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जुड़वां बच्चे होने पर प्रेगनेंसी में आने वाली जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रीक्लम्प्सिया, जेस्टेशनल डायबिटीज और प्रीटर्म लेबर का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। अगर आपके पेट में जुड़वां बच्चे हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान नियमित चेकअप करवाती रहें।
ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल ऐसे करें -
1. ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल- भारी वजन उठाने से परहेज करें
ट्विन्स प्रेग्नेंसी में देखभाल करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि गर्भ में जुड़वां बच्चे पलने से गर्भवती महिला का वजन सामान्य से अधिक बढ़ा होता है। इसलिए महिला को गर्भावस्था के दौरान बहुत सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। जैसे कि महिला को भारी वजन उठाने से परहेज रखना, क्योंकि इससे उनके पेट पर दबाव पड़ता है। इससे महिलाओं को गर्भाशय में दर्द हो सकता है। साथ ही इससे शिशु के गर्भ में नीचे आने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा होने पर गर्भवती महिला को ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। इतना ही नहीं इससे मिसकैरिज होने की भी खतरा होता है।
2. ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल- प्रेग्नेंसी में अपने आहार का ध्यान रखें
ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आहार में पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना चाहिए। क्योंकि गर्भ में दो शिशु पल रहे होते हैं। महिला के गर्भ में शिशु का विकास गर्भवती महिला के आहार के माध्यम से लिए जाने वाले न्यूट्रिशन से होता है। गर्भावस्था में स्वस्थ आहार महिला का स्वास्थ्य ठीक रखने के अलावा गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखता है। इसीलिए कहा जाता है कि स्वस्थ मां के शरीर में ही स्वस्थ शिशु का घर होता है। अतः गर्भवती महिला को संतुलित, पौष्टिक और सभी मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
3.ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल-डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें
ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिन महिलाओं के गर्भ में जुड़वां बच्चे पल रहे हो उन्हें अपने शरीर का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी होता है कि वे ज्यादा-से-ज्यादा मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करें। इससे शिशु की हड्डियों को मजबूती मिलेगी। इसके लिए आपको दूध, पनीर आदि डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए। इससे गर्भवती महिला के शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।
4. ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल- सेक्स करते समय सावधानी बरतें:
गर्भ में एक शिशु के पलने पर डॉक्टर सेक्स के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहते हैं। अब यदि गर्भ में जुड़वां बच्चे हो तो डॉक्टर से समझकर सेक्स का डिसीजन लेना चाहिए। सेक्स करना है या नहीं यह हर महिला की स्थिति पर निर्भर करता है। जुड़वां बच्चे होने पर गर्भाशय का अकार बढ़ जाता है। सेक्स करते समय गर्भाशय से टकराव होने पर शिशु को चोट पहुंचने का खतरा रहता है। अगर सेक्स करते भी हैं तो सेक्स पुजिशन का ख्याल रखें। इसके लिए आप आपने गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकती हैं।
5. ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल- किसी तरह का खिंचाव न आने दें
गर्भवती महिला के लिए प्रेग्नेंसी के नौ महीने बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उन्हें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उनके पेट पर किसी तरह का खिंचाव आए या दबाव पड़े। क्योंकि गर्भ में जुड़वां बच्चे होने के कारण पेट पर किसी तरह के दबाव पड़ने से परेशानी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को पैरों पर भार रखकर बहुत देर तक नहीं बैठना चाहिए। इससे भी पेट पर खिंचाव पड़ता है।
6. ट्विन प्रेग्नेंसी में देखभाल- जुड़वां बच्चे की कंडिशन जानने के लिए डॉक्टर से करवाते रहें जांच
अधिकतर मामलों में गर्भ में जुड़वां बच्चों के पलने पर सिजेरियन बर्थ की चांस अधिक होते हैं। कुछ मामलों में जुड़वां बच्चे नॉर्मल डिलिवरी से भी जन्म लेते हैं। ऐसे में आपको शिशु की स्थिति को समझने के लिए और बर्थ कंडिशन को जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए। ऐसा देखा गया है कि गर्भ में जुड़वां बच्चे के होने पर बर्थ कॉम्प्लिकेशन ज्यादा होती हैं। साथ ही गर्भवती महिला को पेट दर्द, ब्लीडिंग या ज्यादा उल्टी आदि की भी शिकायत होती है।
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