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नवजात शिशु अथवा एक साल से भी कम उम्र के छोटे बच्चो की अपनी समस्याएं होती हैं। हर मां के लिए चुनौती होती कि वे शिशुओं के इशारों को समझे। चूंकि शिशु बोल नहीं सकते लेकिन इशारों से अपनी परेशानियों को बताने की कोशिश जरूर करतें हैं। ऐसे में आपको समझना होगा कि आपका नन्हा शिशु आपसे क्या कहना चाह रहा है? बच्चे कई तरह के इशारे करते हैं जैसे अंगूठें या कलाई का चूसना या फिर पैर पटकना, हिचकी लेना। इन इशारों को समझने की जरूरत है तभी आप बच्चे की परेशानी को दूर कर पाएंगी। तो आइए जानते हैं कि वो कौन से इशारें हैं जो बच्चे अक्सर अपनी परेशानियों को बताने के लिए करते हैं।


आंखों को मलना
जब बच्चे को नींद लगती हैं तो उस समय वो अपने आंखों को रगड़ता है लेकिन ध्यान रखें कि अगर बच्चा सो कर उठने के बाद भी आंखों को रगड़ रहा है तो हो सकता है संक्रमण की वजह या फिर आंख में कुछ चले जाने से वो ऐसा कर रहा हो।
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बच्चे के रोने के कई कारण हो सकते हैं।

बच्चे के रोने के कई कारण हो सकते हैं।
बच्चे के रोने कई कारण हो सकते हैं, इसमें भूख लगने से लेकर डर लगने या फिर कहीं दर्द होना। इन सब वजह से रोते समय बच्चा अलग अलग इशारे करता है। जैसे अगर बच्चे को भूख लगी है तो फिर वो आंखों को खोलकर रोता है वहीं अगर उसे डर लग रहा है तो फिर वह अपनी आंखों को बंद करके रोता है। इसलिए बच्चे की परेशानी को समझकर तुरंत उसके उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए।'
हाथ-पैर मारने से बच्चो का विकास होता है।

हाथ-पैर मारने से बच्चो का विकास होता है।
हवा में हाथ पैर का मारना
बच्चे जब बहुत खुश होते हैं तो हवा में हाथ पैर मारते हैं और इस तरह से करने से उनके हाथों पैरों की मांसपेशियों के विकास में मदद मिलती है। लेकिन कभी कभी बच्चा अपनी परेशानी को बताने के लिए भी ऐसा करता है। इसलिए जब कभी बच्चा बहुत देर तक पैर हाथ हवा में किए रहें तो देख लें कि कहीं उसका डायपर गीला तो नहीं हो गया है या फिर उसके नैपी को बदलने की जरूरत तो नहीं है।
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अगर बच्चा स्तनपान करता है तो मां को अपने खान पान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

अगर बच्चा स्तनपान करता है तो मां को अपने खान पान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
घुटनों को पेट से सटाकर सोना
कई बार बच्चे अपने पैरों या फिर अपने घुटनों को पेट से लगाकर सोते हैं। बच्चों का इस तरह सोना उसके पाचन संबंधी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। ऐसी स्थिति में उसे कब्ज या पेट दर्द की शिकायत हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप इस बात का ध्यान रखें कि दूध पीने के बाद बच्चे को कोई परेशानी तो नहीं हो रही है। अगर बच्चा स्तनपान करता है तो मां को अपने खान पान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

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