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बच्चों को हुआ इनसिफेलाइटिस का संक्रमण
शहर के तापमान में हो रही बढ़ोतरी ने बच्चों की सेहत बिगाड़ दी है। बच्चों में सामान्य बुखार इनसिफेलाइटिस में बदल रहा है। इस समय हाईग्रेड फीवर से पीड़ित 20 बच्चे शहर के अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। सीएमएचओ ने बुखार से पीड़ित बच्चों की स्टेटस रिपोर्ट बुधवार तक मांगी है।
हमीदिया, मिरेकल, जेके और जेपी अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित 20 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से गंभीर हालत के 8 बच्चों को आईसीयू में भर्ती किया गया है। शेष 12 का इलाज जनरल वार्ड में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक गर्मियों में बच्चों को बैक्टीरियल और वायरल इनफेक्शन होने पर बुखार आता है। शुरुआत में बुखार का इलाज नहीं होने पर इसका संक्रमण बच्चे के दिमाग तक पहुंच जाता है। इससे बच्चे को 105 से 107 डिग्री तक तेज बुखार आता है। इसे नियंत्रित नहीं करने पर ब्रेन हेमरेज तक हो सकता है।
आईसीयू में छह मरीज
गांधी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आर. टिक्कस ने बताया कि आईसीयू और पीआईसीयू में वायरल इनसिफेलाइटिस से पीड़ित 6 बच्चे गंभीर हालत में भर्ती किए गए थे। फिलहाल सभी की हालत में सुधार हो रहा है।
पहचान के लक्षण
मिरेकल हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मिश्रा के अनुसार
105 से 107 डिग्री के बीच बुखार आना। सर्दी-जुकाम और सुस्ती रहना। सिर में तेज दर्द के बाद बेहोश होना। बुखार के दौरान मिर्गी के जैसे झटके आना।
बारिश में संक्रमण का ज्यादा खतरा
जीएमसी में प्रोफेसर डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि वायरल इनसिफेलाइटिस का संक्रमण बारिश में ज्यादा फैलता है। इसका वायरस मच्छर के काटने और दूषित खाद्य सामग्री से पहुंचता है।
एक्सपर्ट कमेंट
दो दिन में तीन मरीजों की रिपोर्ट देखी
बीते दो दिन में वायरल इनसिफेलाइटिस के तीन मरीजों के परिजन रिपोर्ट दिखाने अस्पताल आए थे। तीनों को वायरल फीवर का सही इलाज नहीं मिलने के कारण इनसिफेलाइटिस का संक्रमण हुआ था। वायरल इनसिफेलाइटिस एक प्रकार का दिमागी बुखार है, जो बच्चे के शरीर में किसी भी वायरस का संक्रमण बढ़ने पर हो सकता है। -डॉ. राहुल अग्रवाल, बांबे हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ
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