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अब खून में नहीं बचेगा कोई इन्फेक्शन
ब्लड बैंकों में ब्लड का सबसे आधुनिक टेस्ट न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (एनएटी) शुरू करने जा रही है। माना जा रहा है कि दिल्ली देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो सरकारी ब्लड बैंकों में यह टेस्ट शुरू करेगा। देश के कुछ जाने-माने अस्पतालों में ही इस टेस्ट की सुविधा है। अभी केवल ब्लड डोनर का ही टेस्ट किया जाता है। लिहाजा कई बार ब्लड में आए इन्फेक्शन का पता नहीं चल पाता। लिहाजा डोनर के ब्लड देने के बाद ब्लड बैंक में जमा खून के सैंपल लेकर उनका नैट टेस्ट किया जाएगा। इस टेस्ट में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी तीन वायरसों का टेस्ट होगा। ये टेस्ट करने के बाद ही ब्लड बैंक में खून रखा जाएगा। इस टेस्ट में ब्लड के अंदर मौजूद किसी भी इन्फेक्शन का पता लगाया जा सकेगा।इस टेस्ट का काम फाइनल स्टेज में है। इस तरह की तैयारियां की जा रही हैं कि जनवरी, 2013 तक राजधानी के 10 सरकारी ब्लड बैंकों में इस टेस्ट को पूरी तरह से लागू कर दिया जाए। बाद में सभी ब्लड बैंकों में यह टेस्ट शुरू करने की प्लानिंग है। राजधानी में इस समय 53 ब्लड बैंक हैं। इनमें से 39 प्राइवेट व 14 सरकारी ब्लड बैंक हैं। राजधानी में सालाना 4.5 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इन सभी ब्लड बैंकों को एक आधुनिक लैब से आईटी के जरिए जोड़ा जाएगा। लैब लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में बनाई जाएगी। इस लैब में हर साल 1 लाख 25 हजार के करीब ब्लड बैंकों से आए सैंपलों की जांच की जाएगी। चूंकि लैब सीधे ब्लड बैंकों से वेब के जरिए जुड़ी होगी लिहाजा टेस्ट की रिपोर्ट तत्काल ब्लड बैंकों को ऑनलाइन दी जाएगी। दिल्ली स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के डायरेक्टर डॉ. भरत सिंह के मुताबिक अभी राजधानी में एलिजा (ईएलआईएसए) टेस्ट होता है। इसमें भी एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और सी का टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए ऐंटि बॉडी का पता लगाया जाता है। इनका पता लगाने में 20 से 30 दिन का समय लग जाता है, लेकिन नैट टेस्ट में 5 दिन के अंदर ही इन्फेक्शन का पता लगाया जा सकता है। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक लैब को ऑपरेट करने का काम एक प्राइवेट एजेंसी को दिया जाएगा। प्राइवेट एजेंसी का कांट्रेक्ट हर 5 साल में बदला जाएगा। इसी साल नवंबर के महीने से इसके लिए टेंडरिंग का काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर तक सब कुछ फाइनल करके जनवरी, 2013 तक ब्लड की नैट टेस्टिंग शुरू हो जाएगी।
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