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एड़ियों में दर्द होने की कई बड़ी वजह हो सकती हैं, जिसमें वजन का बढ़ना, लंबे समय तक खड़े रहना, हील्स या ऊंची एड़ी वाले जूते पहनना, शरीर में कैल्शियम की कमी होना आदि शामिल हैं। इससे निजात पाने के लिए लोग तमाम तरह की दवाओं का सेवन करते रहते हैं। लेकिन दवा का असर खत्म होते ही दर्द फिर से बढ़ जाता है।

जानें एड़ी में दर्द के कारणों को :-

1. प्लेन्टर फेस्याइटिस (Plantar Fasciitis)
हमारे पैरों में मौजूद एक लिगामेन्ट जिसका नाम प्लेन्टर फेसिया है, ये हील बोन से लेकर पैरों के सिरे तक होता है। यदि इस लिगामेन्ट में सूजन या जलन हो जाए, तो यह एड़ी में दर्द का कारण बन सकता है। जिन व्यक्तियों की दिनचर्या में भागने या कूदने जैसी गतिविधियां शामिल हैं, उन्हें इस समस्या के होने की संभावना अधिक है। प्लेन्टर फेस्याइटिस का दर्द उस समय महसूस हो सकता है जब कोई व्यक्ति आराम करने के बाद अपनी एड़ी पर ज़ोर देता है। जैसे कि सुबह उठते समय या फिर काफी देर तक बैठे रहने के बाद उठने पर।

2. एकिलीज़ टेंडिनाइटिस (Achilles Tendinitis)
एकिलीज़ टेंडन एक टिशू होता है जो काफ मसल को हील बोन से जोड़ता है। यह हमारे शरीर का सबसे मजबूत और लंबा टंेडन भी माना जाता है। बास्केटबॉल प्लेयर्स या फिर रनर्स में इस तरह की परेशानी ज़्यादा देखने को मिलती है। इस स्थिति में टंेडन में सूजन या जलन आ जाती है जिस वजह से दर्द के साथ कुछ अन्य परेशानियां एड़ी के पिछले सिरे में उत्पन्न होने लगती है। खराब फिटिंग के जूते पहनने के कारण भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।

3. एड़ी में मोच या तनाव
मोच या तनाव भी एड़ी में दर्द के कारण बन सकते हैं। ये परेशानियां आमतौर पर शारीरिक गतिविधियों के कारण व्यक्ति को परेशान कर सकती है। हालांकि ये सामान्य मानी जाती हैं, लेकिन कुछ मौकों पर गंभीर भी हो सकती हैं।

4. हील बर्साइटिस (Heel Bursitis)
सूजन या जलन की समस्या एड़ी के पिछले सिरे में हो सकती है जहां बर्सा मौजूद रहता है। बर्सा हमारे शरीर के विभिन्न भागों में उपस्थित एक तरल-युक्त थैली का नाम है। यह समस्या तब उत्पन्न हो सकती है जब कोई व्यक्ति ज़मीन पर असामान्य ढंग या ज़ोर से एड़ी रखता है।

5. स्ट्रेस फ्रेक्चर
स्ट्रेस फ्रेक्चर की समस्या आमतौर पर एथलिट्स और लंबी दूरी तय करने वाले रनर्स में हो सकती है जो कम समय में ज़्यादा दूरी तय कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में एड़ी का कार्य बढ़ जाता है और उस पर बहुत ज़्यादा तनाव हो जाता है जिस वजह से फ्रेक्चर की परेशानी उत्पन्न हो जाती है। ये समस्या ना सिर्फ दर्द के कारणों में से एक है, बल्कि ऐसा होने पर कई दिन तक व्यक्ति के दिनचर्या के कामों में बाधा आ सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण भी स्ट्रेस फ्रेक्चर हो सकता है।

6. हेगलंड्स विकृति (Haglund’s Deformity)
पैर की हड्डी एवं सॉफ्ट टिशूज़ की असामान्यता को हेगलंड्स विकृति कहा जाता है। इसे पम्प बम्प के नाम से भी जाना जाता है। एड़ी के पिछली ओर हड्डी में वृद्धि होने के कारण यह परेशानी उत्पन्न होती है। जब हड्डी की वृद्धि वाला हिस्सा जूतों से रगड़ता है तो एकिलिस टेंडन के करीब सॉफ्ट टिशूज़ में सूजन या जलन आ जाती है। इस वजह से दर्द महसूस होता है। वैसे तो इस प्रकार की स्थिति किसी के भी साथ हो सकती है। लेकिन आमतौर पर जो लोग सख्त और बंद एड़ी के जूते पहना करते हैं उन्हें यह परेशानी ज़्यादा हो सकती है।

7. सेवर्स रोग (Sever’s Disease)
एड़ी में दर्द के कारण में एक मुख्य नाम सेवर्स रोग का भी है जो कि छोटे बच्चों से संबंधित है। लगभग 8 से 16 साल के बच्चों में इस तरह की समस्या देखने को मिलती है। हील बोन की ग्रोथ प्लेट में दबाव या तनाव के कारण यह परेशानी हो सकती है। बहुत ज़्यादा दौड़ने या कूदने के कारण ग्रोथ प्लेट में सूजन और जलन हो सकती है जिस वजह से बच्चों को दर्द महसूस होता है।

8. हील स्पर (Heel Spur)
यह असामान्य रूप से हड्डी की वृद्धि है उस जगह पर जहां प्लान्टर फेसिया हील बोन से जुड़ती है। प्लान्टर फेसिया और पैरों की मांसपेशियों पर लंबे समय तक तनाव के फलस्वरूप हील स्पर होने की संभावना बढ़ जाती है, मुख्य रूप से जिन लोगों के शरीर का वज़न ज़्यादा है या फिर भागने और जॉगिंग करने वाले व्यक्ति। हालांकि हर मौके पर यह दर्द का कारण नहीं बनती, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को ऐसी स्थिति में दर्द महसूस होता है।
इनके अलावा भी कुछ स्थितियां एड़ी में दर्द का कारण बन सकती हैं। जैसे कि गाउट, बोन सिस्ट, बोन ट्यूमर, टार्सल टनल सिंड्रोम, एंकिलोसिंग स्पोंडिलाइटिस, रियेक्टिव आर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोमाइलिटिस, सर्कुलेशन में दिक्कत, चलते या दौड़ते समय गलत पॉश्चर अपनाना आदि।

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