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बालश्रमसे बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सर्वांगीण विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके प्रति जन जागरूकता एवं संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 12 जून को बालश्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। किसी भी खदान या फैक्ट्री में 14 साल से कम आयु के बच्चे को नियोजित नहीं किया जा सकता। राज्य द्वारा 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाएगी। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 द्वारा लागू किया गया है।
खानों ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटक संबंधी खतरनाक प्रकृति के कायों में 14 से 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को नियोजित नहीं किया जा सकता। खतरनाक प्रकृति के कार्याें का विवरण इस अधिनियम में दिया है। वर्ष 2016 में संशोधन द्वारा उक्त अपराध के लिए सजा बढ़ा दी है। सरकार द्वारा घरेलू क्षेत्र एवं सड़क के किनारे कार्यरत होटल, रेस्टोरेन्ट आदि में कार्य करने वाले बच्चों को भी इस अधिनियम में शामिल किया है। यांत्रिक प्रकृति के कुछ नए कार्यों को इस अधिनियम में जोड़ा है। इस अधिनियम में विद्यालय समय के पश्चात या अवकाश के दिन परिवार के कार्य में मदद करने को छूट प्रदान की है। खान अधिनियम 1952 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बालक को किसी खदान में मजदूरी कराने पर रोक लगाता है। आईपीसी की धारा 367, 368, 370 के अन्तर्गत बच्चों का भीख मांगने के लिए अपहरण दंडनीय अपराध है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के अनुसार गठित बाल आयोग भी बच्चों के हितों की रक्षा के लिये कार्य करता है। राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना 2011 के अनुसार बाल तस्करी से मुक्त कराए बच्चों को पुनर्वास एवं प्रतिकर के लिए 25 हजार रुपए तक की राशि प्रदान किये जाने की व्यवस्था है।
^बालश्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी कार्य में नियोजित करना अपराध है। यह संज्ञेय प्रकृति का अपराध है। यदि कोई नियोक्ता 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कार्य करवाता है, तो वह दंडित किया जाएगा। लोकेशकुमार शर्मा (आरजेएस), पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,
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