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पुनर्नवा शोथहर, शीतल, हृदयोत्तेजक, शूलहर तथा मूत्रल है। इसका प्रयोग शोथ रोग, हृदय रोग, जलोदर, पांडु और मूत्रकृच्छ्र तथा वृक्क-विकारों में किया जाता है। इसका विशिष्ट प्रभाव गुर्दों और मूत्रवह संस्थान पर पड़ता है। इसलिए यह मूत्रल और शोथहर है।

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