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भोजन पचाने में लिवर मदद करता है इसके साथ ही शरीर को ऊर्जा भी देता है। किसी भी व्यक्ति के लिवर में वसा की मात्रा सामान्य से अधिक होने की स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। फैटी लिवर की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है; 1- एल्कोहल फैटी लिवर 2- नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवरः नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर की स्थिति में लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिसका इलाज समय पर न करवाने के कारण आपका लिवर पूर्ण रूप से डैमेज हो सकता है, जिसे लिवर सिरॉसिस भी कहते हैं। ये स्थिति आगे जाकर कैंसर का कारण बन सकती है।
चौथा स्टेज है खतरनाक: फैटी लिवर के चार स्टेज होते हैं। 1-सिंपल फैट डिपॉजिशन, जिसे स्टेटोजिज (Steatosis)कहते हैं। 2- नॉन एल्कॉहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस (Non-Alcoholic Steatohepatitis, NASH) कहते हैं। 3-लिवर सेल डैमेज, जिसे हिंदी में फिब्रोसिस (Fibrosis)कहते हैं। 4- लिवर सेरॉसिस (Liver Cirrhosis) जिसमें लिवर को बहुत नुकसान पहुंचता है और ये स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक होती है।
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