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34 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
इस सप्ताह तक आपका शिशु एक मध्यम आकार के खरबूजे जितना हो गया है। उसका वजन भी अब 2.1 किलोग्राम से थोड़ा ज्यादा है। उसकी लंबाई सिर से एड़ी तक करीब 45 सें.मी. (17.7 इंच) हो गई है। आपके लिए यह एक राहत की बात हो सकती है कि 34 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मे शिशु गर्भ के बाहर जीवित रहने और फलने-फूलने में सक्षम होते हैं, बशर्ते उन्हें कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या न हो।

आपके शिशु के शरीर पर चर्बी चढ़ना जारी है। चर्बी की ये परतें जन्म के बाद उसे शरीर का तापमान नियंत्रित करने में मदद करेंगी। हालांकि, फिर भी आपको यह सुनिश्चित करने की जरुरत होगी कि शिशु को ज्यादा गर्मी या सर्दी न लगे।

आपका शिशु पहले से ही आपकी आवाज पहचानता है, मगर अब शायद उसके लिए लोरियों और गानों को भी पहचाना संभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके कान का जो हिस्सा मस्तिष्क तक संदेश भेजता है (कॉक्लीया), वह अब अधिक परिपक्व होता जा रहा है।

शोध दर्शाती है कि यदि आप गर्भस्थ शिशु को गाना गाकर सुनाती हैं, तो जन्म के बाद भी वह गाना सुनकर शिशु के शांत होने की पूरी संभावना होती है। यह अपने शिशु के साथ प्यार भरा बंधन बनाने का भी अच्छा तरीका है। गर्भ संस्कार संगीत सुनने का यह अच्छा समय है।

नोट:विशेषज्ञों का कहना है कि हर शिशु अलग ढंग से विकसित होता है- गर्भाशय में भी। ये भ्रूण विकास की जानकारी आपको इस बात का सामान्य अंदाजा देती है कि गर्भ में शिशु किस तरह बढ़ रहा है।
गर्भावस्था के 34वें सप्ताह में शारीरिक परिवर्तन

हो सकता है आपको अब फिर से अपचता (इनडाइजेशन) होने लगी हो, क्योंकि गर्भस्थ शिशु आपके पेट में ऊपर की तरफ दबाव डाल रहा है।
थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करती रहें और कोशिश करें कि भोजन के तुरंत बाद लेटे नहीं। रात को खाना खाने के बाद अच्छी नींद लेना शायद आपको बेहतर लगे, मगर खाना खाने के बाद जल्दी ही सो जाने से आपको पेट में फुलावट और असहजता हो सकती है।

जैसे-जैसे आपकी गर्भावस्था बढ़ती है, हो सकता है आप पाएं कि आपको बहुत आसानी से थकान हो जाती है। आपका बढ़ता पेट आपकी पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालेगा और आपको बैठी या लेटी हुई अवस्था से उठने में अधिक मुश्किल हो सकती है। अपनी पीठ और श्रोणि क्षेत्र का बचाव करने और दर्दभरी मांसपेशियों से राहत के सुझावों के लिए हमारा यह स्लाइडशो देखें।
34 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
संतुलित व सेहतमंद आहार के सेवन से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि आप और आपके गर्भस्थ शिशु को सभी जरुरी पोषक तत्व मिल सकें। अधिकांश डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्भवती महिला को तीसरी तिमाही में करीब 300 अतिरिक्त कैलोरी प्रति दिन की जरुरत होती है। इससे शिशु का वजन बढ़ने में मदद मिलती है, जो उसके जन्म के बाद स्वस्थ रहने के लिए जरुरी है। गर्भावस्था में स्वस्थ आहार के सेवन के बारे में खुद को फिर से याद दिलाएं।

प्रसव कब शुरु होगा इसकी अनिश्चितता और प्रसव पीड़ा के दर्द के डर से आपको ऐच्छिक सीजेरियन आॅपरेशन करवाने का विकल्प ज्यादा बेहतर लग सकता है। यदि ऐसा है, तो आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि सीजेरियन आॅपरेशन करवाने का मतलब यह नहीं है कि आपको बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा। आपको आॅपरेशन के बाद की असहजता और दर्द को सहना होगा, और उसी समय आपको अपने नवजात शिशु पर भी ध्यान देने की जरुरत होगी। सीजेरियन आॅपरेशन के अपने कुछ फायदे और नुकसान हैं, इनके बारे में आप हमारे इस लेख में पढ़ सकती हैं। प्रसव पीड़ा से बचने के लिए और भी बहुत से विकल्प आप अपना सकती हैं।

प्रसव के बाद, बहुत सी माँएं प्रसवोत्तर अवसाद से गुजरती हैं, जिसे अंग्रेजी में आमतौर पर बेबी ब्लूज कहा जाता है। इसकी वजह से आप रुआंसी, शिशु के प्रति अत्याधिक सुरक्षात्मक या फिर चिंतित महसूस कर सकती हैं। यदि आपको पहले से प्रसवोत्तर अवसाद के बारे में पता हो तो आपको इसके लक्षण पहचानने में मदद मिल सकती है। आप इस भावनात्मक उतार-चढ़ाव के दौर का सामना कर पाएंगी, क्योंकि आपको पता होगा कि यह केवल एक चरण है जो जल्द ही समाप्त हो जाएगा।

गर्भावस्था के 34वें हफ्ते में क्या करें

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