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वरदान से कम नहीं है IVF ट्रीटमेंट, लेकिन इसके साइड इफेक्‍ट्स जानकर हो जाएंगे हैरान

कई कपल्‍स के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट किसी वरदान से कम नहीं है। हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी होते हैं। जानिए आईवीएफ ट्रीटमेंट के साइड इफेक्‍ट्स के बारे में।


जो महिलाएं नैचुरली तरीके से कंसीव नहीं कर पाती हैं, वो आईवीएफ (IVF) ट्रीटमेंट की मदद से मां बन सकती हैं। आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक रिप्रोडक्टिव टेक्‍नोलोजी है। इस प्रक्रिया में महिला की ओवरी से एग लेकर उसे स्‍पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है।

फर्टिलाइज के बाद भ्रूण को गर्भाशय में डाला जाता है।
​आईवीएफ क्‍यों करवाई जाती है

अगर फैलोपियन ट्यूब ब्‍लॉक या डैमेज हो, पुरुष में स्‍पर्म काउंट कम हो, महिला ओवुलेशन विकार, प्रीमैच्‍योर ओवेरियन फेलियर, गर्भाशय में रसौली, जिन महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब निकाल दी गई हो, अनुवांशिक विकार से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति कोई आईवीएफ की जरूरत पड़ती है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट से कुछ जोखिम कारक जुड़े होते हैं जिनके बारे में यहां बताया जा रहा है :
​एक्‍टोपिक प्रेगनेंसी

आईवीएफ में भ्रूण को सीधा गर्भाशय के अंदर डाला जाता है। दुर्लभ मामलों में यानी 2 से 5 फीसदी मामलों में एक्‍टोपिक प्रेगनेंसी हो सकती है। जब भ्रूण यूट्राइन लाइनिंग से न जुड़े और प्रजनन तंत्र के अन्‍य हिस्‍सों में विकसित हो जाए तो इसे एक्‍टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं।
​प्रीमैच्‍योर बर्थ

कुछ दुर्लभ मामलों में आईवीएफ से प्रेगनेंट हुई महिला नौ महीने से पहले ही बच्‍चे को जन्‍म दे सकती है। जन्‍म के समय शिशु का वजन कम हो सकता है। नौ महीने से पहले डिलीवरी यानी प्रीमैच्‍योर लेबर में शिशु की सेहत को कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं।

​मानसिक और शारीरिक तनाव

आईवीएफ जैसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से गुजरना महिलाओं पर शारीरिक और मानसिक दबाव डालता है।

ट्रीटमेंट के लिए हार्मोंस के इंजेक्‍शन दिए जाते हैं जिससे शरीर पर काफी दबाव और तनाव पड़ता है। कपल्‍स के लिए भावनात्‍मक रूप से भी यह ट्रीटमेंट काफी मुश्किल होती है।

​मल्‍टीपल प्रेगनेंसी

आईवीएफ में एक से ज्‍यादा बच्‍चे हो सकते हैं। हो सकता है कि आईवीएफ से आपको जुड़वा या ट्रिपल बच्‍चे पैदा हों। मल्‍टीपल बर्थ से कई तरह की जटिलताएं आ सकती हैं और प्रेगनेंसी में भी खतरा रहता है।

मल्‍टीपल बर्थ में सी-सेक्‍शन के खतरे, जेस्‍टेशनल डायबिटीज, हाई ब्‍लड प्रेशर, प्री-क्‍लैंप्‍सिया, प्रीमैच्‍योर बर्थ जैसी जटिलताओं का खतरा रहता है।
​मिसकैरेज

वैसे तो आईवीएफ ट्रीटमेंट से मिसकैरेज के संबंध को लेकर कोई प्रमाण नहीं है लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में मिसकैरेज का खतरा बना रहता है।

मां की उम्र पर भी मिसकैरेज की संभावना निर्भर करती है। कुछ महिलाओं को आईवीएफ से कंसीव करने के बाद मिसकैरेज होने पर ज्‍यादा दुख होता है।

​दवाओं से नुकसान

हार्मोनल इंजेक्‍शन की वजह से इंजेक्‍शन वाली जगह पर दर्द, मूड स्विंग्‍स, हॉट फ्लैशेज, योनि में सूखापन, पेट फूलना, ब्रेस्‍ट में दर्द, सिरदर्द, वजन बढ़ने, मतली, चक्‍कर आने, ब्‍लीडिंग होना, थकान, नींद आने में दिक्‍कत और एक्‍ने जैसे साइड इफेक्‍ट दिख सकते हैं।

​एग रिट्रिवल के साइड इफेक्‍ट्स

इस प्रक्रिया में ओवरी से एग को निकाल कर उसे फर्टिलाइज करने के बाद भ्रूण को गर्भाशय में डाला जाता है। इसकी वजह से हल्‍की ऐंठन, योनि से डिस्‍चार्ज आना, ब्रेस्‍ट छूने पर दर्द होना और कब्‍ज हो सकती है।

अगर 100.5 डिग्री फारेनहाइट से ज्‍यादा बुखार होने, पेल्विक हिस्‍से में तेज दर्द, पेशाब में यूरिन या ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने जैसे गंभीर लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्‍टर को दिखाएं। वैसे ये साइड इफेक्‍ट दिखने दुर्लभ हैं लेकिन आईवीएफ के बाद संक्रमण और अन्‍य जटिलताएं होने की संभावना रहती हैं।

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