healthplanet.net

Posted on

इससे मरीज के ब्लड में मौजूद रोगाणुओं जैसे बैक्टीरिया या फंगस आदि के प्रकार का पता लगाना आसान हो जाता है. इसके बाद सेंसिटिविटी टेस्टिंग की जाती है जिससे पता चलता है कि संबंधित रोगाणु पर कौन सी एंटीबायोटिक असर करेगी और कौन सी नहीं. इससे डॉक्टर को उचित दवा चुनने में मदद मिलती है और मरीज का इलाज आसान हो जाता है.

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info