Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
Nails fungus: ध्यान से देखें अपने नाखूनों का रंग, ये पीले नहीं सड़ने लगे हैं; ये हो सकती है 4 वजह
नाखून के संक्रमण (Fungal nail infection) को टिनिया यूनगियम भी कहा जाता है। यह एक ऐसा संक्रमण है, जो पैर के नाखूनों को प्रभावित करता है। अगर नाखूनों का रंग पीला पड़ने लगे तो यह नेल फंगस का संकेत हो सकता है।
क्या आपके पैर के उंगलियों के नाखून पीले पड़ रहे हैं। आमतौर पर हम इसे मामूली समझने की भूल कर बैठते हैं। हमें लगता है कि शायद गंदगी या शरीर में किसी चीज के कमी के कारण नाखूनों का रंग बदल रहा है, लेकिन वास्तव में यह नेल फंगस का संकेत है। नाखूनों में फंगल संक्रमण एक सामान्य स्थिति है, जो आपके नाखून की नोक के नीचे एक सफेद या फिर पीले धब्बे के रूप में शुरू होती है। जैसे-जैसे संक्रमण गहरा होता जाता है, आपके नाखूनों का रंग फीका पड़ने लगता है, नाखून मोटे होने लगते हैं या फिर कभी-कभी किनारे पर से उखड़ भी सकते हैं।
यह स्थिति कई नाखूनों को प्रभावित करती है। कुछ लोगों को इससे संक्रमण हो सकता है, जबकि कुछ लोगों के लिए यह समस्या गंभीर बन जाती है। इसमें नाखूनों में दर्द होने के साथ खून भी बहने लगता है। यदि आपकी स्थिति गंभीर नहीं है, तो आपको उपचार की जरूरत नहीं पड़ती , लेकिन दर्दनाक स्थिति में देखभाल और दवा दोनों की जरूरत पड़ सकती है। तो आइए जानते हैं नेल फंगस के कारण और लक्षण।
नेल फंगस के कारण
उम्र-
कई बार बढ़ती उम्र के साथ नेल फंगस की समस्या हो जाती है। उम्र के साथ नाखून टूटने के साथ सूखे से हो जाते हैं। नाखूनों में आईं दरारें फंगस को प्रवेश करने और संक्रमण पैदा करने का कारण बन सकती हैं।
ब्लड सकुर्लेशन में कमी-
पैरों में ब्लड सकुर्लेशन कम होना भी फंगल इंफेक्शन का मुख्य कारण है।
गंदे पैर होना-
कई बार पैरों और नाखूनों में गंदगी जमा होने से भी फंगल इंफेक्शन हो जाता है।
हाथ-पैर पर ज्यादा पसीना आना-
जिन लोगों के हाथ और पैरों पर जरूरत से ज्यादा पसीना आता है, उन्हें नेल फंगस होने का खतरा ज्यादा रहता है।
नेल फंगस से बचने के उपाय
नियमित रूप से
हाथ व पैरों को ठीक से धोएं।
नाखूनों को छोटा और साफ रखें। हर इस्तेमाल के बाद अपने नेल क्लिपर को हमेशा डिसइंफेक्ट करें।
हमेशा साफ और पसीने को सोखने वाले मोजे पहनें। अच्छी क्वालिटी वाले जूते पहनें।
नाखूनों को सीधा ट्रिम करें और किनारों को एक फाइलर से चिकना करें ।
पुराने जूते पहनते समय उन्हें बैक्टीरिया फ्री करें।
नेल पॉलिश और आर्टिफिशियल नाखूनों का यूज करने से बचें।
यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं, जो मैनीक्योर और पेडीक्योर करवाते हैं, तो ऐसे सैलून पर जाएं, जो हर उपयोग के बाद अपने उपकरणों को बैक्टीरिया फ्री करता है, ताकि संक्रमण की कोई गुंजाइश न हो।
नेल फंगस से जुड़ी जटिलताएं
नेल फंगस के कारण आपके नाखूनों को बहुत नुकसान होता है। इसकी वजह से पैरों में अन्य संक्रमण भी हो सकते हैं। खासतौर से अगर आपको डायबिटीज है तो पैरों में ब्लड सकुर्लेशन और नर्व सप्लाई कम हो जाती है। इससे सेल्युलाइटिस का खतरा भी ज्यादा रहता है।
कुछ लोगों के लिए संक्रमण का इलाज करना मुश्किल हो सकता है। नाखून के संक्रमण को तब तक पूरी तरह से ठीक नहीं माना जाता जब तक कि संक्रमण से मुक्त एक नया नाखून बड़ा न हो जाए। बेशक, इससे खतरा न हो, लेकिन नेल फंगस का वापस आना संभव है।
| --------------------------- | --------------------------- |