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डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग कà¥à¤¯à¤¾ है डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग करने की सामगà¥à¤°à¥€ à¤à¤µà¤‚ विधि बताà¤à¤‚?
घाव की देखà¤à¤¾à¤² के पà¥à¤°à¤•ार:
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•ोलॉइड डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग – इस पà¥à¤°à¤•ार की घाव देखà¤à¤¾à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से जलन, दबाव अलà¥à¤¸à¤° और वेनस अलà¥à¤¸à¤° के लिठलागू होती है।
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग – हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग का उपयोग संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ घाव और छोटे सà¥à¤°à¤¾à¤µ के साथ घाव के उपचार के लिठकिया जाता है।
पटà¥à¤Ÿà¥€ कैसे बांधी जाती है?
कैसे करें कà¥à¤°à¥‡à¤ª बैंड का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤²
गरम पटà¥à¤Ÿà¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² आपको चिकितà¥à¤¸à¤• की सलाहनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही करना है।
गरम पटà¥à¤Ÿà¥€ को अपनी शरीर के अंगों पर लगातार बांधकर न रखें।
लगà¤à¤— 3 से 4 घंटे बीत जाने के बाद इसे खोलें और कà¥à¤› समय बाद दोबारा बांधें। कà¥à¤›-कà¥à¤› समय पर à¤à¤¸à¤¾ करते रहें।
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•ोलॉइड डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग – इस पà¥à¤°à¤•ार की घाव देखà¤à¤¾à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से जलन, दबाव अलà¥à¤¸à¤° और वेनस अलà¥à¤¸à¤° के लिठलागू होती है। हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग – हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤² डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग का उपयोग संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ घाव और छोटे सà¥à¤°à¤¾à¤µ के साथ घाव के उपचार के लिठकिया जाता है।
घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठकौन सी दवा लगाà¤à¤‚?
घाव पर नीम का पेसà¥à¤Ÿ लगाया जा सकता है। नीम में फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो कोलेजन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करता है, जिससे तà¥à¤µà¤šà¤¾ का लचीलापन बना रहता है और घाव जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¤à¤¾ है। इसमें à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• और जलन विरोधी गà¥à¤£ होते हैं। इसका पेसà¥à¤Ÿ बनाने के लिठनीम का रस और हलà¥à¤¦à¥€ पावडर का उपयोग करें।
बैडेंज से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग पैडà¥à¤¸ को जीवाणà¥à¤°à¤¹à¤¿à¤¤ बनाà¤à¤‚ बैंडेज को पैड के दोनों ओर से पकड़ें। पैड को सीधा घाव पर रखें। अंग और पैड के आस-पास छोटे सिरे को à¤à¤• बार घà¥à¤®à¤¾à¤à¤‚। दूसरे हिसà¥à¤¸à¥‡ को अंग के इरà¥à¤¦ गिरà¥à¤¦, पूरे पैड को कवर करते हà¥à¤ बांधे।
पटà¥à¤Ÿà¥€ बांधने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ कà¥à¤¯à¤¾ है?
चोट लगने पर खून को बहने से रोकने और संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाने के लिठडà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग की जाती है। चोट लगने पर खून को बहने से रोकने और संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाने के लिठडà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग की जाती है। यदि इसमें सावधानी नहीं बरती गई तो दिकà¥à¤•त बढ़ती है। पटà¥à¤Ÿà¥€ के टाइट बांधने से शरीर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ की बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ रà¥à¤• जाती है।
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• में कौन से गà¥à¤£ होने चाहिà¤?
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ के गà¥à¤£ कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾- वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अपनी कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾ के आधार पर रोगी की चोट अथवा रोग आदि के विषय आवशà¥à¤¯à¤• जानकारी अधिक पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पूछे बिना ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करनी चाहिये. साधनकà¥à¤¶à¤²- वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अंतà¥à¤¯à¤¤ साधनकà¥à¤¶à¤² à¤à¥€ होना चाहिठजिससे घटना सà¥à¤¥à¤² पर उपलबà¥à¤§ सधनो की सहायता से ही घायल का उचार कर सकें.
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