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बच्चे को कितना बुखार है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। शिशु के लिए जरूरी उपचार और देखभाल इसी आधार पर तय होते हैं। शिशु के बुखार को कैसे मापा जाए, इसे समझने के लिए आगे पढ़ें।
डिजिटल थर्मामीटर
इन्हें मुंह या बगल में इस्तेमाल कर सकते हैं। चार साल से छोटे शिशु का बुखार मापने के लिए डिजिटल थर्मामीटर बगल में लगाना बेहतर रहता है।
डिजिटल थर्मामीटर आपको तुरंत रीडिंग देता है। इसे देख आप फैसला कर सकेंगी कि शिशु को डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत है या नहीं। डिजिटल थर्मामीटर इस्तेमाल करने का तरीका यह है:
थर्मामीटर आॅन करें। स्क्रीन पर कोई पुरानी रीडिंग नहीं होनी चाहिए।
अपनी और शिशु की सुविधा के अनुसार उसे गोद में बैठा सकती हैं या लेटा भी सकती हैं।
अपने शिशु की बगल के बीच में थर्मामीटर का सिरा या टिप लगाएं। ध्यान रहे कि त्वचा और थर्मामीटर के बीच कोई कपड़ा न हो।
करीब 15 सेकेंड तक एक हाथ से थर्मामीटर यहीं पकड़े रखें। अपने दूसरे हाथ से शिशु की बाजू को छाती पर आड़ा करके मजबूती से दबाएं रखें।
कान के थर्मामीटर (ईयर थर्मामीटर)
अगर आपके पास इलेक्ट्रॉनिक ईयर थर्मामीटर है तो इसे भी आजमा सकती हैं। लेकिन इसे सही तरीके से कान में लगाना जरूरी है। नहीं तो सही और एक जैसी रीडिंग मिलना मुश्किल है।
शिशु तीन महीने से छोटा हो तो इस थर्मामीटर का इस्तेमाल काफी मुश्किल रहता है। उसकी कर्ण नलिका बेहद छोटी होती है। लेकिन शिशु अगर इससे बड़ा है तो ईयर थर्मामीटर के इस्तेमाल का तरीका यह है:
थर्मामीटर ऑन करें। स्क्रीन पर कोई पुरानी रीडिंग नहीं होनी चाहिए।
अपनी और शिशु की सुविधा के अनुसार उसे गोद में बैठा सकती हैं या लेटा भी सकती हैं।
थर्मामीटर को शिशु के कान में लगाएं। इसकी टिप कान की पर्दे की तरफ जानी चाहिए। ध्यान रखें कि शिशु का कान और थर्मामीटर की नोक आपस में अच्छी तरह मिल गए हों।
स्टार्ट का बटन दबाएं और एक या दो सेकेंड तक थर्मामीटर ऐसे ही पकड़कर रखें।
रेक्टल (गुदा) थर्मामीटर
गुदा से शिशु का बुखार मापने पर आपको बिल्कुल सही रीडिंग मिलेगी। हालांकि, रेक्टल थर्मामीटर 0 से तीन माह तक के बच्चों के लिए ही अच्छी तरह काम करता है।
कुछ शिशुओं को गुदा से बुखार मापने पर कोई परेशानी नहीं होती, जबकि कुछ शिशु इसे बिल्कुल पसंद नहीं करते और छटपटाने लग सकते हैं। इसकी वजह से रीडिंग गलत हो सकती हैं।
रेक्टल थर्मामीटर चुनते वक्त यह जरूर देखें कि इसकी नोक लचीली हो। इसका हैंडल चौड़ा होना चाहिए, ताकि आप एक इंच से ज्यादा थर्मामीटर अंदर न डाल सकें। इससे ज्यादा थर्मामीटर अंदर जाने से शिशु के मलाशय को नुकसान पहुंच सकता है।
गुदा थर्मामीटर के इस्तेमाल का तरीका यह है:
निर्माता के निर्देशों के मुताबिक थर्मामीटर को साफ करके बुखार मापने के लिए तैयार करें।
शिशु को कोई तकलीफ न हो, इसलिए अंदर डालने से पहले इसकी नोक पर पेट्रोलियम जैली जैसा कोई ल्यूब्रिकेंट लगा सकती हैं।
शिशु को बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दें। उसकी टांगें मोड़कर छाती के पास ले आएं। शिशु इस स्थिति में सहज महसूस करेगा, क्योंकि डायपर पहनने के लिए वह ऐसी ही अवस्था में लेटता है। साथ ही उसे आपका चेहरा दिखेगा तो आप उसका ध्यान भी बंटा सकेंगी। या फिर आप शिशु को गोद में उल्टा लेटा सकती हैं। यानी पेट नीचे और नितंब ऊपर की तरफ। उसकी टांगें आपकी जांघ के एक तरफ नीचे लटक रही होंगी।
थर्मामीटर का बटन दबाकर आॅन करें। इसकी नोक को एक इंच के तीन चौथाई हिस्से (2 से 2.5 से.मी.) तक या फिर जब तक थर्मामीटर की टिप दिखनी बंद न हो जाए, गुदा में डालें।
जिस हाथ में आपने थर्मामीटर पकड़ा है, उसकी हथेली और उंगलियों से उसके कूल्हे मजबूती से दबाकर रखें। थर्मामीटर न छोड़ें, क्योंकि शिशु छटपटाया तो यह अपनी जगह से हिल सकता है।
बीप बजने पर थर्मामीटर हटाकर शिशु का बुखार चेक करें।
शिशु के गुदा में कोई भी वस्तु डालने से मलत्याग की इच्छा उत्तेजित हो सकती है। ऐसे में अगर थर्मामीटर निकालने के बाद बच्चा मलत्याग करे तो चिंता न करें।
अन्य थर्मामीटर
और भी कई तरह के थर्मामीटर उपलब्ध हैं। लेकिन इनमें से कुछ को हिलते-डुलते शिशु पर इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल है या इनसे आपको तुरंत रीडिंग नहीं मिलेगी।
स्ट्रिप टाइप थर्मामीटर: इसमें बुखार मापने के लिए आप शिशु के माथे पर थर्मामीटर दबाकर रखती हैं। लेकिन स्ट्रिप टाइप थर्मामीटर ज्यादा भरोसेमंद नहीं होते। यह सिर्फ शिशु की त्वचा का तापमान दिखाते हैं, पूरे शरीर का नहीं।
पैसिफायर थर्मामीटर। इनकी रीडिंग अक्सर गलत रहती है। यह जो परिणाम दिखाते हैं वह तापमान का सबसे निचला मान होता है।
शीशे की नली में बंद पारे वाले थर्मामीटर। पुराने तरीके के शीशे की नली में बंद पारे वाले थर्मामीटर इस्तेमाल नहीं करना ही ठीक है। यह थर्मामीटर टूटने से जहरीला पारा लीक होने का खतरा रहता है।
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