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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में बदलाव आना स्वभाविक है. सप्ताह दर सप्ताह जैसे-जैसे महिलाओं का पेट बढ़ता है वैसे-वैसे उन्हें कई चिंताएं सताना शुरू कर देती हैं. ऐसा ही एक सवाल ये भी है कि गर्भावस्था के दौरान कैसे सोएं? प्रेगनेंसी में मां के भरपूर आराम करने पर बच्चे की सेहत भी सकारात्मक रूप से प्रभावित होती है. ऐसे में गर्भावस्था के दौरान सोने की स्थिति से संबंधित जरूरी तथ्यों के बारे में पता होना जरूरी है. इस लेख में हम बताएंगे कि प्रेगनेंसी में सोने का सही तरीका क्या है?
डॉक्टर आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान एक तरफ करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं. हालांकि, प्रेगनेंसी में बाईं ओर सोना सबसे अच्छा माना है. बाईं ओर सोने से भ्रूण को प्लेसेंटा के माध्यम से पर्याप्त ऑक्सीजन के साथ जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं. वहीं शरीर में रक्त का प्रवाह भी सही रहता है. ध्यान दें कि प्रेगनेंसी के दौरान मां और शिशु दोनों के शरीर में रक्त का प्रवाह होना जरूरी है.
क्यों होती है गर्भावस्था के दौरान सोने में मुश्किल?
प्रेगनेंसी में भ्रूण के आकार के साथ योनि के आकार में भी वृद्धि होती है. इसके अलावा महिलाओं के स्तनों का आकार भी बढ़ने लगता है, जिसके कारण स्तन भारी हो जाते हैं. कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान रात के समय बार-बार पेशाब आने की समस्या से भी परेशान रहती हैं. वहीं कुछ महिलाओं को सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होती है. चूंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का वजन और पेट दोनों बढ़ जाते हैं, इसलिए महिलाओं को सोने में मुश्किल महसूस होती है. इसी कारण डॉक्टर भी महिलाओं को करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं. साथ ही प्रेगनेंसी में महिलाओं को पेट के बल सोने के लिए मना करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पेट के बल सोने से भ्रूण पर दबाव पड़ सकता है. इससे संबंधित रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करती है कि प्रेगनेंसी के दौरान पेट के बल नहीं सोना चाहिए.
प्रेगनेंसी के दौरान दाई ओर सोना चाहिए या नहीं?
चूंकि प्रेगनेंसी के दौरान बाईं ओर सोना अच्छा है, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान दाईं ओर नहीं सो सकतीं. 2019 में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि दाईं ओर सोने पर भी वही फायदे मिलते हैं जो बाईं तरफ सोने से मिलते हैं. हां, ये भी सच है कि दाईं ओर सोने से IVC के साथ संपीड़न (कम्प्रेशन) से संबंधित समस्याओं का सामना करना भी पड़ सकता है लेकिन ये समस्या कुछ ही महिलाओं में देखी जाती है.
प्रेगनेंसी के दौरान पीठ के बल सोना कैसा है?
आमतौर पर प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में पीठ के बल सोना सुरक्षित माना जाता है. उसके बाद कुछ अध्ययन ये बताते हैं कि पीठ के बल पूरी रात सोने से बच्चे की जान भी जा सकती है. हालांकि, इसके पीछे एक कारण स्लीप एपनिया भी हो सकता है. ऐसे में इस पर अभी और शोध होने बाकी हैं. इसके अलावा, पीठ के बल सोने के महिलाओं को पीठ दर्द, बवासीर, पाचन संबंधी समस्याएं आदि हो सकती हैं. वहीं महिलाएं हल्का सिरदर्द या चक्कर भी महसूस कर सकती हैं. अगर आधी रात में आप पीठ के बल सोने की अवस्था में जागें तो ऐसे में आपको अपनी पोजीशन बदल लेनी चाहिए.
प्रेगनेंसी के दौरान ये भी कहा जाता है कि सिर्फ सोना ही नहीं बल्कि सोकर उठने के समय भी ध्यान रखना चाहिए. सोकर जब भी बेड से उठें तो आप झटके से ना उठें. बल्कि आपको एक करवट से उठना चाहिए. सामान्यतौर पर डॉक्टर्स ऐसे ही उठने की सलाह देते हैं.
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