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छींक आना (Sneezing) वैसे तो बेहद सामान्य बात होती है लेकिन नवजात को छींक आना अक्सर उन माता-पिता (Parents) के लिए चिंता (Concern) का विषय बन जाता है, जो पहली बार पेरेंट्स बने हैं. शिशु को छींक आने पर माता-पिता सोचने लगते हैं कि कहीं बच्चे को ज़ुकाम तो नहीं हो गया या बच्चे की तबियत तो ख़राब नहीं है. आपकी इस चिंता को दूर करने के लिए आज हम आपको बताते हैं कि शिशु की छींक कब नॉर्मल बात होती है और कब ये चिंता का विषय हो सकती है.

इन स्थितियों में नॉर्मल है शिशु की छींक

-शिशु की मालिश या नाक की सफाई करते समय उसे छींक आ सकती है और ये बेहद नॉर्मल बात है.

-ब्रेस्ट फीडिंग करते समय शिशु की नाक का एक तरफ का हिस्सा मां के स्तन से दब सकता है, जिसकी वजह से शिशु को छींक आना नॉर्मल है.

-शिशु के जन्म के शुरुआती दिनों में उसके मुंह से लार ज्यादा बहती है जिसको कभी-कभी शिशु निगल भी लेता है. जब यह लार शिशु के वायु मार्ग को बाधित करती है तब ऐसे में भी शिशु को छींक आ सकती है.
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-कभी-कभी शिशु की नाक बंद होने की वजह से भी उसको छींक आ सकती है, जो शरीर की एक स्वाभाविक क्रिया है.

-अक्सर धूल के छोटे-छोटे कण हवा के जरिए शिशु की नाक में प्रवेश कर जाते हैं, जिसकी वजह से भी शिशु को छींक आना बेहद नॉर्मल बात है.



शिशु की छींक इन स्थितियों में हो सकती चिंता का विषय

-अगर शिशु को छींक आने के साथ-साथ देर तक खांसी भी आए तो आपको चिंता करने की जरूरत है.

-छींकते समय अगर शिशु को सांस लेने में भी परेशानी हो रही हो तो ये चिंता का विषय हो सकता है.

-अगर लगातार या रुक-रुक कर शिशु को कई छींक आती रहें तो भी यह चिंताजनक है.

-कई बार छींक आने के चलते अगर शिशु कमजोर दिखने लगा है तो ये चिंता का विषय हो सकता है.

-अगर शिशु को नीओनेटल ऐब्स्टनन्स सिंड्रोम (Neonatal abstinence syndrome) है और वो कई बार छींक रहा है तो ये आपके लिए बेहद फिक्र की बात है.

-शिशु को कई बार छींक आ रही है और ज़ुकाम-बुखार भी हो रहा है तो आपके लिए ये चिंता का विषय है.

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