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बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह-

परिवार के किसी करीबी सदस्य में बीमारी के होने से बाइपोलर डिसऑर्डर होने की संभावना स्पष्ट रूप से बढ़ जाती है. उसके अलावा, दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स में असंतुलन से बाइपोलर डिसऑर्डर समेत मूड का विकार हो सकता है. जेनेटिक रूप से बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया में बहुत समानता है.

बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण

(Bipolar disorder causes) शोधकर्ताओं ने अभी तक किसी विशिष्ट कारणों की पहचान नहीं की है, जो बाइपोलर डिसऑर्डर के विकास में योगदान देता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के जोखिम कारक


(Risk factors of Bipolar disorder) बाइपोलर डिसऑर्डर के विकास में योगदान करने वाले कारकों में शामिल हैं:

पारिवारिक इतिहास: बाइपोलर डिसऑर्डर के विकास का जोखिम उन व्यक्तियों में अधिक होता है, जिनके परिवार के सदस्य (माता-पिता या भाई-बहन) कभी इस स्थिति से गुजरे होते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लगभग 80-90% मरीज ऐसे हैं जिन्‍हें डिप्रेशन या बाइपोलर डिसऑर्डर जेनेटिक मिला है।

पर्यावरणीय कारक: दर्दनाक या तनावपूर्ण घटनाओं से निपटने में असमर्थता बाइपोलर डिसऑर्डर को बढ़ावा दे सकते हैं जैसे:

खराब रिलेशनशिप
तलाक
परिवार में किसी की मृत्‍यु हो जाना
गंभीर बीमारी
पैसों की समस्याएं


मस्तिष्क की संरचना और कार्य: मस्तिष्क के आकार में भिन्नता या मस्तिष्क के कुछ रसायनों में असंतुलन भी बाइपोलर डिसऑर्डर को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

बाइपोलर डिस्‍आर्डर एक कॉम्प्लेक्स मानसिक बीमारी है, जिसमें रोगी का मन लगातार कई महीनों या हफ्तों तक या तो बहुत उदास रहता है या फिर बहुत ज्यादा उत्साहित रहता है। यह अत्यधिक मूड स्विंग्स का कारण भी बनता है । यह एक साइक्लिक डिसऑर्डर है, जिसमें पीडि़त व्यक्ति की मनोदशा बारी-बारी से दो अलग और विपरीत अवस्थाओं में जाती रहती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़‍ित व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आने लगता है। ऐसा व्‍यक्ति अचानक से तनाव में आ जाता है और उसका आत्‍मविश्‍वास एकदम से चरम पर हो जाता है। जबकि दूसरे ही पल में वह एकदम शांत हो जाता है। इस बीमारी में कई बार व्यक्ति चाहकर भी अपने व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रख पाता। आमतौर पर यह बीमारी नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में पाई जाती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार का मूड डिसऑर्डर है, जिसे उन्माद और हाइपोमेनिया के रूप में समझा जा सकता है। ये दोनों समस्‍याएं दिनों से लेकर महीनों तक हो सकती हैं। व्यक्ति का मूड बार-बार बदल सकता है, वह ऊर्जा से भरा महसूस कर सकता है। इस दौरान, लोग पूरे दिन और रात में बहुत कुछ करते हैं, पर थकते नहीं हैं। रोगी का यह स्‍वभाव लंबे समय तक भी जारी रह सकता है। रोगी व्यक्ति हाइपोमेनेक भी हो सकता है ।

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