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अगर पेरेंटà¥à¤¸ अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ का सà¥â€à¤²à¥€à¤ª पैटरà¥à¤¨ और रूटीन बना लें, तो फिर बचà¥â€à¤šà¤¾ बड़े आराम से रातà¤à¤° चैन की नींद ले सकता है।
यदि आप à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‡ को रातà¤à¤° सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ को लेकर परेशान हैं, तो यहां हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ तरीके बता रहे हैं जो आपकी इस परेशानी को कम कर
बà¥à¤°à¥€à¤š शिशॠकी नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी के दौरान
बà¥à¤°à¥€à¤š अवसà¥à¤¥à¤¾ वाले शिशॠकी नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी करवाने में सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब शिशॠका शरीर बाहर आ जाता है, मगर सिर अंदर गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ में फंसा रहता है। इससे खरोंच लगने, जनà¥à¤® के समय चोट लगने या मृतà¥à¤¯à¥ होने का à¤à¥€
बà¥à¤°à¥€à¤š गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ होने के कà¥à¤¯à¤¾ कारण होते हैं?
पेट में शिशॠके उलà¥à¤Ÿà¤¾ होने का आमतौर पर कोई सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कारण नहीं होता। कà¥à¤› कारक शिशॠके बà¥à¤°à¥€à¤š अवसà¥à¤¥à¤¾ में होने का खतरा बढ़ा देते हैं, जैसे कि:
आपके गरà¥à¤ में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾ या इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शिशॠहैं।
कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपाय हैं, जिनसे आप शिशॠकी नितंब नीचे वाली अवसà¥à¤¥à¤¾ बदलने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर सकती हैं।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि ये तकनीकें कितनी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ हैं, इसे लेकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ उपलबà¥à¤§ नहीं हैं। हालांकि, कà¥à¤› गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं का मानना है कि ये उपाय उनके लिठकारगर साबित हà¥à¤ हैं। अधिकांश
दूध पिलाने के लगà¤à¤— दस मिनट बाद शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर देना सही रहता है।
कà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
यह सवाल अकà¥à¤¸à¤° कई लोगों के मन में चलता होगा कि कà¥à¤¯à¤¾ उनके ननà¥à¤¹à¥‡ के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है? हालांकि, यह साबित करने के लिठकोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के फायदे कà¥à¤¯à¤¾ हैं? |
अगर गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और सही तरीके से उपयोग किया जाà¤, तो यह शिशॠके लिठफायदेमंद à¤à¥€ हो सकता है।
कॉलिक यानी पेट दरà¥à¤¦ –
कई बार शिशॠको गैस की वजह से पेट में दरà¥à¤¦ या मरोड़ की समसà¥à¤¯à¤¾ होती
à¤à¤• महीने से छोटे शिशॠके लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देना सही नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान शिशॠका पाचन तंतà¥à¤° संवेदनशील और कमजोर होता है, जिस कारण उसे समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
शिशà¥à¤“ं के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कैसे दें?
आप à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š में या डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤° की मदद से गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दे सकते
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कब देना चाहिà¤? –
छै महीने तक बचà¥à¤šà¤¾ केवल मां के दूध पर निरà¥à¤à¤° रहता है और उसका पाचन तंतà¥à¤° à¤à¥€ पूरà¥à¤£ रूप से विकसित नहीं हà¥à¤† होता है अतः इससे पहले बचà¥à¤šà¥‡ को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर पिलाना उचित नहीं है.
जब बचà¥à¤šà¤¾ छै माह का पूरा हो जाता
शिशॠको छह महीने का होने तक केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना ही बेहतर है। जीवन के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ छह महीनों में शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध या फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध से सà¤à¥€ जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ मिल जाते हैं। हालांकि, कà¥à¤› मामलों में डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको चार से छह महीने की उमà¥à¤° के बीच ठोस आहार
Continue reading wordpress ago hindi 0 viewsबचà¥à¤šà¥‡ का सामानà¥à¤¯ वजन 2.5 से 3.5 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® के बीच होता है। अगर वजन 3.5 किलो से थोड़ा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है तो इसे à¤à¥€ सामानà¥à¤¯ माना जाता है। यदि आपके बचà¥à¤šà¥‡ का वजन 2.5 किलो से कम है, तो उसे जनà¥à¤® के समय कम वजन कहा जाता है । यह कà¥à¤›
Continue reading wordpress ago hindi 0 viewsLorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravida odio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequat. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat. Donec congue commodo mi, sed commodo velit fringilla ac. Fusce placerat venenatis mi.
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