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पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को यूरीन लीकेज की समस्या का सामना ज्यादा करना पड़ता है। यह महिलाओं में कॉमन और गंभीर समस्या है। इस बीमारी के कारण खांसने, छींकने और भारी सामान उठाने पर यूरीन निकल जाता है। इस परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाए और समय रहते डॉक्टर से मिलें।
यूरीनरी इनकंटीनेंस महिलाओं में बहुत आम समस्या है। पर महिलाएं इस बीमारी पर बात करने से हिचकती हैं, लंबे समय तक समस्या को नजर अंदाज करना गंभीर बीमारी को जन्म दे सकता है।
यूरीनरी इनकंटीनेंस महिलाओं में बहुत आम समस्या है। पर महिलाएं इस बीमारी पर बात करने से हिचकती हैं, लंबे समय तक समस्या को नजर अंदाज करना गंभीर बीमारी को जन्म दे सकता है।

महिलाओं में रनिंग करते, भारी सामान उठाते या रस्सी कूदते समय यूरीन का लीक होना यूरिनरी इनकंटीनेंस कहलाता है। जैसे ही पेट पर दबाव पड़ता है तो यूरीन लीक हो जाती है। यह समस्या महिलाओं में बहुत आम है। इस बीमारी पर स्टिग्मा होने की वजह से महिलाएं इस पर बात नहीं करतीं।

यूरीन पर काबू क्यों नहीं हो पाता?

यूरीनरी इनकंटीनेंस तीन टाइप का होता है। तीनों के अलग-अलग कारण हैं।
खांसने-छींकने पर पेशाब निकलना
अगर खांसने, छींकने या कुछ भारी सामान उठाने से पेशाब निकल जाता है तो यह स्ट्रेस इनकंटीनेंस । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यूरीन के चारों तरफ की मांसपेशियां ढीली हो चुकी होती हैं। जब मसल्स कमजोर हो जाती हैं तब वे ढीली पड़ने लगती हैं। यंग एज, प्रेग्नेंसी, डिलीवरी और मेनोपॉज के बाद यह समस्या ज्यादा होती है।
तो वहीं, नॉर्मल डिलीवरी के बाद भी अगर वजाइना के रास्ते में कोई मांसपेशी फट गई हो, ठीक से स्टिच न किया गया हो तो स्ट्रेस इनकंटीनेंस हो जाता है। यह समस्या मरीज के लिए कभी-कभी इतनी दुखदायी हो जाती है कि उसे खांसने या छींकने से भी डर लगने लगता है।
अगर आप भी यूरीन पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो अपनी नजदीकी गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें।

बाथरूम जाने से पहले यूरीन निकल जाना
यूरीन करने की इच्छा होती है लेकिन जब तक आप बाथरूम जाते हैं तब तक यूरीन निकल जाता है, यह अर्ज इनकंटीनेंस कहलाता है। यूरीन को रोक नहीं पाते। यह समस्या यूरीन में इंफेक्शन, डायबिटीज या यूरीन के रास्ते की नसें यानी यूरीनरी ब्लैडर की नसें कमजोर होने के कारण होती हैं।
लगातार यूरीन बहते रहना
कई बार यूरीन और वजाइना के रास्ते में कनेक्शन बनने से यूरीन का रास्ता प्राइवेट पार्ट में आ जाता और यूरीन हमेशा टपकता रहता है। इस कंडीशन को कंटीन्यूएस इनकंटीनेंस कहते हैं। यह समस्या इसलिए होती है कि अगर किसी महिला की डिलीवरी में लंबे समय तक लेबर पेन चलता रहे और नीचे के रास्ते पर बच्चे के सिर से प्रेशर लगने से वो रास्ता खराब हो जाता है, जिससे यूरीन और वजाइना का रास्ता एक हो जाता है। आजकल क्रिटिकल कंडीशन में सिजेरियन करने से ये वाला इनकंटीनेंस कम देखा जाता है। डॉ. शैली का कहना है कि इन सभी में स्ट्रेस इनकंटीनेंस बहुत कॉमन है।
लंबे समय तक समस्या पर ध्यान न देने के जोखिम
लंबे समय तक यूरिनरी इनकंटीनेंस पर ध्यान न देने से यूरीन टपकते रहने से सारा एरिया संक्रमित हो जाता है। यूरीन और आसपास की स्किन में इंफेक्शन हो सकता है। वहां से बदबू आने लगती है। अक्सर 50 की उम्र के बाद जब यूरिनरी इनकंटीनेंस के कारण पेशाब कंट्रोल नहीं होता तो कपड़ों में भी लग जाता है। घर वाले भी पेशेंट से मुंह मोड़ लेते हैं। कई बार बुजुर्ग महिलाओं को डायपर भी पहनाना पड़ता है। इस बीमारी से पेशेंट की जिंदगी पर नेगेटिव असर पड़ता है।

हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

यूरिनरी इनकंटीनेंस से बचाव क्या है?

यूरिनरी इनकंटीनेंस से बचने का बेहतर उपाय है कि सबसे पहले इसके शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें और डॉक्टर से बात करें।
मोटापा कम रखें नहीं तो मांसपेशियां कमजोर होंगी। मसल्स स्ट्रांग तभी होंगे जब मोटापा नहीं होगा।
डायबिटीज को न होने दें।
यूरीन में जरा-सा भी इंफेक्शन होने पर इलाज कराएं।
यूरीन के रास्ते के मसल्स की एक्सरसाइज के लिए कीगल एक्सरसाइज करें। इसे यंग एज से शुरू करने से लेकर मेनोपॉज के बाद तक करना चाहिए।
पानी खूब पीएं। ज्यादा समय यूरीन को रोककर न रखें। हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं।

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