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प्रातः काल स्नान करना बहुत अच्छी आदत है। प्रातः काल नहाने से हमारे शरीर की सुस्ती दूर हो जाती है और हम ताजा महसूस करते हैं। अगर हम प्रातः काल स्नान नहीं करते हैं तो हमारा किसी भी काम में मन नहीं लगता है और हम एक्टिव महसूस नहीं करते हैं।

हमारे शास्त्रों में भी प्रातः काल स्नान करने का वर्णन है। जो लोग दिन में नहाते हैं या सूर्य उदय होने के बाद नहाते हैं वे लोग अपने आपको अनेकों बीमारियों में जकड़ लेते हैं। परंतु बात आती है कि क्या हमें प्रातः उठते ही एकदम से नहा लेना चाहिए।

ऐसा करना भी गलत है।कुछ लोगों की आदत होती है कि वे जैसे ही बिस्तर से उठते हैं तुरंत बाथरूम में जाकर स्नान करने लग जाते हैं।ऐसा करने से भी हम अपने आप को रोगी बना रहे होते हैं।क्योंकि जब हम सुबह उठते हैं तो हमारे शरीर का तापमान बढ़ा हुआ होता है और जब हम स्नान करते हैं तब हमारे शरीर का तापमान एकदम से कम हो जाता है और हमारे शरीर के अंगों में भी शिथिलता आ जाती है।

इसलिए अगर हम तुरंत स्नान कर लेते हैं तो हमारे शरीर का तापमान एकदम से कम हो जाता है। इसलिए प्रातःकाल सो कर उठने के कुछ देर बाद ही हमें स्नान करना चाहिए ताकि हमारा शरीर नॉर्मल हो जाए और हम अपने आप को तंदुरुस्त महसूस कर सकें।

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