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होम्योपैथी की दवा कैसे काम करती है? कैसे शुरू हुआ 'मीठी गोलियों' से इलाज का सिलसिला
होम्योपैथी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर आपके मन में कई सवाल उठते हैं। इस लेख में हमने सभी मुद्दों पर बात करने की कोशिश की है।
आज के समय में भी कई लोग एलोपैथिक दवाओं को छोड़कर कई असाध्य बीमारियों के लिए होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। दुनियाभर में बीमारियों को ठीक करने के लिए लोगों की दूसरी च्वाइस होम्योपैथी होती है। इसमें कई तरीके से मरीज को ठीक करने की कोशिश की जाती है। होम्योपैथई दवा को आप खा सकते हैं, सूंघ सकते हैं और शरीर पर लगा भी सकते हैं। ऐसे में समय पर समय पर होम्योपैथी ट्रीटमेंट और उसकी दवाओं के असर को लेकर कई सवाल उठते आए है। साइंस तो अभी भी होम्योपैथी को मान्यता नहीं देता है लेकिन दिल्ली के होम्योपैथी के डॉक्टर पंकज अग्रवाल का मानना है कि कई रोगों के लिए होम्योपैथी की दवा बेहद कारगर है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि उनके अनुसार, किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए रोगी को केवल होम्योपैथ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए वरना इसके नुकसान भी हो सकते हैं। होम्योपैथ दवाईयां क्या है, उनके फायदे, नुकसान और प्रयोग के बारे में ओएमएच टीम में विस्तार से बात की दिल्ली के होम्योपैथिक एक्सपर्ट डॉ पंकज अग्रवाल से।
क्या है होम्योपैथ का मतलब?
कई लोगों होम्योपैथ दवा खाते तो है लेकिन उसके मतलब या शुरूआत के बारे में कम जानते हैं। तो आइए आपको विस्तार से बताते हैं होम्योपैथ का मतलब। होम्योपैथ दो शब्दों से बनता है, होम्यो और पैथ। इसकी शुरूआत 1807 में सैमुएल हेनीमैन ने की थी और हर साल 10 अप्रैल को होम्यौपैथ के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए होम्योपैथ दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल होमो का मतलब होता है एक जैसा और पैथी का मतलब होती है बीमारी। मतलब साफ है कि यह चिकित्सा पद्धति इस बात पर काम करती है लोहा को सिर्फ लोहा काट सकता है। अगर आपको पेट दर्द या एसिडिटी की बीमारी है, तो आपको इसे बढ़ाने की ही दवा दी जाती है। इसे हम एक और उदाहरण से समझ सकते हैं जैसे अगर आपके शरीर में खुजली की दिक्कत है, तो आपको खुजली बढ़ाने वाली दवा ही दी जाती है, जिससे इस बीमारी को ठीक किया जा सके। हालांकि इसके अनुपात को लेकर आपको काफी सजग रहना पड़ता है।
कैसे बनाई जाती है होम्योपैथी दवा ?
कई बार आपके मन में इन छोटी-छोटी सफेद गोलियों को देखकर सवाल आता होगा कि ये कैसे बनाई जाती है। तो होम्योपैथी दवाओं को एक्सपर्ट पेड़-पौधों और धातुओं की मदद से अर्क के रूप में बनाते हैं। इसका इस्तेमाल डायल्यूट के रूप में किया जाता है। डॉ पंकज के अनुसार, दवा को डायल्यूट रूप में बेहद संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है ताकि बीमारियों पर उसका अधिक असर हो। इसे ही होम्योपैथ में पोटेंसी बढ़ाना कहते हैं या आपने होम्योपैथिक दवाओं की बोतल में इसे सी नाम से देखा भी होगा। इस पद्धति में चिकित्सक मरीज की लाइफस्टाइल, उनके खानपान और शरीर की स्थितियों को लेकर विषेश दवा तैयार करेक देते हैं। साथ ही इसकी मात्रा का भी बहुत बारीक रूप से ध्यान रखा जाता है। जबकि एलोपैथी में एक बीमारी के लिए एक ही दवा कई मरीजों के लिए कारगर होती है।
अब आपका सबसे बड़ा सवाल कि क्या होम्योपैथिक दवाएं कारगर होती है? एक मरीज को सबसे ज्यादा इस बात से फर्क पड़ता है कि उसकी बीमारी जल्दी ठीक हो जाए। फिर चाहे दवा होम्योपैथिक हो या एलोपैथिक। कई लोग एलोपैथिक दवाएं खाकर थक जाते हैं, तो होम्योपैथ का सहारा लेते हैं। डॉ के अनुसार यह कई असाध्य बीमारियों में कारगर है और इसके इस्तेमाल से रोगी को आराम भी मिलता है लेकिन जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि किसी गंभीर बीमारी में आपको एलोपैथ का सहारा लेना चाहिए लेकिन अगर कई अन्य बीमारियों में आप बिना किसी डर के होम्योपैथ का सहारा ले सकते है। डॉ पंकज ने कहा कि कई बीमारियों में तो आप एलोपैथ और होम्योपैथ दोनों का सहारा ले सकते हैं। इस दौरान होम्योपैथ सहायक दवा के रूप में काम करती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट जैसी बीमारियों में सही डॉक्टर का चुनाव करना बहुत जरूरी है।
लेकिन फिर भी हम आपको यह सलाह देते हैं कि अपनी स्थिति के अनुसार, स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए आप उचित चिकित्सा पद्धति का सहारा लें और होम्योपैथ की सही डॉक्टर से ही इलाज कराएं ताकि आपको इसका भरपूर लाभ मिल सके।
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