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कब और किन स्थितियों में महिलाओं को करवानी पड़ती है C Section Delivery
कई स्थितियों में महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी की बजाय सी सेक्‍शन ऑपरेशन करवाना पड़ता है। जानिए कि वे कौन से कारक हैं जो सिजेरियन ऑपरेशन के लिए जिम्‍मेदार होते हैं।
प्रेगनेंसी के नौ महीने बीतने के बाद सबसे मुश्किल होती है डिलीवरी। नॉर्मल डिलीवरी को सुरक्षित माना जाता है लेकिन आजकल सिजेरियन ऑपरेशन का चलन काफी बढ़ गया है। सिजेरियन डिलीवरी एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें मां और शिशु को कई तरह के स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम हो सकते हैं।कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर किन परिस्थितियों में महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है। आइए जानते हैं कि क्‍यों, कब और कैसे सी-सेक्‍शन ऑपरेशन करवाने की जरूरत पड़ती है।
​प्रसव पीड़ा शुरू न होना
कई कारक हैं जो प्रसव पीड़ा को शुरू होने से रोकते हैं जैसे कि गर्भाशय ग्रीवा का पूरी तरह से न खुलना, प्रसव पीड़ा का धीमा होना या रुक जाना या शिशु का डिलीवरी के लिए सही पोजीशन में न होना। ऐसा आमतौर पर प्रसव के दूसरे चरण में होता है जो कि गर्भाशय ग्रीवा के सेमी तक खुलने के बाद आता है।
​प्‍लेसेंटा प्रीविया

प्‍लेसेंटा प्रीविया की स्थिति में प्‍लेसेंटा गर्भाशय के नीचे होती है और आंशिक या पूरी तरह से गर्भाशय ग्रीवा को ढक देती है। 200 गर्भवती महिलाओं में से एक महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान प्‍लेसेंटा प्रीविया होता है।

इस स्थिति में महिला को आराम करने और लगातार मॉनिटर करने की जरूरत होती है। प्‍लेसेंटा प्रीविया कंप्‍लीट, पार्शियल या मार्जिनल होता है। अगर कंप्‍लीट या पार्शियल प्‍लेसेंटा प्रीविया हो तो सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। मार्जिनल प्‍लेसेंटा प्रीविया में नॉर्मल डिलीवरी करवाई जा सकती है।
​यूट्राइन रप्‍चर

यूट्राइन रप्‍चर एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति है जो कि प्रेगनेंसी या प्रसव के दौरान शुरू होती है और इसमें तुरंत सिजेरियन करने की जरूरत पड़ती है।

जब प्रेगनेंसी या प्रसव के दौरान गर्भाशय छिल जाता है तो शिशु को ऑक्‍सीजन की आपूर्ति में दिक्‍कत आने लगती है। लगभग पंद्रह सौ में से एक महिला के यूट्राइन रप्‍चर होता है जिसमें तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।
​पहले सी सेक्‍शन हुआ हो
हो सकता है कि जिन महिलाओं की एक बार सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी हो, उनकी दूसरी बार भी सी सेक्‍शन डिलीवरी ही हो। ऐसा इसलिए हो सकता है, क्‍योंकि पहले सी सेक्‍शन के दौरान गर्भाशय के छिलने से यूट्राइन रप्‍चर हुआ हो जिसमें तुरंत सिजेरियन करने की जरूरत पड़ी हो।
​मल्‍टीपल प्रेगनेंसी

जुड़वां या दो से ज्‍यादा बच्‍चे होने पर भी ऑपरेशन करवाना पड़ता है। प्रेगनेंसी एक ऐसी अवस्‍था हैजिसमें कब क्‍या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

अगर आपके गर्भ में दो या इससे ज्‍यादा बच्‍चे हैं तो आपको खुद को सी सेक्‍शन के लिए भी तैयार करना चाहिए। अगर बच्‍चे डिलीवरी की पोजीशन में नहीं आए तो ऐसी स्थिति में सी सेक्‍शन करना पड़ता है।
​दीर्घकालिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं

किसी गंभीर या लंबे समय से चली आ रही स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या से ग्रस्‍त महिला को भी सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जाती है। इनमें हार्ट डिजीज, हाई ब्‍लड प्रेशर या जेस्‍टेशनल डायबिटीज शामिल है।
इन स्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी करवाना मां के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है। यदि मां को एचआईवी, हर्पीस, या अन्‍य कोई इंफेक्‍शन है, तो भी सी सेक्‍शन किया जा सकता है।

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