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गर्भपात होने के संभावना को कम करने के लिए आहार और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत होती है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

आहार और जीवनशैली में बदलाव :

विटामिन सी- विटामिन सी किसी भी इन्सान के लिए काफी अहम होता है, क्योंकि यह विटामिन आपके शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है, लेकिन अक्सर नेचुरली एबार्शन (गर्भपात) करने के लिए विटामिन-सी का इस्तेमाल करने के लिए सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर गर्भिणी को बहुत ज्यादा मात्रा में विटामिन-सी का सेवन कराया जाय तो खुद ब खुद गर्भपात हो जाता है। अगर किसी गर्भिणी को विटामिन-सी वाले फल खासकर आँवला का सेवन अधिक मात्रा में करें तो गर्भपात होने की पूरी संभावना हो जाती है। इसलिए विटामिन सी युक्त आहार का बहुत अधिक मात्रा में सेवन ना करें।

पुदीना– पुदीने का तेल या पुदीने की चाय का रोज सेवन करने से गर्भपात हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था में इनके सेवन से परहेज करें।

पपीता और अनानास- गर्भपात के लिए पपीते के बारे में आप सभी ने सुना होगा क्योंकि हर गर्भवती स्त्री को ये सलाह दी जाती है कि वो पपीते से दूर रहे वरना उन्हें भी गर्भ से जुड़ी समस्या हो सकती है क्योंकि पपीते और अनानास में पपेन नाम का रसायन पाया जाता है जो गर्भपात को बढ़ावा देता है। इसलिए प्रेग्नेन्सी के समय पपीता व अनानास नहीं खाना चाहिए।

ग्रीन टी- ग्रीन-टी का इस्तेमाल तो आजकल हर घर में होता है क्योंकि ग्रीन टी या हरी चाय से शरीर में कई फायदे होते हैं जैसे कि वजन कम करना, शरीर को चुस्त रखना हृदय को स्वस्थ रखना आदि। लेकिन अगर इसका इस्तेमाल गर्भवती स्त्रियाँ करती हैं तो गर्भपात होने की संभावना हो जाती है।

कम फाइबर स्टार्च- इंस्टेट चावल,अण्डा, नूडल्स खाने से परहेज करें।

वसायुक्त पदार्थ – मक्खन और पनीर खाने से बचें।

जंकफूड- जंकफूड जैसे; पिज्जा, बर्गर, कोल्ड्रिंक्स, पेस्ट्री आदि हो सके तो बिल्कुल न खाए।

मिठाई-उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले मीठे खाद्य पदार्थों से बचे क्योंकि वे रक्त में शर्करा या ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकते हैं।

गर्भपात की संभावना को कम करने के लिए स्वयं को गर्भावस्था के लिए समय पहले तैयार करना बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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