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ब्लड टेस्ट के जरिए भी मानसिक बीमारियों का लगा सकते हैं पता: एक्सपर्ट
हाल की रिसर्च से पता चला है कि डिप्रेशन के कई लक्षण शरीर और मस्तिष्क में निम्न-श्रेणी की सूजन का परिणाम हो सकते हैं. हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hsCRP) सूजन का एक ऐसा मार्कर है जो मानसिक अस्वस्थता से जुड़ा हुआ है
एक अच्छा जीवन जीने के लिए हमारा मानसिक स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य. पूरी दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है. COVID-19 महामारी ने दुनिया भर में चिंता और अवसाद के मामलों में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है. हमारे जीवन में, परिवार में, ऑफिस में और पास-पड़ोस में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग मौजूद हैं. ये समस्याएं सभी को प्रभावित करती हैं. जिनका मानसिक स्वास्थ्य खराब होता है उनकी उम्र भी औसत से करीब 20 साल तक कम हो जाती है. कुछ देशों में उनके गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन, भेदभाव और सोशल स्टिग्मा का शिकार होने की भी ज्यादा संभावना है.
मानसिक विकार के लिए दवाएं प्रिसक्राइब करने से पहले खून की जांच उन कारणों का पता लगाने के लिए की जा सकती है जिसकी वजह से विकार पैदा हुआ, हालांकि डिप्रेशन का पता लगाने के लिए कोई एक निश्चित टेस्ट नहीं होता. इसके अलावा कुछ मेडिकल कंडीशन भी डिप्रेशन के लक्षण पैदा कर सकते हैं या डिप्रेशन का कारण बन हो सकते हैं. ऐसे मामले मिले हैं जिनमें शरीर में सूजन के स्तर और अवसाद (डिप्रेशन) के बीच एक कनेक्शन (संबंध) देखा गया है.
ऐसे कर सकते हैं डिप्रेशन का पता
हाल की रिसर्च से पता चलता है कि डिप्रेशन (अवसाद) सूजन की एक बीमारी है और अवसाद के कई लक्षण शरीर और मस्तिष्क में निम्न-श्रेणी की सूजन का परिणाम हो सकते हैं. हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hsCRP) सूजन का एक ऐसा मार्कर है जो मानसिक अस्वस्थता से जुड़ा हुआ है. रिसर्च से पता चलता है कि हाई लेवल पर होमोसिस्टीन अवसाद (डिप्रेशन) से जुड़ा हुआ है.
विटामिन डी एक मिनरल है जो त्वचा के सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से निर्मित होता है, जिसके स्तर में कमी भी अवसाद से जुड़ी है. हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड का निम्न स्तर) का भी अवसाद के साथ संबंध है.
विटामिन बी 12 एक विटामिन है जो केवल मांसाहारी खाने में मौजूद होता है, जिसकी कमी डिप्रेशन में योगदान देती है. इसकी कमी को दूर करके मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जा सकते हैं.
टेस्टोस्टेरोन का लो लेवल अवसाद का कारण बन सकता है
एस्ट्राडियोल, एस्ट्रोजन और प्राइमरी फीमेल सेक्स हार्मोन, जो महिला प्रजनन प्रणाली के विकास के लिए जिम्मेदार हैं, महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसी तरह टेस्टोस्टेरोन का लो लेवल (कम स्तर) पुरुषों में अवसाद के लक्षण पैदा कर सकता है.
मैग्नीशियम एक जरूरी मिनरल है जो हमारे मूड पर काफी प्रभाव डाल सकता है और रिसर्च से पता चला है कि मैग्नीशियम का लो लेवल (कम स्तर) डिप्रेशन (अवसाद) सहित कई न्यूरोसाइकाइट्रिक समस्याओं पैदा करने में योगदान देता है.
जिंक मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक मिनरल है, क्योंकि यह मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र के कार्य और न्यूरोट्रांसमिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसकी कमी अवसाद के लक्षणों में योगदान कर सकती है. सीलिएक डिजीज (बीमारी) एक जानी-मानी स्थिति है और सीलिएक बीमारी से पीड़ित लोगों में डिप्रेसिव डिसऑर्डर (अवसादग्रस्तता विकार), डायस्टीमिक डिसऑर्डर और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर आम तौर पर पाए गए हैं.
इसके अलावा, शराब और नशीली दवाओं की लत मानसिक बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकती है और शराब के सेवन का एक मार्कर GGT और अन्य परीक्षण इस संभावना को खारिज करने के लिए किए जा सकते हैं. किसी की मेडिकल स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाना चाहिए जिससे उन कारणों का पता लगाया जा सके जो मानसिक अस्वस्थता का कारण हो सकते हैं या उसमें योगदान दे सकते हैं.
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