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आयुर्वेद में कैसे होता है बच्चेदानी में गांठ का इलाज
उनमें से यूटेराइन फाइब्रॉयड भी एक है जिसका आयुर्वेद में दवाओं से इलाज संभव है। इसके इलाज के दौरान मरीज में दोष का लेवल देखा जाता है। मुख्य रूप से वात और कफ दोष कि निगरानी की जाती है। दोष और लक्षण के आधार पर इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।
गर्भाशय फाइब्रॉइड (गांठ) का उपचार-

गर्भाशय फाइब्रॉइड का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपके अंदर किस प्रकार के लक्षण नजर आ रहे हैं। अगर आपको फाइब्रॉइड है, लेकिन कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं, तो इलाज की जरूरत नहीं होती। फिर भी डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाते रहें। वहीं, अगर आप मीनोपाॅज़ के पास हैं, तो आपके फाइब्रॉइड सिकुड़ने लगते हैं। इसके अलावा, अगर आपमें फाइब्रॉइड के लक्षण नजर आते हैं, तो उनका इलाज बीमारी की स्थिति के अनुसार किया जाता है।

गर्भाशय फाइब्रॉइड (गांठ) का उपचारः दवा आधारित इलाज-
लक्षणों के अनुसार डॉक्टर आपको कुछ दवाईयां दे सकते हैं, जो फाइब्रॉइड के प्रभाव को कम करने का काम करती हैं। ये दवाएं इस प्रकार हैंः
 दर्द निवारक दवाएं
 गर्भनिरोधक गोलियां
 प्रोजेस्टिन-रिलीजिंग इंट्रायूटरिन डिवाइस (IUD)
 गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन एगोनिस्ट (GnHRa)
 एंटीहार्मोनल एजेंट या हार्मोन मॉड्यूलेटर

नोट: ध्यान रहें कि ये दवाएं फाइब्रॉइड से अस्थाई तौर पर ही राहत दिला सकती हैं। जैसे ही दवाओं को लेना बंद किया, फाइब्रॉएड फिर से हो सकता है। साथ ही इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जो कभी-कभी गंभीर रूप ले सकते हैं।

सर्जरी-
जब लक्षण बेहद गंभीर हों, तो डॉक्टर सर्जरी करने का निर्णय लेते हैं। यहां हम कुछ प्रमुख सर्जरी की प्रक्रियाओं के बारे में बता रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ सर्जरी के बाद महिला के गर्भवती होने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसलिए, सर्जरी कराने से पहले एक बार डॉक्टर से इस विषय में विस्तार से बात कर लें।

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