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जब वॉल्व दुर्बल हो जाते हैं तो रक्त सही तरीके से ऊपर की ओर चढ़ नहीं पाता और कभी-कभी नीचे की ओर बहने लगता है। ऐसी स्थिति में नसें फूल जाती हैं और लंबाई बढ़ जाने से टेढ़ी-मेढ़ी भी हो जाती हैं। यही वैरिकोज वेन्स है।

लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों की नसें फूलना और काला पड़ना वैरीकोज वेन्स का लक्षण है। इसे अवॉइड करने पर पैरों में अल्सर तक हो जाते हैं। यह बीमारी ज्यादातर पुरुषों में होती है। शुरुआत में पट्टी बांधकर पैरों को ऊपर रखते हुए सीधे रखने की सलाह दी जाती है। इससे रिलीफ नहीं मिलने पर सर्जरी ही इसका इलाज है। प्रेगनेंसी में भी यह बीमारी हो सकती है। पेट के ऊपरी हिस्से की नसें ब्लॉक होने के कारण ये नसें फूल जाती है। जिससे पेशेंट परेशान रहता है। पारंपरिक इलाज में कट लगाकर वेन को निकाल देना ही ट्रीटमेंट था, लेकिन अब नए इलाज आ चुके हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी एबिलेशन (आरएफए) तकनीक के जरिए एक मेडिकल डिवाइस को डाला जाता है। इसे थाइज तक ले जाते हैं, फिर इस डिवाइस से वेन्स को जलाकर बाहर निकाल देते हैं। इस प्रोसिजर में किसी तरह का कट नहीं लगता है। पेशेंट को लंबे समय तक हॉस्पिटल में नहीं रहना पड़ता है। इसलिए कॉस्मेटिक लिहाज से भी यह बेहतर प्रोसिजर है। इसके साथ ही आजकल लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसमें एक विशेष तरह की हीट से नस को जला दिया जाता है।

ये बीमारी ज्यादातर आर्मी मैन, गार्ड, टीचर्स सहित उन सभी प्रोफेशनल्स में देखने को मिलती है जो कई घंटों तक लगातार खड़े रहते हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं में भी ये बीमारी होने पर उन्हें चलने में परेशानी महसूश होती है। अभी तक इस बीमारी का कोई कारण मालूम नहीं चल पाया है। इसलिए इससे बचने के लिए बिना ब्रेक लिए लंबे समय तक खड़े नहीं रहें। कन्वेंशनल ट्रीटमेंट के बजाय नई मॉडलिटिज को अपनाएं।

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