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सफेद दाग एक अलग रोग है और कुष्ठ रोग अलग।

एकमात्र समानता ये कही जा सकती है कि सफेद दाग सिर्फ त्वचा का रोग है इसमें त्वचा का रंग सफेद हो जाता है जबकि कुष्ठ रोग में भी त्वचा का रंग कुछ हल्का पड़ सकता है। कुष्ठ रोग शरीर के अन्य अंगों में भी रोग उत्पन्न करता है।


कुष्ठ रोग की पहचान- कमजोर मांसपेशियां, त्वचा पर दानेदार उभार, उंगलियों के पोरों का सुन्न होना और त्वचा पर घाव लेप्रोसी के प्रमुख लक्षण हैं। इस रोग से संक्रमित व्यक्ति के जख्म आसानी से नहीं ठीक होते हैं।

कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के लक्षण क्या हैं-

20 साल तक लक्षण दिखाई नहीं दे सकते हैं। रोग के लक्षणों और टेल्टेल संकेतों की खोज के लिए डॉक्टर एक शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। लेप्रोसी के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

त्वचा क्षति
मांसपेशियों की कमजोरी
हाथ, पैर, हाथ और पैर का सुन्न होना।
इस रोग के दौरान मुख्य रूप से त्वचा और नसों पर हमला होता है और त्वचा विकृत हो जाती है क्योंकि त्वचा पर कई गांठ, घाव और बम्प्स होते हैं।
लेकिन अगर व्यक्ति लेप्रोसी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाता है, तो लक्षण 3-4 साल बाद दिखाई देते है क्योंकि यह एक प्रगतिशील बीमारी है और बैक्टीरिया की ऊष्मायन अवधि भी बहुत लंबी होती है
हालांकि त्वचा मुख्य अंग है जो क्षतिग्रस्त है लेप्रोसी शरीर के तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचाता है जिसमें संवेदी तंत्रिकाएं, आंखों की नसें, मोटर तंत्रिकाएं और स्वायत्त तंत्रिकाएं शामिल हैं।


सफेद दाग या विटिलिगो के शुरुआती लक्षण

सफेद दाग के शुरुआती लक्षणों में है स्किन का रंग जगह- जगह फीका पड़ जाना या सफेद पड़ना.
इसकी शुरुआत सबसे पहले होती है हाथ, पैर, चेहरा, होंठ. यह ऐसी जगह है जहां डायरेक्ट सूरज की रोशनी पड़ती है.
बाल का रूखा होना, दाढ़ी और आईब्रो का रंग उड़ जाना या सफेद हो जाना.
आंख के रेटिना की परत का रंग फीका पड़ जाना.
मेडिकल साइंस की भाषा में बोले तो यह बताना मुश्किल है कि सफेद दाग का रोग एक बार हो जाने के बाद कितना बढ़ सकता है. कई बार सही इलाज से नई दाग बनने बंद हो जाते हैं. ज्यादातर मामलों में सफेद दाग धीरे- धीरे बढ़ने लगते हैं और शरीर के सभी हिस्सों में फैल जाते हैं.

सफेद दाग होने के बाद शरीर में दिखते हैं ये बदलाव-

सोशल और साइकोलॉजिकल प्रेशर

भारतीय समाज में सफेद दाग की बीमारी को छुआछूत से जोड़कर देखा जाता है. जिसकी वजह से इसके मरीज है उन पर एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

स्किन कैंसर
इस बीमारी की वजह से सनबर्न और स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

आंख संबंधी बीमारियां
सफेद दाग शरीर पर कई तरह के प्रभाव डालता है. जैसे- आंखों में दिक्कतें शुरू होना. आइरिस में जलन के साथ-साथ सूजन.

बहरापन
सुनने की क्षमता में कमी आना.

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