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Yoga for Osteoporosis : 7 योगासन, जो ऑस्टियोपोरोसिस से दिलवा सकते हैं राहत :-

ऑस्टियोपोरोसिस के लिए योग (Yoga For Osteoporosis) :-

1. उत्तानासन (Uttanasana)
उत्तानासन के लाभ (Amazing benefits of Uttanasana) :

उत्तानासन हड्डियों में खिंचाव पैदा करके उन्हें मजबूत बनाने में मदद करता है। ये आसन रीढ़ की निचली हड्डियों, पैरों और हिप्स की हड्डी को मजबूत बनाता है। इस आसन से शरीर के हर हिस्से में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और संतुलन बढ़ाने में मदद मिलती है। उत्तानासन शरीर के प्रजनन तंत्र और हार्मोन असंतुलन को भी ठीक करता है। शुरुआत में इस आसन के अभ्यास में समस्या हो सकती है। इसलिए इसका अभ्यास धीरे-धीरे ही बढ़ाएं।

2. वीरभद्रासन - 2 (Virabhadrasana II)
वीरभद्रासन के लाभ (virabhadrasana ii benefits) :

वीरभद्रासन बहुत कमाल का आसन है क्योंकि ये एक साथ आपकी बांहों, रीढ़ और पैरों पर काम करता है। ये मांसपेशियों के साथ ही हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। ये आसन शरीर में संतुलन सुधारने में भी मदद करता है। ये शरीर में रक्त संचार बढ़ाने और हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है।

3. अर्ध चंद्रासन (Ardha Chandrasana)
अर्ध चंद्रासन के लाभ (Ardha Chandrasana benefits) :

अर्ध चंद्रासन शरीर का संतुलन बढ़ाने वाला आसन है। ये आसन शरीर की कमजोर हड्डियों में संतुलन बढ़ाने की क्षमता को भी सुधारने में मदद करता है। अर्ध चंद्रासन के अभ्यास से पैरों, रीढ़ और हाथों की हड्डियां भी मजबूत होती हैं। यह आसन रक्त संचार में सुधार लाकर पोषक पदार्थों के पोषण की क्षमता बढ़ाता है।

4. उत्थित पार्श्वकोणासन (Utthita Parsvakonasana)
उत्थित पार्श्वकोणासन के लाभ (Utthita Parsvakonasana benefits): पार्श्वकोणासन

उत्थित पार्श्वकोणासन पैरों में खिंचाव लाकर उन्हें मजबूत बनाता है। ये आसन हाथों और कमर पर भी काम करता है। ये आसन हमारे पेट के भीतरी अंगों और प्रजनन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। ये आसन शरीर में हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। ये आसन रक्त संचार बढ़ाता है जिससे हड्डियों में विटामिन डी और कैल्शियम का अवशोषण बढ़ता है।

5. अर्ध पिंछ मयूरासन (Ardha Pincha Mayurasana)
अर्ध पिंछ मयूरासन के लाभ (Ardha Pincha Mayurasana benefits):

अर्ध पिंछ मयूरासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में गजब का काम करता है। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी पर पूरी लंबाई में एक साथ खिंचाव आता है। इससे रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला कोई भी स्ट्रेस आसानी से दूर हो जाता है। इससे हड्डियों और जांघ की मांसपेशियों को भी अच्छा खिंचाव मिलता है और टांगें मजबूत हो जाती हैं। अर्ध पिंछ मयूरासन के अभ्यास से रक्त संचार सुधरता है और हार्मोन असंतुलन ठीक करने में मदद मिलती है।

6. सेतु बंधासन (Setu Bandhasana)
सेतु बंधासन के लाभ (Setu Bandhasana benefits) :

ये आसन मूल रूप से रक्त संचार बढ़ाने और पीठ को मजबूत बनाने पर काम करता है। सेतु बंधासन रीढ़ की हड्डी के साथ ही पसलियों के तनाव को भी कम करने में मदद करता है।

7. ऊर्ध्व धनुरासन (Urdhva Dhanurasana)
ऊर्ध्व धनुरासन के लाभ (Urdhva Dhanurasana benefits) :

ऊर्ध्व धनुरासन को योग की एडवांस लेवल मुद्रा माना जाता है। इसीलिए इस आसन का अभ्यास तभी करें जब आपको योग करते हुए कम से कम 3 महीने का वक्त हो चुका हो। इसके अलावा शुरुआत में बिना योग शिक्षक के इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

ये आसन शरीर में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाता है और रक्त संचार सुधारकर पोषक तत्वों के पोषण को सुधारने में मदद करता है। इस आसन के अभ्यास से हाथ और पैरों की हड्डियां मजबूत होती हैं। ये आसन पेट के भीतरी अंगों को भी अच्छी मसाज देता है। इस आसन के अभ्यास से हार्मोन असंतुलन को भी सुधारने में मदद मिलती है।

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