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योग कभी भी किसी भी उम्र में किया जा सकता है। परंतु 8 से 10 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को एडवांस या कठिन आसनों का अभ्यास नहीं कराना चाहिए क्योंकि बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां परिपक्व नहीं हो पाती हैं।

बच्चों को कठिन योगिक क्रियाओं का अभ्यास भी नहीं कराना चाहिए। जैसे मुद्राएं, बंध, षटकर्म… क्योंकि बच्चों के अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं। उनके नाजुक अंगों को नुकसान हो सकता है।

योगाभ्यास प्रारंभ करने की सर्वोत्तम अवस्था युवा अवस्था है। 18 वर्ष से 30 साल की उम्र तक योगाभ्यास प्रारंभ कर देना चाहिए और उसके बाद जीवन भर योग अभ्यास करना चाहिए। युवा अवस्था में योगाभ्यास प्रारंभ करने से सभी आसन, मुद्राएं, बंद और षटकर्म का अभ्यास आसानी से सीखा जा सकता है और शरीर पर किसी भी प्रकार का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।

बुढ़ापे में योगाभ्यास प्रारंभ करने से ज्यादा लाभ नहीं मिलता है। क्योंकि शरीर जीर्ण हो चुका होता है और वीर्य का अधिकतम नाश हो चुका होता है।

परंतु ऐसा नहीं है कि बुढ़ापे में योगाभ्यास करने से लाभ नहीं होगा। लाभ अवश्य होगा। लेकिन युवावस्था में योग प्रारंभ करने से जल्दी ही योग की सिद्धि होगी और बुढ़ापे में योगाभ्यास करने से समय लग सकता है।

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