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प्रेगनेंसी में हल्‍दी का दूध पीने से मां और शिशु को मिलते हैं कुछ ऐसे फायदे

हल्‍दी कई बीमारियों की दवा है और हल्‍दी के दूध को तो आयुर्वेद में भी जगह दी गई है। प्रेगनेंट महिलाएं भी हल्‍दी का दूध पीकर कई लाभ पा सकती हैं।

प्रेगनेंसी में हल्‍दी का दूध पीने से मां और शिशु को मिलते हैं कुछ ऐसे फायदे
कई वर्षों से औषधीय गुणों के कारण हल्‍दी का उपयोग किया जा रहा है। हल्‍दी की जड़ सूजन-रोधी प्रभाव देती है और एंटीऑक्‍सीडेंट से युक्‍त होती है।


गुणों से भरपूर हल्‍दी के दूध को स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। वैसे भी इस समय कोरोना वायरस की वजह से हल्‍दी का दूध पीने पर अधिक जोर दिया जा रहा है। अब यहां जानने योग्‍य बात यह है कि हल्‍दी का दूध प्रेगनेंट महिलाओं के लिए कितना फायदेमंद होता है।

​प्रेगनेंसी में हल्दी वाला दूध पी सकते हैं

हल्‍दी के दूध को गोल्‍डन मिल्‍क कहा जाता है और सेहत के लिए ये बहुत फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं को इससे भ्रूण के स्‍केलेटल सिस्‍टम के विकास के लिए जरूरी कैल्शियम मिलता है।

इसके अलावा प्रेगनेंसी में सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना सही रहता है वरना शिशु की सेहत को नुकसान हो सकता है।


​प्रेगनेंसी में हल्‍दी वाला दूध पीने के फायदे

गर्भवती महिलाओं के लिए हल्‍दी का दूध निम्‍न तरह से फायदेमंद होता है :

पैरों में सूजन : प्रेगनेंसी में वॉटर रिटेंशन और हार्मोनल बदलावों के कारण जोड़ों में दर्द और पैरों में सूजन को हल्‍दी दूर करती है।
सर्दी-जुकाम : हल्‍दी में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैा जो सर्दी-जुकाम से राहत दिलाती है। हल्‍दी का दूध पीने से सर्दी-जुकाम, खांसी और गले की खराश ठीक होती है।
इम्‍यून सिस्‍टम : हल्‍दी एंटीऑक्‍सीडेंट की तरह काम करती है जो फ्री रेडिकल्‍स को हटाकर इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करती है।


हल्‍दी दूध के फायदे

हल्‍दी के एं‍टीलिपिडेमिक गुण कोलेस्‍ट्रोल को बढ़ने से रोकते हैं। इसमें करक्‍यूमिन नामक तत्‍व होता है जो प्रेगनेंट महिलाओं और शिशु को कई बीमारियों एवं संक्रमणों से बचाता है।

गुनगुना हल्‍दी वाला दूध पीने से अच्‍छी नींद आती है। प्रेगनेंसी में अक्‍सर महिलाओं को अनिद्रा या गहरी नींद न आने की शिकायत रहती है।


​ज्यादा हल्दी खाने के नुकसान

यदि गर्भवती महिला अधिक मात्रा में हल्‍दी का सेवन कर ले तो इससे गर्भाशय समेत नरम मांसपेशियों में संकुचन आ सकता है।

प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में गर्भाशय में संकुचन आने की वजह से लेबर पेन शुरू हो सकता है जिससे मिसकैरेज हो जाता है। प्रेगनेंसी के नौंवे महीने या प्रेगनेंसी के 37वें हफ्ते में हल्‍दी का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।


​शिशु के विकास में बाधा

गर्भवती महिलाओं के लिए हल्‍दी की मात्रा का ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है। गर्भवती महिला के हल्‍दी में मौजूद करक्‍यूमिन की ज्‍यादा खुराक लेने से भ्रूण में विकार पैदा हो सकते हैं या भ्रूण के विकास में दिक्‍कत आ सकती है।

हल्‍दी में प्रमुख तत्‍व के रूप में करक्‍यूमिन होता है इसलिए ज्‍यादा हल्‍दी खाने से शिशु पर खतरा मंडरा सकता है।


​कितनी मात्रा में हल्‍दी खानी चाहिए

प्रेगनेंट महिलाओं को हल्‍दी के पूरे फायदे लेने के लिए प्रतिदिन 1 ग्राम से अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए। गर्भावस्‍था में हल्‍दी की अधिक खुराक के कारण गर्भपात का खतरा रहता है या प्रेगनेंट महिला और बच्‍चे को कोई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या भी हो सकती है।

यदि आप हल्‍दी के दूध के सभी लाभ पाना चाहती हैं तो एक गिलास दूध में सिर्फ एक चुटकी हल्‍दी मिलाकर पिएं।

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