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मूत्रमार्ग में होने वाली सूजन/संक्रमण (सिस्टिटिस): यह संक्रमण मूत्राशय/मूत्र वस्ति तक सीमित रहता है। इसके वजह से जलन के साथ पेशाब, मूत्र की तीव्र इच्छा, बारंबार होना और असहनीय दर्द उत्त्पन्न होता है।

पायलोनेफ्राइटिस: यह गुर्दा संबंधी संक्रमण है। यह मूत्रमार्ग में संक्रमण(यूटीआई) का सबसे खतरनाक रूप है और इसमें ठंड लगना या लगातार बुखार का आना, पेट में दर्द, जीभ मचलते हुए या बिना जीभ मचले हुए उल्टी जैसे लक्षण उत्त्पन होती है।

मूत्रमार्ग में जलन या दाह (यूरेथरिटिस): यह संक्रमण मूत्रमार्ग से जुड़ा है। आमतौर पर ये दर्द पेशाब के दौरान जलन की वजह से होता है और पेशाब भी बुरे गंध(गंदे वास) के साथ होता है।

मूत्र पथ संक्रमण के संदर्भ में कुछ और महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्द निम्लिखित है:

मूत्रमार्ग में आसामान्य संक्रमण (यूटीआई): आसामान्य/उग्र रूप से मूत्रमार्ग में फैले संक्रमण(यूटीआई)बढ़ने की वजह से सभी पुरुष, गर्भवती महिलाएं, मूत्र पथ के संरचनात्मक या कार्यात्मक असामान्यताओं वाले रोगी, मूत्र निकासी नली( मूत्र कॅथेटर्स)उपयोग करने वाले रोगी, गुर्दे की बीमारियों जैसे और अन्य प्रतिरक्षा में असमर्थता की स्थिति उत्तपन करती है।

एटियलजि: आमतौर पर ई। कोलाई, क्लेबसीला, प्रोटियस, स्यूडोमोनास, एंटरोकोकस, स्टेफिलोकोकस
कवक: कैंडिडा प्रजातियां(एक फंगल/कवक संक्रमण जो की आमतौर पर त्वचा या चिपचिपा झिल्ली पर होता है)
ट्युबरकुलर(क्षय रोग संबंधी)

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