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आप जानते हैं कि आपका छोटा-सा शैतान बच्चा हमेशा वैसा ही नहीं होगा और जल्द ही बच्चे से वह नौजवान मर्द बनने की तरफ कदम बढ़ायेगा। जैसा कहा जाता है कि माता-पिता के दिन लम्बे होते हैं लेकिन साल कम होते हैं। बच्चों को बड़े होने में देर नहीं लगती, इससे पहले कि आपको अंदाज़ा हो, आपका बेटा जवान होने लगेगा और हां, यह आपके लिए माता-पिता के रूप में एक पूरी नई दुनिया की तरह महसूस होगा। ज्यादातर लड़के 9 साल की उम्र में यौवन या प्यूबर्टी (puberty) में कदम रखते हैं और 14 साल तक चलता है जबकि लड़कियां 8 साल की उम्र में बड़ी होने लगती हैं। हालांकि, हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है और उनका विकास विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि आनुवंशिकी या जेनेटिक्स (genetics), पारिवारिक गुण और स्वस्थ पोषण।
1. वजन और ऊंचाई में परिवर्तन: ये दोनों विकास और बढ़ने के स्पष्ट संकेत हैं। यौवन की शुरुआत में एक लड़के के शरीर में तेज़ी से वृद्धि दिखाई देती है, उसका वजन बढ़ने लगता है और उसकी लम्बाई बढ़ने लगती है। शरीर के आदर्श वजन और ऊंचाई तक पहुंचने तक उसका विकास होता रहेगा। एक लड़के का वजन कितना होगा और वह उसकी लंबाई कितनी बढ़ेगी यह उसकी आनुवांशिक बढ़त और वंशानुगत कारकों पर निर्भर करता है। उनमें से कुछ को इस दौरान अपनी बाहों और पैरों में दर्द या ग्रोइंग पेन (growing pains) महसूस करना पड़ता है। यह काफी सामान्य है और ऐसा ज़्यादातर बच्चों को होता है, क्योंकि इस दौरान हड्डियां मांसपेशियों की तुलना में तेज़ी से बढ़ती हैं।
2. प्यूबिक हेयर का विकास: यह यौवन का एक महत्वपूर्ण संकेत है। लड़के के प्रायवेट पार्ट्स में बाल या प्यूबिक हेयर बढ़ने लगते हैं। यह विकास 4 या उससे अधिक वर्षों तक जारी रहता है, जब तक यह जांघों के भीतर के हिस्सों तक फैल नहीं जाता है। बगल या आर्मपिट्स के बाल भी इसी समय बढ़ने लगते हैं।
3. जननांगों में परिवर्तन: प्यूबिक बालों के साथ, प्राइवेट पार्ट्स या जननांगों में परिवर्तन भी होने लगता है। पेनिस (penis) और टेस्टिकल (testicles) का आकार बढ़ने लगता है और अंडकोश या स्क्रोटम (scrotum) का रंग गहरा हो जाता है। यौवन की शुरुआत में स्क्रोटम 4 मिमी तक बढ़ता है, और जब एक लड़का यौन परिपक्वता या सेक्चुअल मैच्योरिटी तक पहुंचता है (15 से 18 की उम्र) तो यह 25 मिमी तक बढ़ जाती है।
4. पिम्पल: यौवन के दौरान लड़कों में मुहांसे या पिम्पल भी बहुत आम है। हार्मोनल उथल-पुथल और वसामय ग्रंथियों से तेल के अधिक स्राव के कारण मुहांसें होते हैं। वे ब्लैकहैड्स, व्हाइटहेड्स या यहां तक कि पस (मवाद) से भरे दानों के रूप में भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, जब एक लड़का यौन परिपक्वता प्राप्त करने के बाद पुरुष बन जाता है तो ये समस्याएं खुद-ब-खुद ठीक हो जाती हैं।
5. ब्रेस्ट में परिवर्तन: जी हां, निप्पल के नीचे वसा के जमा होने के कारण, लड़कों के ब्रेस्ट में भी परिवर्तन होने लगते हैं। हालांकि, सभी लड़कों को ऐसा अनुभव नहीं होता है। हालांकि, यह आमतौर पर मोटापे से ग्रस्त बच्चों में एक अस्थायी परिवर्तन है लेकिन जैसे बच्चे बढ़ते हैं और अपनी आनुपातिक शरीर संरचना प्राप्त कर लेते हैं, तो यह कुछ समय बाद ठीक हो जाता है। लेकिन यह मैन बूब्स (man boobs) जैसे नहीं होते।
6. शारीरिक गंध: कुछ लड़कों को बहुत अधिक पसीना आता हैं और इससे शरीर से ख़राब गंध आने लगती है। नियमित रूप से नहाने और अच्छी साफ-सफाई इस समस्या से राहत पाने के लिए मदद करेगा।
7. आवाज़ में परिवर्तन: यह भी विकास के इस चरण की एक विशेषता है। बच्चों की सामान्य आवाज़ एक गहरी, मोटी आवाज़ में बदल जाती है। विकास की इस अवधि के दौरान एक लड़के की आवाज़ गहरे स्वर में विकसित होती है।
8. चेहरे के बाल: यह यौवन की शुरुआत में नहीं होता है। लेकिन प्यूबिक हेयर के विकास के 4 साल बाद ये बाल अपनी उपस्थिति दिखना शुरू हो जाता है। यह एक ऐसा समय है जब लड़कों की दाढ़ी बढ़ने लगती है तो उन्हें स्टाईलिंग और शेविंग से जुड़े तरीके सिखाने चाहिए।
9. गीले सपने: यह कुछ के लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकता है, लेकिन यह विकास का एक प्राकृतिक चरण है। गीले सपने या वेट ड्रीम्स (Wet dreams) अक्सर नींद में इरेक्शन के बाद इजैक्यूलेशन (ejaculation) के एक अनुभव को संदर्भित करते हैं। यह बिस्तर गीला करने से अलग है, हालांकि इससे आपके बिस्तर पर दाग ज़रूर हो सकता है। इन घटनाओं को नाक्टर्नल एमिशन(nocturnal emissions) भी कहा जाता है।
10. इरेक्शन: लड़कों को यौवन की शुरुआत से ही इरेक्शन (erections) महसूस होने लगते हैं और यह दिन के दौरान किसी भी समय हो सकता है। यह तब होता है जब रक्त पेनिस तक पहुंचने लगता है और उसे बड़ा और कठोर बना देता है। एक प्री-टिन लड़के को दिन में कई बार इरेक्शन हो सकता है और यह काफी सामान्य है। हालांकि, अगर किसी लड़के को इरेक्शन का अनुभव नहीं होता है, तो यह चिंता करने वाली बात नहीं है। इस समय कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे- आयु, यौन परिपक्वता, पोषण, शारीरिक गतिविधियां, बचपन का तनाव, डिप्रेशन और नींद।
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