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Risk of Diabetes: नींद की समस्या से भी बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा, अपने सोने के पैटर्न में करें बदलाव
कम नींद डायबिटीज मरीजों के लिए है खतरनाक-
How To Improve Sleep Patterns In Diabetes: बेहत स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद लेना हर किसी के लिए जरूरी होता है. अगर किसी को टाइप 2 डायबिटीज है तो उसके लिए तो यह और भी जरूरी हो जाता है. पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने पर ब्लड शुगर लेवल पर निगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. बेहतर हेल्थ के लिए जितना जरूरी न्यू्ट्रिशन और एक्सरसाइज होते हैं उतना ही जरूरी होता है बेहतर नींद लेना भी. कम सोने से बॉडी में स्ट्रेस हो सकता है, जिससे कोर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज होता है. कोर्टिसोल, इंसूलिन रेसिसटैंस और ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है.
वहीं दूसरी ओर बहुत अधिक नींद लेना भी टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है. 2020 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक डायबिटीज वाले जो मरीज 7 घंटे से ज्यादा सोते हैं उनके मरने की आशंका सात घंटे की नींद लेने वालों की तुलना में ज्यादा होती है. डायबिटीज मरीजों के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी होता है, तो चलिए जानते हैं कैसे कर सकते हैं नींद पैटर्न में सुधार.
स्लीप एपनिया की करें जांच
एवरीडे हेल्थ के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज मरीजों में स्लीप एपनिया डिस्ऑर्डर की समस्या सामान्य होती है. ओवरवेट लोग इसके जल्दी शिकार होते हैं. स्लीप एपनिया से सोते वक्त सांस लेने में परेशानी होती है. सोते समय असामान्य ब्रीदिंग से बॉडी में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित होती है और इससे स्लीप क्वालिटी खराब होती है. स्लीप एपनिया के लक्षण है जोर से खर्राटे लेना, दिन में बहुत ज्यादा नींद आना, चिड़चिड़ापन और मॉर्निंग हैडेक. इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
अपनाएं गुड स्लीप हाइजीन
एडल्ट के लिए रात में 7 से 9 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है. टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के लिए कम से कम 7 घंटे की नींद लेना जरूरी है. अदर एक्टिविटी की तरह पर्याप्त नींद लेने की आदत डालें. सोने से पहले टीवी या फोन स्क्रीन को देखना बंद करें. इसके अलावा दिन में कभी भी 20 मिनट से ज्यादा का नैप न लें. दिन में लंबा नैप लेने से रात की नींद डिस्टर्ब हो सकती है.
दिन में करें एक्सरसाइज
अगर दिन में फिजिकल एक्टिविटी की जाए तो रात में बेहतर नींद आती है. 10 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज से भी अच्छा फायदा हो सकता है. एक्सरसाइज से बॉडी का इंटरनल टेम्प्रेचर बढ़ता है और बाद में जब टेम्प्रेचर वापस नॉर्मल होता है तब थकान महसूस होती है और इससे बेहतर नींद आती है.
हर किसी को स्ट्रेस तो होता है लेकिन टाइप 2 डायबिटीज पेशेंट में स्ट्रेस लेवल कुछ ज्यादा ही होता है.इससे नींद पर असर पड़ता है. इसलिए बेड पर जाने से पहले स्ट्रेस को दूर करने के तरीकों को अपनाया जा सकता है जैसे डीप ब्रीदिंग, विजुआलाइजेशन और मेडिटेशन.
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