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बच्चेदानी औरतों का एक महत्वपूर्ण अंग है. आमतौर पर इसका आकार निश्चित होता है. लेकिन कई स्थितियों में बच्चेदानी में सूजन के दौरान पेट का आकार बढ़ता जाता है और बाहर से देखने में ये किसी फुटबॉल जैसा या प्रेगनेंसी जैसा लगने लगता है. ज्यादातर महिलाओं में बच्चेदानी का सूजन होने पर हल्का बुखार, मितली, सिर दर्द, पेट दर्द और कमर दर्द की समस्या लगातार बनी रहती है. कई बार यूरिन के रास्ते से कुछ मात्रा में ब्लड भी निकल जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम बच्चेदानी में सूजन के इलाज के बारे में जानें.
बच्चेदानी में सूजन का घरेलू उपाय-
जूस और संतुलित आहार लें-
बच्चेदानी में सूजन से पीड़ित महिलाएं सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में नियमित रूप से संतुलित आहार लें. महिला रोगी इसके लिए चिकित्सकीय परामर्श से चार-पाँच दिन तक फलों का जूस पीकर उपवास कर सकती हैं.
निर्गुंडी की सहाता से-
निर्गुंडी का इस्तेमाल आमतौर पर किसी भी प्रकार के बाहरी या भीतरी सूजन के लिए किया जाता है. दरअसल इसमें वेदना शामक और मज्जा तंतुओं को शक्ति देने का औषधीय गुण मौजूद होता है. इसलिए बच्चेदानी के सूजन को खत्म करने के लिए इसका भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
चटपटे और तले हुए चीजों से परहेज रखकर-
जिन महिलाओं को बच्चेदानी में सूजन की शिकायत होती है उन्हें चटपटे और तले हुए चीजों से दूर ही रहना चाहिए. क्योंकि इस तरह के खाद्यपदार्थों के लगातार सेवन से आपकी परेशानी और बढ़ सकती है.
पैरों को कुछ देर तक ऊपर उठाकर-
जो महिलायें बच्चेदानी में होने वाले सूजन से परेशान हैं उन्हें दिन में दो-तीन बार अपने पैर को कम से कम एक घंटे के लिए उठाकर लेटना और आराम करना चाहिए. ऐसा करने से पीड़ित महिलाओं को राहत मिलती है.
बादाम के सेवन से-
सेहत बनाने के लिए आपने बादाम के फायदे तो सुने ही होंगे. आपको बता दें कि बादाम बच्चेदानी की सूजन से पीड़ित महिलाओं के लिए भी लाभकारी है. इसके लिए उन्हें बादाम रोगन एक चम्मच, शरबत बनफ्सा तीन चम्मच और खांड को पानी में मिलाकर सुबह पीना होगा. इसके साथ ही उन्हें बादाम रोगन का एक रुई का फ़ोया जननांग के मुंह पर रखना होगा.
चिरायते से-
चिरायता में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं. गर्भाशय के सूजन में राहत के लिए आपको चिरायते के पानी से योनि को धोकर पानी में पिसे हुये चिरायते का लेप पेट और योनि पर करें. ऐसा करने से काफी राहत महसूस होगा.
अरंडी के पत्तों का रस-
इस बीमारी में अरंडी के पत्तों का रस भी काफी लाभदायक सिद्ध होता है. अरंडी के पत्तों का रस छानकर रुई भिगोकर गर्भाशय के मुंह पर नियमित रूप से तीन-चार दिनों तक रखने से बच्चेदानी की सूजन में बहुत लाभ मिलता है.
कासनी की जड़-
कासनी की जड़ को गुलबनफ्सा और वरियादी 6-6 ग्राम, गावजवां और तुख़्म कसूम 5 ग्राम को 6 ग्राम मुनकके के साथ बारीक पीसकर 250 ग्राम पानी के साथ नियमित रूप से पिलाने पर बच्चेदानी के सूजन से काफी राहत मिलती है.
अन्य उपाय-
बच्चेदानी के सूजन से निपटने के लिए आप कई चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए अशोक वृक्ष की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सरिवा, लाल चन्दन, दारुहल्दी, मंजीठ की सौ-सौ ग्राम मात्रा को छोटी इलायची के दाने और चंद्रपुटी प्रवाल भस्म पचास ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम वाङ भस्म और लौह भस्म तीस ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित की 10 ग्राम मात्रा लेकर इनका चूर्ण बनाएँ. इसके बाद इसमें खींरेटी सेमल की छाल तथा गूलर की छल के काढ़े में 3-3 दिन खरण करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर सूखा लें. अब इनकी एक या दो गोली नियमित रूप से गाय के दूध के साथ लें तो इससे बच्चेदानी के सूजन के साथ ही कई अन्य रोगों में भी लाभ मिलता है.

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