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नवजात बच्चों में दो से ज्यादा बार की उल्टी के बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि बच्चे को उल्टी के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, गर्दन में अकड़न है और सिर चकरा रहा है तो तत्काल इलाज की जरूरत है। इसी तरह उल्टी के साथ खून या बिना पचा भोजन निकले तो भी डॉक्टर से सम्पर्क कर लेना ठीक रहता है
अगर आपके बच्‍चे को लगातार उल्‍टी हो रही है तो इसकी वजह से उसके शरीर में पानी की कमी और थकान हो सकती है। शरीर में तरल पदार्थों की हो रही कमी को दूर करने के लिए बच्‍चे को तरल पदार्थ पिलाती रहें। उसे धीरे-धीरे पानी पिलाएं।

अगर आप ज्‍यादा मात्रा में पानी या कोई अन्‍य तरल पिलाएंगी तो बच्‍चे को और ज्‍यादा उल्‍टी होगी। उल्‍टी खत्‍म होने के कम से कम 12 घंटे बाद ही शिशु को कोई ठोस आहार दें। तब तक आप उसे वेजिटेबल सूप दे सकती हैं।
जी मतली और उल्‍टी रोकने के लिए अदरक बेहतरीन उपाय है। अदरक का एक टुकड़ा लेकर उसे घिस लें और फिर उसे निचोड़ कर उसका रस निकाल लें। अब इस रस में कुछ बूंदें शहद की डालें और बच्‍चे को दिन में दो या तीन बार इसे चटाएं।
बच्‍चों में उल्‍टी रोकने का सबसे असरकारी उपाय है इलायची। आधी चम्‍मच इलायची के बीजों को पीस लें और इसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर बच्‍चों को दें। इससे शिशु की उल्‍टी रुक जाएगा।
एप्‍पल साइडर विनेगर में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो मतली और उल्‍टी को रोकने में मददगार होते हैं। एप्‍पल साइडर विनेगर पेट को आराम देकर शरीर की सफाई करता है। एक चम्‍मच एप्‍पल साइडर विनेगर और एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी में मिलाकर बच्‍चे को दिनभर में घूंट-घूंट करके पिलाएं।

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