गर्भाशय में कौन कौन से रोग हो सकते हैं?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 15:27

एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय से जुड़ी एक समस्या है। यह समस्या महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सर्वाधिक प्रभावित करती है, क्योंकि गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने में गर्भाशय की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कई महिलाओं में यह समस्या अत्यधिक गंभीर होकर शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करती है। वैसे आधुनिक दवाइयों और उपचार के विभिन्न विकल्पों ने दर्द और बच्चे होना, दोनों समस्या से राहत दिलाई है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एंडोमेट्रियोसिस का यह अर्थ नहीं है कि इससे पीड़ित महिलाएं कभी मां नहीं बन सकती हैं, बल्कि यह है कि इसके कारण गर्भधारण करने में अत्यधिक समस्या आती है।

क्याहै एंडोमेट्रियोसिस : गर्भाशयकी अंदरुनी परत की कोशिकाओं का असामान्य विकास होता है। ये समस्या तब होती है जब कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित हो जाती हैं। इसे एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट कहते हैं। ये इम्प्लांट्स सामान्यतया अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब्स गर्भाशय की बाहरी सतह पर या आंत और पेल्विक गुहा की सतह पर पाए जाते हैं। ये वेजाइना, सरविक्स और ब्लैडर पर भी पाए जा सकते हैं, लेकिन पेल्विस के दूसरे स्थानों की बजाय यहां सामान्यता कम पाए जाते हैं। बहुत ही कम मामलों में एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट्स पेल्विस के बाहर लिवर पर, फेफड़ों या मस्तिष्क के आसपास भी हो जाता है।

इसकेकारण : एंडोमेट्रियोसिसमहिलाओं को उनके प्रजनन काल के दौरान प्रभावित करता है। एंडोमेट्रियोसिस के अधिकतर मामले 25-35 वर्ष की महिलाओं में देखे जाते हैं, लेकिन कई बार 10 साल की लड़कियों में भी यह समस्या होती है। मेनोपॉज़ की आयु पार कर चुकी महिलाओं में यह समस्या बहुत कम होती है। पूरे विश्वभर में करोड़ों महिलाएं इससे पीड़ित हैं। जिन महिलाओं को गंभीर पेल्विक दर्द होता है उनमें से 80 प्रतिशत एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित होती हैं। इसके वास्तविक कारणों का पता नहीं है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि एंडोमेट्रियोसिस लंबी, पतली महिलाओं में अधिक सामान्य है, जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) कम होता है। बड़ी उम्र में मां बनने वाली या कभी मां बनने वाली महिलाओं में भी यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा जिन महिलाओं में पीरियड्स जल्दी शुरू हो जाते हैं या मोनोपॅज़ देर से प्रारंभ होता है, उनमें भी इसका खतरा बढ़ जाता है। अनुवांशिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लक्षण: अधिकतरमहिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जो लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें पीरियड्स के समय अत्यधिक दर्द, अंडोत्सर्ग के समय पेल्विक पेन, लेकिन यह सामान्य महिलाओं में भी हो सकता है। इस दर्द की तीव्रता हर महीने बदल सकती है और हर महिला में यह अलग-अलग हो सकती है। पेल्विक क्षेत्र में दर्द होना और यह दर्द कई दिनों तक रह सकता है। इससे कमर और पेट में दर्द भी हो सकता है। यह पीरियड्स शुरू होने से पहले हो सकता है और कई दिनों तक चल सकता है। शौच और यूरीन करने के समय दर्द हो सकता है। यह समस्या अधिकतर पीरियड्स के समय अधिक होती है। पीरियड्स के समय अत्यधिक रक्तस्राव होना। संबंधों के दौरान या बाद में दर्द होना। इसके अलावा पेट के निचले भाग में दर्द होना, डायरिया और कब्ज। अत्यधिक थकान होना। यूरीन पास करते समय दर्द होना यूरीन में रक्त आना। अगर एंडोमेट्रियोसिस फेफड़ों में है तो दुर्लभ लक्षणों में छाती में दर्द या खांसी में खून आना, अगर मस्तिष्क में है तो सिरदर्द और चक्कर आना।

जोखिमजांच : कईकारक एंडोमेट्रियोसिस की आशंका बढ़ा देते हैं- जैसे बच्चे को जन्म देना। निकट संबंधियों, जैसे मां, मौसी, बहन को एंडोमेट्रियोसिस होना। जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस है, उनमें से 35-50 प्रतिशत महिलाओं को गर्भधारण में समस्या होती है। इससे फैलोपियन ट्यूब बंद हो जाती हैं। अल्ट्रासाउंड से एंडोमेट्रियोसिस होने का पता तो नहीं चलता है, लेकिन इससे एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ी सिस्ट की पहचान हो जाती है। एंडोमेट्रियोसिस की जांच के लिए सर्जरी की जाती है जिसे लैप्रोस्कोपी कहते हैं। इसके बाद स्थिति के अनुसार इलाज किया जाता है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info