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क्या होता है रूमेटाइड आर्थराइटिस? जानें इससे जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें
क्या होता है रूमेटाइड अर्थराइटिस? जानें लक्षण, कारण एवं इलाज

इंसान की जिंदगी में किसी ना किसी तरह की परेशानी होना एक आम बात है। हममें से कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने पारिवारिक, शारीरिक, या व्यवसाय-संबंधी समस्याओं का सामना किया होगा। आज हम खासतौर से एक ऐसी शारीरिक समस्या से आपको परिचित कराएंगे जिसके बारे में आपने शायद पहले कभी नहीं सुना होगा। लेकिन इस तरह की परिस्थति हमारे लिए निराशाजनक साबित हो सकती है। हम बात कर रहे हैं आर्थराइटिस के एक प्रमुख प्रकार रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) की।

जो लोग अर्थराइटिस यानि गठिया रोग से परिचित नहीं हैं, उन्हें बताते चलें कि यह आपके जोड़ों के लिए बेहद खतरनाक अवस्था है। शरीर में इस रोग की मौजूदगी हमारे सुखी जीवन में बाधा डाल सकती है। जी हां, यह एक ऐसी स्थिति है जिसकी वजह से जोड़ों में सूजन, दर्द के साथ अकड़न पैदा हो जाती है। दुनिया में लाखों लोग इस समस्या से परेशान हैं। आर्थराइटिस की मौजूदगी में आपको दर्द के साथ दिनचर्या में होने वाली गतिविधियों में भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि इससे आपके जोड़ों की गति पर बुरा असर पड़ता है।

इस ब्लाॅग के माध्यम से मेवाड़ हाॅस्पीटल की टीम आपको रूमेटाॅइड आर्थराइटिस के बारे में बताएगी। साथ ही आप जानेंगे कि क्यों ये हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर समस्या है।
क्या है रूमेटाइड आर्थराइटिस?

इसे रूमेटी गठिया, आमवातीय संध्यार्ति या आमवातीय संधिशोथ के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर आर्थराइटिस में जोड़-संबंधी परेशानी देखने को मिलती है। लेकिन बात की जाए रूमेटाइड अर्थराइटिस की, तो इसमें जोड़ों के साथ-साथ शरीर के दूसरे अंगों, जैसे कि त्वचा, आंख, फेफड़े, दिल, किडनी, और खून की धमनियों पर भी गलत असर पड़ सकता है। यह एक आटोइम्युन डिस्ओर्डर (autoimmune disorder) है। ऐसी परिस्थति तब होती है जब हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) गलती से हमारे ही शरीर के टिशू पर हमला कर देता है।

यह समस्या शरीर के किसी भी जोड़ में दर्द व सूजन पैदा होने का कारण बन सकती है। ऐसा होने पर जोड़ों का मूवमेन्ट कम होने की संभावना बढ़ जाती है। रूमेटाइड आर्थराइटिस शरीर के दोनों तरफ के जोड़ों पर अपना असर डाल सकता है, जैसे कि दोनों घुटनों, कलाइयों या हाथों में। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति के साथ हो सकती है। और हां, समय रहते अगर इसकी जांच या उपचार नहीं होता है तो हालात बिगड़ भी सकते हैं। बीमारी का पता लगने के बाद जितना जल्दी उपचार शुरू हो जाए उतना ही वह प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
रूमेटाइड आर्थराइटिस के चरण

इस प्रकार की समस्या के कुछ चरण हैं और सभी चरणोें का इलाज अलग है। सबसे पहले बात की जाए पहले चरण की, यह वो समय होता है कि जब सिनोवियम (synovium) में सूजन आ जाती है। हालांकि ऐसी स्थिति में जोड़ को नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन उसके नज़दीक टीशू सूज जाते हैं जिस वजह से जोड़ों में दर्द होने लगता है। इसके बाद आता है दूसरा चरण जिसमें कार्टिलेज को नुकसान पहुंचता है और जोड़ों में कठोरपन आ जाता है। अतः जोड़ों की गति कम हो जाती है और व्यक्ति को परेशानी उठानी पड़ती है।

अब बात की जाए तीसरे चरण की, इसमें सूजन की वजह से कार्टिलेज और हड्डियों के सिरों को क्षति पहुंचती है। और चैथा यानि आखरी चरण बड़ा ही गंभीर माना जाता है। इसमें जोड़ पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और ठीक तरह से काम करना बंद कर देते हैं। इसके फलस्वरूप व्यक्ति को दर्द, सूजन, कठोरता के साथ-साथ गति में कमी आने लगती हैं। यहां तक कि मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं और ऐसे मौकों पर सर्जरी करने की ज़रूरत भी पड़ जाती है। इसलिए कोशिश करें कि जब आप शुरूआती चरण में हों और आपको शरीर-संबंधी कोई परेशानी हो, तो आप डाॅक्टर से सलाह ज़रूर लें। ऐसी परिस्थतियों में मेवाड़ हास्पीटल आपकी सेवा के लिए उपलब्ध है।
रूमेटाइड आर्थराइटिस के कारण

डाॅक्टर पूर्ण रूप से रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण को पता नहीं कर पाए हैं। यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि हमारा प्रतिरक्षा तंत्र आखिर क्यों जोड़ों में उपस्थित स्वस्थ टिशूस को अटैक करता है। कुछ एक्स्पट्र्स का कहना है कि वायरस या फिर बैक्टिरिया की वजह से हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) बदल जाता है, जो हमारे जोड़ों पर अटैक कर देता है। नीचे दिए गए कुछ पाॅइंट्स के माध्यम से जानिए आखिर कौनसी बातें इस तरह की बीमारी को बढ़ावा दे सकती हैं।

1. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मालूम चलता है कि इस तरह की परेशानी पुरूषों के मुकाबले औरतों में ज़्यादा देखने को मिलती है। ऐसा बताया जाता है कि औरतों में दो से तीन गुना ज़्यादा रूमेटाइड आर्थराइटिस होने का खतरा रहता है।
2. कुछ आनुवांशिक (genetic) कारणों के तहत भी रूमेटाइड आर्थराइटिस का खतरा हो सकता है। धुम्रपान या फिर अनुचित और असंतुलित खान-पान की वजह से भी समस्याएं हो सकती है। यह स्पष्ट नहीं है कि जैनेटिक लिंक क्या है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इसकी वजह से यह परेशानी हो सकती है।
3. वैसे को वयस्क यानि युवाओं में से ये समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन आमतौर पर 40 से 60 वर्ष के लोगों में इसका प्रभाव ज़्यादा देखने को मिलता है।

4. जो लोग मोटापे का शिकार हैं, उन्हें भी इस तरह की स्थिति को लेकर सचेत रहने की ज़रूरत है। अपने बाॅडी मास इंडेक्स को 18.5 से लेकर 24.9 के बीच रखें। क्योंकि यह रेंज दर्शाती है कि आपका वज़न स्वस्थ सीमा में है। 25 से ऊपर बी.एम.आई. होने का मतलब है कि आपका अधिक वज़न की सीमा में हैं।
5. असंतुलित एस्ट्रोजन हाॅरमोन भी रूमेटाइड अर्थराइटिस का कारण बन सकता है।

यदि आप एक स्वस्थ जीवन के लिए उचित सलाह पाना चाहते हैं, तो आज ही मेवाड़ हाॅस्पीटल के डाॅक्टर्स से संपर्क करें।

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