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नारिय के तेल की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसे बच्चों के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। इससे त्वचा पर शीतल प्रभाव पड़ता है, साथ ही त्वचा में भी आसानी से समा जाता है। नारियल के तेल में एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, ये बच्चे की त्वचा के लिए काफी अच्छे होते हैं। बच्चों को संक्रमण से बचाते हैं।

शिशु की मालिश के लिए कौन सा तेल सुरक्षित है?
आप शिशु की मालिश के लिए वनस्पती तेल या मिनरल बेबी आॅयल इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि आपके शिशु की त्वचा पर चकत्ते हैं या फिर उसकी त्वचा शुष्क या संवेदनशील है, तो आपको तेल के विकल्पों पर ध्यान देना होगा। वैसे इस बात के कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि कोई एक तेल दूसरे से बेहतर है। कुछ तेल त्वचा में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं, मगर शोध दर्शाते हैं कि उनमें अन्यों की तुलना में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हैं।

कुछ विशेषज्ञ वनस्पती या पौधों पर आधारित तेल लगाने की सलाह देते हैं, क्योंकि वे आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। यदि शिशु तेल से चिकनी अपनी उंगलियों को चूस भी ले, तो भी परेशानी की बात नहीं होती, क्योंकि यह तेल आसानी से पचने वाला होता है। यदि आप वनस्पती तेल का इस्तेमाल कर रही हैं तो शुद्ध, परिष्कृत तेल (रिफाइंड आॅयल) शिशु की नाजुक त्वचा के लिए बेहतर होते हैं। रिफाइंड आॅयल में हल्की खुशबू और पतला टेक्सचर होता है, साथ ही यह काफी लंबे समय तक खराब भी नहीं होता। इनमें यीस्ट, फफूंद या कवक के बीजाणुओं जैसी अशुद्धियां होने की संभावना कम होती है।

मिनरल बेबी आॅयल भी एक अच्छा विकल्प हैं। ये पेट्रोलियम से बनाए जाते हैं और लंबे समय से सुरक्षित ढंग से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यदि शिशु अपनी उंगलियों को मुंह में चूस भी ले, तो भी ये नुकसानदेह नहीं है। गर्म, आर्द्र मौसम में इनके खराब होने या सड़ने की संभावना भी बहुत कम होती है।
शिशु की रुखी या संवेदनशील त्वचा की मालिश के कौन से तेल इस्तेमाल करने चाहिए?
शुष्क व संवेदनशील त्वचा के लिए निम्नांकित तेल अच्छे विकल्प माने जाते हैं:

वनस्पती तेल जिनमें पॉलीअनसैचुरेटेड वसा उच्च मात्रा में हो
इन तेलों में लिनोलिएक एसिड नामक तत्व उच्च मात्रा में होता है। लिनोलिएक एसिड एक फैट्टी एसिड होता है जो स्किन बैरियर को बचाने में मदद कर सकता है। यह शिशु की संवेदनशील त्वचा के लिए काफी सौम्य माना जाता है।

जिन वेजिटेबल आॅयल में लिनोलिएक एसिड उच्च मात्रा में होता है, उनमें शामिल हैं:

सूरजमुखी के बीज (सनफ्लावर सीड) का शुद्ध रिफाइंड तेल
अंगूर के बीज से बना तेल (ग्रेपसीड आॅयल)
कुसुम के बीज से बना तेल (सैफ्लावर सीड आॅयल)

सभी वनस्पती तेलों में लिनोलिएक एसिड की उच्च मात्रा नहीं होती। कुछ में ओलिएक एसिड अधिक होता है, जो कि एक मोनोसैचुरेटेट वसा है। लिनोलिएक एसिड से भरपूर वनस्पती तेलों और बेबी मिनरल आॅयल की तुलना में ओलिएक एसिड की उच्च मात्रा वाले वनस्पति तेल शिशु की त्वचा के लिए कठोर रहते हैं।

बहरहाल, वनस्पती तेलों के लेबल पर सामान्यत: ओलिएक या लिनोलिएक एसिड तत्वों के बारे में नहीं लिखा होता। हालांकि, वे पॉलीअनसैचुरेटेड या मोनोअनसैचुरेटेड वसा के अनुपातों के बारे में जरुर बताते हैं। सामान्य नियम के तौर पर:

जिन वनस्पती तेलों में लिनोलिएक एसिड ज्यादा होता है, उनमें पॉलीअनसैचुरेटड वसा भी उच्च होती है।
जिन वनस्पती तेलों में ओलिएक एसिड अधिक होता है, उनमें मोनोअनसैचुरेटेड वसा भी उच्च होती है।

यदि आप तेल के चुनाव को लेकर चिंतित हों, तो उस तेल का इसतेमाल करें जिसमें पॉलीअनसैचुरेटड वसा उच्च मात्रा में हो। बहरहाल, कुछ वनस्पती तेलों में पॉलीअनसैचुरेट और मोनो अनसैचुरेटेड वसा, दोनों होती हैं, इसलिए हमेशा यह चुनाव आसान नहीं होता।

असुगंधित मिनरल आॅयल (बेबी आॅयल)
असुगंधित (परफ्यूम रहित) बेबी मिनरल आॅयल का इस्तेमाल रुखी या संवेदनशील त्वचा के लिए करना अच्छा विकल्प है। अगर आपके शिशु की त्वचा पहले से ही खराब या शुष्क है, तो बेहतर है कि गंध वाले उत्पादों का इस्तेाल न किया जाए।

नारियल तेल
नारियल तेल एक और ऐसा तेल है जो भारत में व्यापक तौर पर उपलब्ध है और इस्तेमाल किया जाता है। कुछ शोध दर्शाते हैं कि यह रुखी त्वचा की नमी और रूप-रंग को बेहतर बना सकता है।

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