प्रपत्र पर दस्तखत करने के लिए भी कहा जाएगा।
आपके जननांग क्षेत्र के बालों को शेव किया जाएगा।
आपको अपनी सभी ज्वैलरी भी उतारनी होगी
अगर आपके दांतों पर तार या ब्रेसिज लगे हैं या फिर नकली दांत हैं, तो उन्हें भी निकालना पड़ेगा।
अगर, आपने मेक-अप कर रखा हो या नेल पॉलिश लगाई हो, तो वह भी हटा दी जाएगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान आपकी त्वचा की रंगत पर भी नजर रखना जरुरी है।
आप कांटेक्ट लैंस भी नहीं पहन सकेंगी। यदि आप चश्मा पहनती हैं, तो उन्हें अपने पति को दे दें, ताकि डिलीवरी के बाद आप अपने लाडले शिशु को देख सकें।

इस सबके बाद जब आप तैयार हो जाती हैं, तो आपको ऑपरेशन थियेटर ले जाया जाता है।
सी-सेक्शन डिलीवरी के लिए ऑपरेशन थिएटर पहुंचने पर
आपको ऑपरेशन टेबल पर लिटाया जाएगा, जो एक तरफ से हल्की सी झुकी हुई होगी। ऐसा इसलिए ताकि आपके गर्भ के वजन से फेफड़ों में रक्त की आपूर्ति कम न हो जाए, जिससे आपका रक्तचाप भी घट सकता है।

इसके बाद निम्न प्रक्रिया होगी:

ब्लड प्रेशर पर नजर रखने के लिए आपकी बाजू में बैंड या कफ बांधा जाएगा।
आपकी बाजू की नस में एक ड्रिप डाली जाएगी। इससे आपको तरल पदार्थ और दवाएं मिलती रहेंगी, जिससे ब्लड प्रेशर को घटने से रोका जा सकेगा।
आपको बेहोशी की दवा यानि एनेस्थीसिया दिया जाएगा। आपको किस तरह का एनेस्थीसिया दिया गया है, इसे देखते हुए ऑपरेशन टेबल पर आपकी स्थिति बदली जा सकती है। रीजनल एनेस्थीसिया - रीढ़ की हड्डी मे दिए जाने वाला (स्पाइनल) या एपीड्यूरल - का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह के एनेस्थीसिया में आपके शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाता है, मगर आप शिशु के जन्म के दौरान जगी रहती हैं। वहीं, जनरल एनेस्थीसिया से आपको नींद आ जाती है।
एक पतली ट्यूब या नलिका (कैथेटर) आपके मूत्रमार्ग के जरिये मूत्राशय में डाली जाएगी। यह शिशु के जन्म के बाद तक लगी रहेगी। स्पाइनल या एपीड्यूरल एनेस्थीसिया की वजह से आपका मूत्राशय शायद सही से काम न करे, इसलिए कैथेटर मूत्राशय को पूरी तरह खाली कर देता है और यह ऑपरेशन के लिए तैयार होता है। आपको दर्द निवारकों के प्रभाव की वजह से यह महसूस नहीं होगा।
पेट के जिस हिस्से पर चीरा लगाया जाना है, वहां से बाल हटाए जाएंगे और एंटीसेप्टिक से उस जगह को साफ किया जाएगा। इसके बाद उस जगह को विशेष विसंक्रमित चादर से ढक दिया जाता है। इसे बीच में से काट दिया जाता है, ताकि जिस स्थान पर ऑपरेशन किया जाएगा, केवल वही खुला रहे।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑपरेशन से पहले, इसके दौरान और बाद में भी आपके दिल की धड़कन पर नजर बनाए रहेंगे। आपके दिल की धड़कन की हाथ से या फिर इलैक्ट्रोनिक तरीके से निगरानी की जाएगी। अगर, इलैक्ट्रोनिक तरीके से निरीक्षण किया जा रहा है, तो आपकी छाती पर इलैक्ट्रोड्स लगाए जाएंगे। हो सकता है उंगली से नब्ज की निगरानी के लिए फिंगर पल्स मॉनीटर पर लगाया जाए।

आपको निम्नांकित चीजें दी जाएंगी:

संक्रमण को दूर रखने के लिए एंटीबायोटिक्स का इंजेक्शन
आपको उल्टी करने से रोकने के लिए मिचली दूर करने की दवाई
सिजेरियन के दौरान और इसके तुरंत बाद प्रभावशाली दर्द निवारक दवाई
लंबे समय तक रहने वाली पीड़ा के लिए दर्द निवारक दवाई
अगर, शिशु संकट में हुआ (फीटल डिस्ट्रेस), तो आपको मास्क के जरिये ऑक्सीजन दी जाएगी

आप यह जानकर शायद आश्चर्य करेंगी कि एक सिजेरियन ऑपरेशन करने के लिए कितने सारे लोगों की जरुरत होती है। ऑपरेशन थियेटर लोगों से भरा होगा, जो अपना-अपना नियत कार्य कर रहे होंगे।
सिजेरियन​ ​ऑपरेशन के दौरान
जब आप ऑपरेशन टेबल पर लेटती हैं, तो आपकी छाती के ऊपर से एक पर्दा या स्क्रीन लगा दी जाएगी ताकि आप ऑपरेशन देख न पाएं।

चीरा लगाने की तैयारी
एनेस्थीसिया वाले डॉक्टर देखेंगे कि दर्द निवारक उचित ढंग से काम कर रही है या नहीं। जब वह क्षेत्र पूरी तरह सुन्न हो जाता है, तो डॉक्टर एनेस्थीसिया वाले डॉक्टर देखेंगे कि दर्द निवारक उचित ढंग से काम कर रही है या नहीं। जब वह क्षेत्र पूरी तरह सुन्न हो जाता है, तो डॉक्टर पेट की त्वचा में चीरा लगाते हैं। यह चीरा आमतौर पर आड़ा (हॉरिजॉन्टल) लगाया जाता है, मगर कुछ मामलों में लंबवत (​वर्टिकल) चीरे की जरुरत पड़ती है। (विभिन्न तरह के चीरों के बारे में नीचे पढ़ें)।

गर्भाशय तक पहुंचना
ऊत्तकों और मांसपेशियों की सतहों को खोला जाता है, ताकि गर्भाशय तक पहुंचा जा सके। आपके पेट की मांसपेशियों को काटने की बजाय अलग कर दिया जाता है। गर्भाशय के निचले हिस्से को देखने के लिए आपके मूत्राशय को थोड़ा नीचे की तरफ खिसका दिया जाता है।

गर्भाशय को खोलना
इसके बाद डॉक्टर गर्भाशय में एक छोटा चीरा लगाएंगी और कैंची या उंगलियों की सहायता से इसे बड़ा करेंगी। बड़ा चीरा लगाने की तुलना में इस तरह रक्तस्त्राव कम होता है। आमतौर पर गर्भाशय के निचले हिस्से को ही चीरा लगाकर खोला जाता है।

झिल्लियों के थैले को खोला जाता है और आपको अचानक तेजी से तरल पदार्थ बहने की आवाज सुनाई दे सकती है। यह एमनियोटिक द्रव को बाहर निकलने की आवाज होती है।

शिशु को बाहर निकालना
आप शायद महसूस कर पाएंगी कि डॉक्टर आपके पेट को दबा रहीं हैं, ताकि शिशु का जन्म हो सके। अगर, आपका शिशु ब्रीच स्थिति में है, यानि की उसके नितंब या पैर नीचे की ओर हैं, तो पहले उसका नितंब बाहर आएगा।

यदि आपके जुड़वा शिशु हैं, तो जो शिशु नीचे की तरफ होगा वह पहले बाहर आएगा। नॉर्मल डिलीवरी में भी ऐसा ही होता।

कई बार डॉक्टर शिशु का सिर सावधानीपूर्वक बाहर निकालने के लिए प्रसूती चिमटी (फॉरसेप्स) का इस्तेमाल करती हैं। मगर ऐसा केवल तभी किया जाएगा जब शिशु का सिर बाहर निकलने में मुश्किल हो रही हो। शिशु के ब्रीच अवस्था में होने या प्रीमैच्योर होने की वजह से ऐसी स्थिति हो सकती है।

गर्भनाल को काटने के बाद आपको शिशु की झलक भर दिखाई जाएगी, इसके बाद उसे जांच के लिए शिशु के डॉक्टर को दे दिया जाएगा, जो कि आॅपरेशन थिएटर में ही मौजूद होंगे।।
ऑपरेशन से शिशु का जन्म होने के बाद
शिशु के डॉक्टर उसे जन्म के एक मिनट और पाँच मिनट पर एपगार (APGAR) स्कोर देंगी। इस स्कोर से आपके शिशु की सेहत को मापा जाता है। शिशु की जांच पूरी होने के बाद, उसे गर्माहट के लिए शायद सीधे आपको सीने से लगाने के लिए दे दिया जाएगा।

यदि शिशु के स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता हो, तो ड्यूटी पर मौजूद शिशु के डॉक्टर अगले कदम उठाएंगे। कुछ शिशुओं को ऑक्सीजन की जरुरत होती है या फिर कुछ समय के लिए गहन चिकित्सा कक्ष में भेजा जा सकता है।

आपकी डॉक्टर बाकी बची प्रसव की प्रक्रिया पूरी करने और टांके लगाने में ध्यान लगाएंगी। शिशु के जन्म के बाद आपको ड्रिप के जरिये ऑक्सीटॉसिन का सिंथेटिक रूप (सिंटोसिनॉन) दिया जाएगा। इससे आपको अपरा की डिलीवरी मे मदद मिलेगी और खून भी कम बहेगा। डॉक्टर हल्के से गर्भनाल को खींचेगी, ताकि सुनिश्चित हो सके कि अपरा गर्भाशय की दीवार से हट गई है। इसके बाद वे इसे खींचकर बाहर निकालेंगी।

पेट पर लगे चीरे को परतों में बंद किया जाएगा, मगर आमतौर पर सभी परतों को सिलने की जरुरत नहीं होती। चीरे के घाव को बंद करने के बहुत से तरीके होते हैं, जैसे कि स्वत: गलने वाले टांके, न गलने वाले टांके या स्टेपल आदि लगाकर।
सिजेरियन डिलीवरी के बाद जब आप रिकवरी रूम में होंगी
ऑपरेशन पूरा होने के बाद आपको रिकवरी रूम में भेजा जाएगा, जहां कुछ घंटों तक आप पर नजदीकी नजर रखी जाएगी। जब आप रिकवरी रूम में होंगी, तो शायद आपको कंपकंपी शुरु हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऑपरेशन के दौरान आपके शरीर का तापमान काफी कम हो जाता है और थियेटर को भी ठंडा रखा जाता है। कंपकंपी होने से आमतौर पर कोई नुकसान नहीं होता यह करीब 30 मिनट तक रह सकती है। आपको कंबल ओढ़ाकर गर्माहट देने का प्रयास करेंगी।

यदि आपको मदहोशी सी या मिचली महसूस हो, तो डॉक्टर आपकी असहजता कम करने के लिए दवा दे सकती हैं।

आपको प्रबल प्रभाव वाली दर्द निवारक दवा दी जाएंगी ताकि सिजेरियन के बाद भी आपको दर्द महसूस न हो। जब तक आप खाना और पीना शुरु न करें, तब तक आपको नसों के जरिये तरल पदार्थ दिया जाता रहेगा।

जब आप बेहतर महसूस करेंगी, तो आपको कमरे में भेज दिया जाएगा। यहां आप और आपके पति अपने नवजात शिशु या शिशुओं से मिल सकेंगे।

शिशु के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क रखने से आप उसके साथ जुड़ाव महसूस करेंगी और इससे स्तनपान करवाने और शिशु को राहत दिलाने में भी मदद मिलती है। आपकी डॉक्टर या नर्स शिशु को स्तनपान करवाने में आपकी मदद करेंगी और ऑपरेशन के तुरंत बाद से आपकी देखभाल में लग जाएंगी।

सिजेरियन डिलीवरी में चीरा किस तरह लगाया जाता है?

सिजेरियन डिलीवरी के दौरान डॉक्टर दो तरह से चीरा लगा सकती हैं:

आपकी पुरोनितम्ब अस्थि (प्यूबिक बोन) से दो से तीन उंगलियों की चौड़ाई जितना ऊपर, प्यूबिक हेयर के एकदम ऊपर पेट की त्वचा में आड़ा (हॉरिजॉन्टल) चीरा लगाया जाता है।

इस तरह के चीरे को बिकिनी कट कहा जाता है। आजकल, बिकिनी कट चीरे ज्यादा किए जाते हैं, क्योंकि ये ज्यादा अच्छे तरीके से ठीक हो पाते हैं। इस तरह के चीरे को लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (एलएससीएस) भी कहा जाता है।

कई बार डॉक्टर सीधा या खड़ा (वर्टिकल) चीरा लगाते हैं, जो कि पुरोनितम्ब अस्थि के ऊपर दो उंगलियों की चौड़ाई से बढ़ता हुआ नाभि के नीचे एक इंच तक हो जाता है। हालांकि, इस तरह का चीरा अब डॉक्टर कम ही लगाते हैं। वर्टिकल कट की जरुरत निम्न स्थितियों में पड़ सकती है:

आपका शिशु काफी प्रीमैच्योर है या गर्भ में आड़ा लेटा हुआ है और उसकी पीठ नीचे की तरफ है।
आपकी अपरा नीचे की तरफ स्थित है।
आपके गर्भाशय के निचले हिस्से में एड्हेशन्स या ग्रोथ (फाइब्रॉइड्स) हैं।
गंभीर आपातकाल की स्थिति हुई है जैसे कि गर्भनाल का खिसककर बाहर आ जाना और आपके शिशु का जन्म जल्द से जल्द करवाने की जरुरत है।

ऑपरेशन से बच्चे का जन्म होने में कितना समय लगता है?
यदि आपकी डिलीवरी बिना किसी परेशानी के पूर्वनियोजित सिजेरियन के जरिये हो रही है तो ऑपरेशन में करीब 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग सकता है।

शिशु को बाहर निकालना आमतौर पर काफी जल्दी हो जाता है, करीब 5 से 15 मिनट में। आपके गर्भाशय और पेट को खोलने की तुलना में इन्हें सिलने में ज्यादा समय लगता है, आमतौर पर करीब 30 मिनट।

यदि कोई जटिलताएं हों या आपका पहले भी सिजेरियन ऑपरेशन हो चुका हो तो इसमें और ज्यादा समय लग सकता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि पिछले ऑपरेशनों की वजह से आपको कितने एड्हेशन और स्कार उत्तकों के बैंड हैं।
सिजेरियन ऑपरेशन में कितना दर्द होता है?
आॅपरेशन के दौरान आपको थोड़ा दबाव महसूस होगा और लगेगा कि खींच कर कुछ निकाला जा रहा है, मगर आपको कोई दर्द महसूस नहीं होगा। ऑपरेशन से पहले आपको एपिड्यूरल या स्पाइनल ब्लॉक दिया जाता है, जिसके प्रभाव से शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाता है।

बहरहाल, जैसा कि किसी भी अन्य ऑपरेशन में होता है, एनेस्थीसिया का असर खत्म होने पर आपको चीरे की जगर पर दर्द महसूस होने लगेगा। डिलीवरी के बाद आपको दर्द से राहत देने के लिए दवा दी जाएगी।

क्योंकि सीजेरियन एक बड़ा ऑपरेशन होता है, इसलिए इसके बाद कुछ दिनों या हफ्तों तक आपको कुछ दर्द तो रहेगा। जब आप सिजेरियन डिलीवरी से उबर रही होंगी, तो कुछ तरह की अवस्थाओं और हिलने-डुलने पर आपको असहजता या दर्द महसूस हो सकता है। दर्द कितना कम या ज्यादा होगा, इसका हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है।

ऑपरेशन शुरु होने से पहले आपको जो एपिड्यूरल दिया जाएगा वह आपके शरीर के निचले हिस्से को सुन्न कर देगा। इसलिए जब यह अपना प्रभाव दिखाता है, तो आपको प्रसव के संकुचन या वास्तविक ऑपरेशन का दर्द महसूस नहीं होगा। मगर आपको एपिड्यूरल लेने से पहले तक संकुचन महसूस होते रहेंगे।

साथ ही, जैसा अन्य किसी ऑपरेशन में होता है, वैसे ही इसमें भी एनेस्थीसिया का प्रभाव समाप्त होने पर, चीरा लगने के स्थान पर आपको दर्द महसूस होगा।

आपकी डॉक्टर शिशु के जन्म के बाद दर्द कम करने के लिए आपको दवाएं देंगी, मगर कुछ दिनों तक कुछ विशेष मुद्राएं या हलचल आपके लिए दर्दभरी रहेंगी।

सिजेरियन ऑपरेशन के बाद शिशु को स्तनपान करवाना भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि चीरा लगने की जगह पर आपको असहजता रहेगी। सी-सेक्शन के बाद स्तनपान करवाने की आरामदेह अवस्था ढूंढ़ने में अक्सर समय लग जाता है, मगर आप हिम्मत न हारें। जल्द ही यह सब आपको आसान लगने लगेगा।

क्या सी-सेक्शन ऑपरेशन के दौरान मेरे पति मेरे साथ रह सकते हैं?
यह उस अस्पताल की नीतियों पर निर्भर करेगा, जहां आपकी डिलीवरी हो रही है। इसलिए बेहतर है कि इस बारे में आप अपनी डॉक्टर से भी पूछ लें।

भारत में अधिकांश अस्पताल ऑपरेशन थियेटर में पति को आने की अनुमति नहीं देते हैं।

मगर अधिकांश मामलों में पति आपके ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहली सभी तैयारियों के दौरान आपके साथ रह सकते हैं।

यदि अस्पताल आपके पति को ऑपरेशन के दौरान मौजूद रहने की अनुमति देता है, तो उन्हें ऑपरेशन थियेटर वाले कपड़े जैसे सर्जिकल गाउन, हैड कवरिंग, मास्क, दस्तानें और जूतों के कवर पहनने होंगे। वे आपके सिराहने पर कुर्सी पर बैठ सकते हैं।

हालांकि, यदि आपके सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाती है या आपको जनरल एनेस्थीसिया देने की जरुरत हो, तो आपके पति को ऑपरेशन थियेटर से बाहर जाने के लिए कह दिया जाएगा।

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