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गर्भपात (गर्भ गिरने) होने के कारण
कभी-कभी गर्भपात, गर्भाशय (Uterus) की कमजोरी के कारण भी होता है। जिसे गर्भाशय ग्रीवा की क्षमता में कमी (Cervical Incompetence) कहा जाता है। जिसकी वजह से भ्रूण गर्भ में नहीं रुक पाता है। 80 प्रतिशत गर्भपात 0-13 सप्ताह में हो जाता है। अगर अनुवांशिक अनियमितता है तो गर्भपात 0-13 सप्ताह के बीच में हो जाता है। 0-6 सप्ताह में ज्यादा खतरा होता है। इन दिनों में गर्भपात होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है जिसमें महिलाओं को पता नहीं चलता है कि वो प्रेग्नेंट है या मासिक धर्म की अनियमितता है। सर्विकल अपर्याप्तता की वजह से गर्भपात दूसरी तिमाही में हो जाता है।
इसके अलावा कुछ अन्य कारण ये हैंः-
संक्रमण (Infection)
हार्मोन की समस्याएं जैसे प्रोजेस्ट्रान की कमी या एस्ट्रोजन की अधिकता
ब्लड शुगर और थायरायड जैसी बीमारियां
अब सवाल ये आता है आखिर बार-बार गर्भपात क्यों होता है। महिलाओं का इम्यून सिस्टम का कम होना गर्भपात होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इम्यून सिस्टम कम होने की वजह से गर्भवती महिलाएं संक्रमण रोग (Infecious disease) का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण गर्भपात हो सकता है।
हार्मोन्स-महिलाओं में कुछ हार्मोन्स जैसे; प्रोजेस्ट्रान, एस्ट्रोजन हार्मोन्स पाये जाते हैं जो गर्भ की रक्षा करते हैं। अगर गर्भिणी महिलाओं में ये हार्मोन्स असमान या असंतुलित हो जायें तो गर्भपात होने की आशंका बढ़ जाती है।
अधिक उम्र-महिलाओं की अधिक उम्र होने पर भी गर्भपात का जोखिम हो सकता है क्योंकि अंडाणु की खराब गुणक्ता का होना मुख्य कारण होता है। कभी-कभी माता-पिता के जीन (Genes) में अनियमितता हो जाती है। जिसके कारण गर्भाशय में बच्चा अधिक गंभीर हो जाता है और गर्भपात हो जाता है।
ब्लड-ग्रुप– अगर गर्भवती महिला का ब्लड ग्रुप आर.एच निगेटिव (Rh(-)) है और बच्चे का ब्लड ग्रुप आर.एच पोजिटिव (Rh(+)) है तो गर्भपात की समस्या आ सकती है क्योंकि बच्चे की रक्त कोशिका (Blood Cells) माँ के खून से नहीं मिल पाती है जिसके कारण गर्भपात होने की आशंका बढ़ जाती है। कुछ महिलाएं गर्भावस्था में खून की कमी का शिकार हो जाती हैं जिसकी वजह से गर्भपात हो जाता है।
इनके अलावा ये भी कारण होते हैं-
ज्यादा एंटीबायोटिक (Antibiotics) लेना
धूम्रपान
ज्यादा मात्रा में कैफीन युक्त पदार्थ लेना
एल्कोहल पीना आदि।
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