healthplanet.net

Posted on

डिलीवरी के बाद के पहले 6 हफ्ते मां और शिशु दोनों के लिए ही बहुत नाजुक होते हैं। प्रसव के बाद महिलाओं का शरीर कमजोरी से लड़ रहा होता है और साथ ही शिशु की देखभाल के लिए भी तैयार हो रहा होता है। वहीं नन्‍हा शिशु अभी भी गर्भ से बाहर के वातावरण में खुद को ढालने की कोशिश कर रहा होता है।

यही वजह है कि डिलीवरी के तुरंत बाद की गई देखभाल से मां और शिशु को आगे चलकर लंबे समय तक फायदा होता है।
​डिलीवरी के बाद के पहले 24 घंटे

पहले चौबीस घंटों में इस बात पर गौर करना होता है कि कहीं महिला को कोई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या तो नहीं हो रही है। डिलीवरी के बाद पहले 6 घंटों में ब्‍लड प्रेशर चेकर करना और पेशाब आ रहा है या नहीं, देखना जरूरी होता है।

नॉर्मल डिलीवरी होने पर पहले 24 घंटे के अंदर महिलाओं को हल्‍का-सा मूव करने के लिए कहा जाता है।

सिजेरियन ऑपरेशन होने पर टांकों और इंफेक्‍शन का खतरा होने की वजह से मां की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति काे मॉनिटर किया जाता है।

​शिशु की देखभाल

आमतौर पर पहले 24 घंटों में खून से संबंधित कुछ दुर्लभ विकारों से बचाने के लिए शिशु को विटामिन के का इंजेक्‍शन दिया जाता है। जन्‍म के बाद शिशु को पीलिया होने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए इसकी भी जांच की जाती है। पीलिया का कोई भी लक्षण दिखने पर शिशु को जरूरी उपचार दिया जाता है।

शिशु के पहले मल यानि मेकोनियम पर भी ध्‍यान दिया जाता है। यदि बच्‍चा पहले 24 घंटों में मल त्‍याग नहीं करता है, तो उसकी जांच की जाती है। यदि कोई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या न हो, तो शिशु को बीसीजी वैक्‍सीन लगाई जाती है।

दूध कैसे पिलाएं

यदि कोई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या न हो, तो पहले 24 घंटों में मां और बच्‍चे को अलग नहीं किया जाना चाहिए। इस समय महिलाओं को शिशु से स्किन-टू-स्किन कॉन्‍टैक्‍ट रखने के लिए कहा जाता है। इससे बच्‍चे को दूध पीने में मदद मिलती है।

जन्‍म के बाद पहले एक घंटे के अंदर ही शिशु को स्‍तनपान करवाना शुरू कर देना चाहिए। इससे शिशु की पाचन प्रक्रिया उत्तेजित होती है। मां का पहला दूध यानि कोलोस्ट्रम शिशु को कई तरह के इंफेक्‍शन से बचाता है।

सिजेरियन डिलीवरी होने पर शिशु को मां का दूध मिलने में थोड़ी देर हो सकती है।

मां की देखभाल

डिलीवरी के बाद के पहले 6 सप्‍ताह मां और शिशु की देखभाल के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इसमें निम्‍न बातों का ध्‍यान रखें :
पहले 6 महीने में आपको बस अपने बच्‍चे की देखभाल पर ध्‍यान देना है। इस दौरान कोई नई जिम्‍मेदारी न लें।
जब भी आपका बच्‍चा सोए, आप भी झपकी ले लें। इससे आपको एनर्जी मिलेगी।
डॉक्‍टर की सलाह से आप एक्‍सरसाइज करना भी शुरू कर सकती हैं। थोड़ा बहुत मूव करती रहें और एक्टिव रहें।
डिलीवरी के बाद अपनी डाइट पर ध्‍यान देना बहुत जरूरी है। इसमें आप अनाज, फल, सब्जियां, प्रोटीन और डेयरी उत्‍पादों को शामिल करें।

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info