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गर्भावस्था में टहलना और ब्रिस्क वॉकिंग
क्या टहलना (ब्रिस्क वॉकिंग) गर्भावस्था में अच्छा व्यायाम है?
टहलना (ब्रिस्क वॉकिंग) गर्भवती माँओं के लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित व्यायाम है। गर्भावस्था में जरुरी व्यायाम करने का यह एक आदर्श तरीका है।

तेज चलना आपके दिल और फेफड़ों के लिए अच्छा है और इससे आपके घुटनों और टखनों पर जोर नहीं पड़ता। यह एक ऐसा व्यायाम है जिसे आप आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकती हैं। इसलिए आप इसे गर्भावस्था के बाद भी जारी रख सकती हैं।

अपने पति या दोस्तों के साथ टहलने जाने से आपको प्रोत्साहन मिलता है और इस तरह आपका समय भी आसानी से कट जाता है। साथ ही, यह आपको ज्यादा देर तक टहलने के लिए प्रेरित करता है।
गर्भावस्था में सैर की तैयारी मैं कैसे करुं?
यदि गर्भवती होने से पहले भी आप नियमित रूप से चहलकदमी करती थीं, तो इसे अब भी जारी रखें। यदि आप पहले वॉक नहीं करती थीं, तो कम अवधि से शुरुआत करें, यानि 15 मिनट की आरामदायक सैर, सप्ताह में तीन बार।

जब आपको नियमित टहलने की आदत हो जाएगी, तो आप थोड़ा और तेज, 30 मिनट तक सैर करना शुरु कर सकती हैं, सप्ताह में चार या इससे ज्यादा बार। यदि आपकी सेहत का स्तर अच्छा हो, तो आप इससे ज्यादा समय के लिए भी सैर कर सकती हैं। सुनिश्चित करें कि आप जब भी थकान, अस्वस्थ या कोई दर्द महसूस करें तो अपनी गति धीमी कर लें या सैर बंद कर दें। सामान्यत: आपका शरीर बता देगा कि उसे कब रुकने की जरुरत है।

यदि आपके पास समय की कमी है, तो सैर को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर लें। थोड़ी दूरी पर जाने के लिए कार की बजाय पैदल चलकर जाएं, आधी दूरी तक बस से जाएं, फिर बाकी रास्ता पैदल तय करें या फिर लंच ब्रेक के दौरान बाहर जाएं और थोड़ा चले-फिरें।

यदि आप धूप में चल रही हों तो सनस्क्रीन लगाएं और अपने चेहरे और सिर को दुपट्टे से ढक लें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपने साथ पानी की बोतल रखें। पानी की कमी से आपके शरीर का तापमान बढ़ सकता है और यह आप और आपके शिशु दोनों के लिए सही नहीं है।

बेहतर है कि आप बाहर सैर करते समय अपने हैडफोन न लगाएं, क्योंकि तेज संगीत से आप अपने आसपास की आवाज नहीं सुन पाएंगी। अपनी सुरक्षा के लिए जरुरी है कि आप अपने आसपास की हलचल से अवगत रहें, खासकर ऐसी जगहों में जहां बेतरतीब ट्रैफिक या आवारा कुत्ते या जानवर हों।
मुझे कितनी देर तक चलना चाहिए?
यदि आप कभी-कभार ही टहलने जाती हैं, तो इससे आपको नियमित व्यायाम के फायदे नहीं मिलेंगे। हर रोज क्रियाशील व सक्रिय रहने की कोशिश करें। मगर, यदि ऐसा करना भी संभव न हो पा रहा हो, तो भी किसी न किसी तरह की चहलकदमी आपको कुछ ना कुछ फायदा तो अवश्य देगी।

मौसम की स्थिति भी आपकी सैर की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। गर्मियों में शायद आप कम दूरी के लिए चलें और ठंडे मौसम में शायद आप लंबी दूरी तय कर सकें।

इन सबके बावजूद, सैर के लिए ऐसा समय चुनें जब बाहर रोशनी हो। जानी-पहचानी जगहों से ज्यादा दूर न जाएं और अपना मोबाइल हमेशा अपने साथ रखें।
गर्भावस्था के चरण के अनुसार टहलने के तरीके कैसे बदलने होंगे?
पहली तिमाही
आपको चहलकदमी की अपनी सामान्य आदतों से ज्यादा अलग कुछ नहीं करना होगा। टहलने के लिए उपयुक्त जूते या कोई अन्य आरामदेह जूते पहनें, ताकि पैरों को जरुरी आधार मिल सके। जब आप सैर कर रही हों, तो जमीन पर समतल पैर रखने की बजाय पहले अपनी एड़ी जमीन पर रखें और उसके बाद पैर के पंजे पर आएं।

यदि बाहर गर्मी और ऊमस का मौसम हो, तो ब्रिस्क वॉक न करें या अपनी गति धीमी रखें। या फिर आप कोई अन्य व्यायाम जैसे कि तैराकी आदि कर सकती हैं। दूसरी तिमाही
अपनी पहली तिमाही की तुलना में शायद अब आप अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगी और सैर करना भी आपको आसान लगेगा। इस दौरान आप शायद और ज्यादा दूर तक चल सकेंगी। बहरहाल, हो सकता है कि अब पेट बढ़ना शुरु होने की वजह से आपकी चाल-ढाल में बदलाव आए और आप अधिक बेडौल महसूस करें।

अपनी पीठ को सीधा, सिर और ठोडी को एक स्तर पर और आंखो का ध्यान सामने की तरफ रखें। यदि आपको सही लगे तो संतुलन बनाए रखने और व्यायाम को और गहन बनाने के लिए अपनी बाजुओं को हिला-डुला भी सकती हैं। सैर करते समय सही मुद्रा में रहने से पीठ पर दबाव नहीं पड़ता।

आप शायद पाएंगी कि आपके चलने का तरीका अब बदल रहा है और आप हल्की सी डगमगाने लगी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपका शरीर होने वाले बदलावों के साथ समायोजित होने का प्रयास कर रहा है। आपके कूल्हे और टखने काफी ज्यादा काम कर रहे हैं, इसलिए अधिक सक्रिय रहने पर इनमें दर्द हो सकता है। अपने शरीर के संकेतों को पहचानें और इतना भी न चलें कि आप थक के चूर हो जाएं।

यदि आपको सैर करते समय बात करने में भी मुश्किल हो रही हो, तो अपनी गति धीमी कर लें या कम अवधि के लिए सैर करें। तीसरी तिमाही
जितनी हो सके उतनी देर तक सैर करें, हालांकि चढ़ाई या ढलान वाले और असमतल रास्तों पर जाने से बचें, क्योंकि इन पर आपका संतुलन बिगड़ सकता है। यदि आपको टहलते वक्त श्रोणी क्षेत्र या कमर में दर्द हो, तो अपनी डॉक्टर से बात करें। वे सलाह दे सकेंगी कि आपको क्या करना चाहिए। यदि जरुरत हुई, तो वे आपको फिजियोथैरेपिस्ट के पास जाने के लिए कह सकती हैं।

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