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गर्भ में शिशु का विकास और पोषण पूरी तरह से मां के आहार पर निर्भर होता है। गर्भवती महिलाएं जो भी खाती हैं, उसका सीधा असर शिशु पर पड़ता है। जन्‍म के समय शिशु का संतुलित वजन होना बहुत जरूरी है क्‍योंकि इससे बच्‍चे के स्‍वस्‍थ होने का पता चलता है।कुछ बच्‍चे गर्भ में ही कमजोर होते हैं और जन्‍म लेने के बाद इन्‍हें आसानी से स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं घेर लेती हैं। प्रेग्‍नेंसी के 32वें हफ्ते में शिशु का वजन 1.81 किलोग्राम के आसपास होता है और आखिरी हफ्ते में 2.5 से 3.5 किलो वजन होना चाहिए।

ऐसे में प्रेगनेंट मां अपने आहार की मदद से गर्भस्‍थ शिशु का वजन बढ़ाने का काम कर सकती है। जी हां, गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में कुछ खास फूड्स को डाइट में शामिल कर शिशु का वजन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

दूध, अंडा, दही और टोफू
इन सभी चीजों में उच्‍च मात्रा में प्रोटीन होता है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान पर्याप्‍त प्रोटीन लेना बहुत जरूरी है। इस समय आप जो भी प्रोटीन लेती हैं, वो सारा बच्‍चे के विकास में लग जाता है।

​फल

कीवी, केला, तरबूज और स्‍ट्रॉबेरी जैसे फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं। इस विटामिन की मदद से शिशु को पोषण प्रदान करने वाला प्‍लेसेंटा ठीक तरह से काम कर पाता है। इसके साथ ही विटामिन सी खाने से मिलने वाले आयरन को भी सोखने में मदद करता है। इससे इम्‍यून सिस्‍टम स्‍वस्‍थ रहता है।

शिशु का वजन बढ़ाने में एवोकाडो भी मदद कर सकता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी और ई भरपूर मात्रा में होता है। यह हेल्‍दी फैट्स का भी अच्‍छा स्रोत है जिससे डिलीवरी के बाद शरीर में गरमाई रहती है।


​दालें और सब्जियां

अगर आपको लग रहा है कि नौवें महीने में भी आपके बच्‍चे का वजन कम है तो आपको बिना कोई देरी किए अपनी डाइट में दालों को शामिल कर लेना चाहिए। दालों से प्रोटीन के साथ-साथ थायमिन और फाइबर मिलता है। आप दाल का सूप और दलिया बनाकर भी ले सकती हैं।

दाल के अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां भी शिशु के विकास और वजन के लिए जरूरी होती हैं। पालक, केल और अन्‍य पत्तेदार सब्जियां, नट्स और साबुत अनाज आपको अपने आहार में शामिल करने चाहिए। इनमें मैग्‍नीशियम होता है जो शिशु की हड्डियों के विकास में मदद करता है और गर्भाशय में समय से पूर्व ऐंठन पैदा होने से रोकता है।

​पानी

प्रेग्‍नेंसी के दौरान आपको शरीर में पानी की कमी होने से रोकना है। आप पानी, वेजिटेबल जूस, फ्रूट जूस, दूध और छाछ पिएं। गर्भावस्‍था में डिहाइड्रेशन की वजह से कई तरह की गंभीर समस्‍याएं पैदा हो सकती हैं जिनमें से एक लो बर्थ वेट भी है।

गर्भवती महिला को रोज पर्याप्‍त आराम करना चाहिए। प्रेग्‍नेंसी में ज्‍यादा काम करने की वजह से गर्भस्‍थ शिशु पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। प्रेगनेंट महिला को रोज कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। जब मां स्‍वस्‍थ रहेगी, तो बच्‍चा भी हेल्‍दी रहेगा।

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