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संक्रामक बीमारियाँ -

एचआईवी/एड्स-
ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी हमारे बॉडी के इम्यून सिस्टम के विफलता के कारण होती है. इससे इंसान को हर छोटी-बड़ी बीमारी प्रभावित करने लगती है. अगर इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया जाए तो एचआईवी इन्फेक्शन एड्स में तब्दील हो सकता है. इम्यून सिस्टम में कमजोरी के कारण बॉडी को कई इन्फेक्शन और बीमारियां होने का खतरा होता है. एचआईवी बॉडी में ब्लड, स्पर्म और यौनिक द्रव्य और ब्रैस्ट मिल्क के माध्यम से फैलता है.

डेंगू-
डेंगू फैलने का मुख्य कारण वायरस होता है. यह वायरस मच्छरों में पाए जाते है. किसी भी व्यक्ति को डेंगू तभी हो सकता है, जब उसका संपर्क डेंगू वायरस से होता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार और जोड़ों में दर्द का अनुभव किया जाता है. इसके साथ ही डेंगू के कारण होने वाले बुखार का अगर इलाज नहीं किया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है.

मलेरिया-
मलेरिया एक घातक बीमारी है. यह बीमारी बैक्टीरिया के माध्यम से फैलता है. इस मच्छर का वायरस पारासाइट के लिए एनोफेलस मच्छर संचार का काम करता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार और ठंड लगना शामिल हैं. इसके साथ ही इसमें रेड ब्लड सेल्स काउंट कम होती जाती है. यह ट्रॉपिकल इलाकों में अधिक देखी जाती है.

कोलरा-
यह छोटी इंटेस्टाइन में होने वाली बीमारी है. यह रोग दूषित पानी के कारण होती है. जब आप दूषित पानी पीते है तो इसके कारण उल्टी, डायरिया और गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है. एक अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में इस बीमारी से हर साल 30 से 50 लाख लोग इसके चपेट में आ सकते हैं और लगभग एक लाख लोगों की की जान जाती है. इसके उपचार में ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी और एंटीबैक्टीरियल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है.

इबोला वायरस डिजीज-
इबोला फीवर यह संक्रमित और घातक बीमारी है. इसमें फीवर और इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है. यह बीमारी बॉडी के संक्रमित तरल पदार्थों से संपर्क के कारण होता है. इस बीमारी के चपेट में आने से लगभग 90 फीसदी मामलों में मृत्यु का जोखिम होता है. आमतौर पर, यह बीमारी अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में देखने को मिलती है. दुर्भाग्य से इस बीमारी का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है.

मर्स-
मिडिल ईस्ट रेस्प‍िरेटरी सिंड्रोम एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है. यह बीमारी स्तनधारियों में सांस संबंधी समस्या पैदा करती है. इस बीमारी का पता तब चला जब एक व्यक्ति की सॉर्स जैसी बीमारी के कारण मौत हो गई. मर्स में निमोनिया और किडनी फैल्योर जैसे प्राणघातक असर हो सकते हैं. इस बीमारी के 60
फीसदी मरीज जान गवां देते हैं. मर्स अब तक सामने आए अन्य कोरोनवायरस से ज्यादा खतरनाक है.

सॉर्स-
सवेयर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी सॉर्स सांस से संबंधित बीमारी है. यह सॉर्स कोरोनावायरस से फैलती है. यह सामान्य निमोनिया से लेकर गंभीर रूप ले सकती है. इसकी उत्पत्ति चीन से वर्ष 2002 में शुरू हुआ और वहां से हॉन्गकॉन्ग में फैल गया. इसके बाद 2003 तक यह 37 देशों में फैल चुका था.

स्वाइन फ्लू-
स्वाइन फ्लू एक प्रकार का इंफ्लूएंजा है जो सुअरों को प्रभावित करता है. वर्ष 2009 में पहली बार एच1एन1 वायरस का नाम सामने आया था. इस बीमारी को सुअरों से इंसानों में फैलना सामान्य तौर पर नहीं लिया गया. हालाँकि निरंतर सुअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों में इस बीमारी से संक्रमित होने का जोखिम बहुत अधिक रहा. 2010 में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने आधि‍कारिक तौर पर इस बीमारी के खत्म होने की घोषणा कर दी है.

बर्ड फ्लू-
बर्ड फ्लू एक रोग है, जो पक्ष‍ियों को प्रभावित करता है, विशेष तौर पर पॉल्ट्री फॉर्म में रहने वाली मुर्गियों को ज्यादा प्रभावित करती है. यह एक घातक बीमारी है जो इंसानों को भी हो सकता है. एच5एन1 वायरस एशिया में 2003 में फैलना शुरू हुआ जिसके बाद से यह बीमारी 2006 में यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका में फैली.

मेड काऊ डिजीज-
बोविन स्पोनगिफॉर्म एन्सेफालॉपैथी को मेड काउ डिजीज भी कहा जाता है. यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में स्पॉन्जी अध:पतन के कारण होता है. यह एक बहुत ही जानलेवा बीमारी है. केवल यूके में इस बीमारी ने 1 लाख 80 हजार से ज्यादा जानवर संक्रमित हुए. इस बीमारी के कारण 44 लाख जानवर को मरना पड़ा है. यह बीमारी आसानी से मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकती है. यदि कोई मनुष्य संक्रमित भोजन का सेवन कर ले, तो उसमें में इसके जीवाणु प्रवेश कर सकते हैं.

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